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ओडिशा ट्रेन हादसाः भारत में ट्रेनों के पटरी से उतरने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं
- Author, सौतिक बिस्वास
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
शुक्रवार को ओडिशा में हुए भीषण रेल दुर्घटना में तीन रेलगाड़ियों के चपेट में आने से जुड़े कई सवालों के जवाब अब तक नहीं मिल पाए हैं. इस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 275 तक पहुंच गई है और हज़ार से अधिक लोग इसमें घायल हैं.
ख़बरों के मुताबिक़, ओडिशा के बालासोर में एक स्टेशन के पास हुए इस भयावह हादसे में दो तेज़ रफ़्तार यात्री गाड़ियां और एक मालगाड़ी आपस में टकरा गई थीं. इनमें से पहली ट्रेन पटरी पर खड़ी मालगाड़ी से टकराई, जिसके बाद उस यात्री ट्रेन के डिब्बे पलटकर बगल वाली लाइन पर गिरे. दूसरी लाइन पर आ रही एक और सुपरफ़ास्ट ट्रेन न डिब्बों से टकरा गई.
इस भयानक दुर्घटना के पीछे की सच्चाई क्या है, इसका पता एक व्यापक जांच पड़ताल से ही लगाया जा सकता है. मगर, इस भयंकर हादसे ने एक बार फिर रेल यात्रा की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
भारत के रेल नेटवर्क को दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क कहा जाता है. भारत में रेलवे लाइनों का नेटवर्क एक लाख किलोमीटर से भी ज़्यादा लंबा है.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक़ पिछले साल क़रीब 5,200 किलोमीटर नए ट्रैक बिछाए गए. इसके अलावा हर साल क़रीब 8,000 किलोमीटर ट्रैक को हर साल अपग्रेड किया जाता है.
हाईस्पीड ट्रेनें चलाने की तैयारी
हाल ही में एक बातचीत के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी थी कि देश के ज़्यादातर रेलवे ट्रैक को अपग्रेड किया जा रहा है, जिससे उन पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार वाली ट्रेनें दौड़ाई जा सकें.
साथ ही रेल लाइनों के एक बड़े हिस्से को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि उन पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से ट्रेनें चलाई जा सकें. इसके साथ साथ, भारत की रेलवे लाइनों के एक महत्वपूर्ण हिस्से को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलने वाली गाड़ियों के लायक़ बनाया जा रहा है.
साफ़ है कि ये सरकार की उस योजना का एक हिस्सा है, जिसके तहत देश भर में तेज़ रफ़्तार ट्रेनें चलाए जाने की तैयारी हो रही है. भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई और अहमदाबाद के बीच एक हाई-स्पीड रेलवे लाइन भी बिछाई जा रही है.
इसके बावजूद, रेलगाड़ियों के पटरी से उतरने की घटनाएं रेलवे के लिए एक डरावनी सच्चाई बनी हुई हैं.
रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन विवेक सहाय ने मुझे बताया, "किसी ट्रेन के पटरी से उतरने के कई कारण हो सकते हैं. जैसे, रेलवे लाइन का ठीक से रख-रखाव न होना, ट्रेन के डिब्बों में तकनीकी ख़राबी, कभी-कभी ड्राइवर की ग़लती से भी हादसा हो सकता है."
रिपोर्टस क्या कहते हैं?
रेलवे की सुरक्षा पर सरकार की एक रिपोर्ट में पाया गया कि 2019-20 के दौरान रेलवे दुर्घटनाओं में 70 फ़ीसदी मामलों में हादसे का कारण ट्रेनों का पटरी से उतरना रहा. उससे पिछले साल का ये आंकड़ा 68 फ़ीसदी था.
हादसों के कारणों में दूसरे नंबर पर आग लगना 14 फ़ीसदी और टक्कर 8 फ़ीसदी था.
रिपोर्ट में पटरी से उतरने के कारण 40 रेल दुर्घटनाओं की पड़ताल की गई थी, जिनमें 33 पैसेंजर ट्रेनें थीं और सात मालगाड़ियां. इनमें 17 घटनाएं ट्रैक की ख़राबी की वजह से हुई थीं. इनमें पटरी में टूट-फूट या धंस जाने जैसी गड़बड़ियां हो सकती थीं.
ट्रेनों के पटरी से उतरने के 9 हादसे रेलगाड़ी की ख़ामी, जैसे इंजन, कोच या वैगन में ख़राबी के चलते हुए थे.
पटरियों की जांच में आई भारी कमी
चूंकि रेलवे लाइनें लोहे की होती हैं, इसलिए वो गर्मियों में फैल जाती हैं और सर्दियों में सिकुड़ भी जाती हैं. इस कारण रेलवे ट्रैक की नियमित रूप से मरम्मत करते रहने की ज़रूरत होती है.
जैसे कि रेलवे लाइन के ढीले हो गए नट-बोल्ट को कसना, स्लीपर बदलना और स्विच में लुब्रिकैंट डालकर स्विच को दुरुस्त करना वग़ैरह. रेलवे लाइनों के ऐसे निरीक्षण पैदल, ट्रॉली, इंजन या अन्य तरीक़ों से किया जाता है.
अप्रैल 2017 से मार्च 2021 के बीच रेलगाड़ियों के पटरी से उतरने के हादसों की जांच के बाद, केंद्र सरकार के ऑडिटर्स ने जो रिपोर्ट तैयार की थी, उसमें कुछ चिंताजनक बातें सामने आईं. ये इस प्रकार हैंः-
- रिपोर्ट के अनुसार, ट्रैक की हालत और उसमें आई विकृति की ट्रैक रिकॉर्डिंग कार से जांच में 30 से 100 प्रतिशत तक की कमी आई.
- पटरी से उतरने के 1129 मामलों की जांच रिपोर्टों पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि हादसों के लिए दो दर्जन कारण ज़िम्मेदार थे.
- ट्रेनों के पटरी से उतरने के पीछे रेलवे लाइनों का रख-रखाव (171 मामले) एक बड़ा कारण था. इसका दूसरा सबसे बड़ा कारण था, ज़रूरी सीमा से अधिक रेल की पटरी का टेढ़ा होना.
- पटरी से उतरने के 180 से अधिक हादसे यांत्रिक कारणों से हुए जबकि एक तिहाई से ज़्यादा दुर्घटनाएं, ट्रेनों और मालगाड़ियों के डिब्बों में ख़राबी के कारण हुईं.
- पटरी से उतरने के अन्य प्रमुख कारणों में 'ख़राब ड्राइविंग और तय सीमा से अधिक रफ़्तार से ट्रेन चलाना' भी शामिल थे.
भारत की ट्रेनों में एंटी कोलिज़न डिवाइस (टक्कर रोधी व्यवस्था) लगाने की चर्चा तो बहुत होती रही है. लेकिन, रेल मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक़ ये डिवाइस केवल दो प्रमुख रेल मार्गों दिल्ली-कोलकाता और दिल्ली-मुंबई के बीच लगाई गई है.
ये भी साफ नहीं है कि ये सिस्टम पटरी से उतरने या टक्कर की वास्तविक स्थिति में किस तरह से मदद कर सकता था.
साल 2010 में पश्चिम बंगाल में एक पैसेंजर ट्रेन पटरी से उतर कर उसी समय गुजर रही मालगाड़ी से टकराई गई थी जिसमें 150 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई थी.
इस हादसे की जांच करने वालों ने कहा था कि माओवादी विद्रोहियों ने ट्रैक को नुक़सान पहुंचाया था जिसकी वजह से कोलकाता-मुंबई पैसेंजर ट्रेन पलट गई और इसके पांच डिब्बे दूसरी तरफ़ से आ रही मालगाड़ी से टकरा गए.
हालांकि शुक्रवार को हुए ट्रेन हादसे में किसी तरह की तोड़-फोड़ की बात अब तक सामने नहीं आई है.
रिपोर्ट में जताई थी आशंका?
रेलवे के मुताबिक़, 2021-22 के दौरान 34 रेल दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें टक्कर, पटरी से उतर जाना, आग या विस्फ़ोट, रेलवे क्रॉसिंग पर वाहनों के साथ टक्कर जैसे कारण थे. जबकि इसके पिछले साल ऐसी 27 घटनाएं हुई थीं.
31 मई को अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' ने एक रिपोर्ट में कहा कि 2022-2023 में ऐसे हादसों की संख्या बढ़कर 48 पहुंच गई.
इस रिपोर्ट के मुताबिक़, "रेलवे के अधिकारी, हादसों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंतित थे. और उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा था कि वो 'रेलवे कर्मचारियों के काम के ज़्यादा घंटों का गंभीरता से विश्लेषण करें और ख़ास तौर से पूर्व तटीय रेलवे और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मंडलों पर ध्यान देते हुए फ़ौरन सुधार के कदम उठाएं." शुक्रवार का जो हादसा हुआ वो पूर्व तटीय रेलवे ज़ोन में आता है.
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