विवादों में ही रहे थरूर

संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद की दौड़ में रह चुके शशि थरूर ने जब भारत आकर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ना और फिर विदेश विभाग में राज्यमंत्री बनना स्वीकार किया था, तो बहुत से लोगों को आश्चर्य हुआ था.
लेकिन एक साल से भी कम समय के अपने कार्यकाल में शशि थरूर जितने विवादों से घिरे रहे उसने राज्यमंत्री बनाए जाने के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निर्णय को एक तरह से सही ही साबित किया.
आख़िर एक ऐसे विवाद ने ही उन्हें इस्तीफ़ा देने पर मजबूर कर दिया जिसका उनके विभागीय कार्य से कोई लेना देना नहीं था.
विवाद दर विवाद
शशि थरूर को लेकर पहला विवाद तब शुरु हुआ जब यह ख़बर प्रकाशित हुई कि विदेश मंत्री एसएम कृष्णा और शशि थरूर दोनों अपने सरकारी आवास की जगह पाँच सितारा होटल में रह रहे हैं.
आम आदमी के मुद्दे पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस पार्टी के लिए यह ख़बर शर्मिंदगी पैदा करने वाली थी, ख़ासकर तब जब वित्तमंत्री खर्चों में कटौती की बात कर रहे थे.
लेकिन शशि थरूर ने तर्क दिया कि एक तो उनका सरकारी आवास तैयार नहीं है दूसरा किसी सरकारी अतिथि गृह में जिम नहीं है इसलिए वे अपने खर्चे पर होटल में रह रहे हैं और इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

फिर वित्तमंत्री ने खर्चों में कटौती की वजह से मंत्रियों को हवाई यात्राएँ इकॉनॉमी क्लास में करने की हिदायत दी तो उन्होंने इस क्लास को 'कैटल क्लास' कहकर फिर एक विवाद खड़ा कर दिया.
इस विवाद पर उनकी सफ़ाई थी कि अंग्रेज़ी के एक साधारण से मुहावरे को लोग समझ नहीं पाए. लेकिन उन्हें पार्टी आलाकमान के सामने हाज़िर होकर सफ़ाई देनी पड़ी.
यह विवाद ठंडा पड़ता उससे पहले अपने ट्विटर संदेशों के लिए ख्याति कमा चुके विदेश राज्यमंत्री ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि गाँधी जयंती पर लोगों को घर पर आराम करने की जगह काम करना चाहिए.
मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों से जुड़े डेविड हेडली और तहव्वुर राणा का मामला सामने आने के बाद जब भारत सरकार ने अपने वीज़ा नियमों को सख़्त करने का फ़ैसला किया तो उसकी सार्वजनिक रुप से निंदा करके वे फिर सुर्खियों में आए.
इस बीच एक बार उन्होंने कह दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच सऊदी अरब 'इंटरलोक्यूटर' की भूमिका निभा सकता है. इस टिप्पणी के बाद मीडिया में यह विवाद खड़ा हो गया कि विदेश राज्यमंत्री भारत की इस नीति के ख़िलाफ़ बोल रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी और देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जा सकती.
हालांकि इस पर भी शशि थरूर ने कहा कि लोगों ने उनके कहने का ग़लत अर्थ निकाला और 'इंटरलोक्यूटर' कहने से उनका अर्थ मध्यस्थ नहीं था.
ताज़ा विवाद कोच्चि की आईपीएल की टीम का है.
आईपीएल के कमीश्नर ललित मोदी के साथ ट्विटर युद्ध से शुरु हुए इस विवाद ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि आख़िर उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ गया.
इस विवाद में कांग्रेस पार्टी और सरकार दोनों को सफ़ाई देनी पड़ रही है. शशि थरूर की महिला मित्र सुनंदा पुष्कर का नाम सुर्खियों में आया सो अलग.












