हरे गेट वाली क़ब्र का सच जानने के बाद क्या बोले पाकिस्तान के लोग

कब्र

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    • Author, मोहम्मद सुहैब
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू

पिछले कुछ दिनों से मीडिया में एक क़ब्र की चर्चा थी जिसके ऊपर एक हरे रंग का गेट लगा हुआ था. कई मीडिया संस्थानों ने दावा किया कि कब्र पाकिस्तान में है और दरवाज़ा लगाने का मक़सद वहां दफ़्न महिला को रेप से बचाना है.

फ़ैक्ट चेक करने वाले एक प्लेटफॉर्म ऑल्ट न्यूज़ ने इन वायरल सोशल मीडिया पोस्ट की पड़ताल की जिसमें पता चला कि यह एक फे़क न्यूज़ थी. ऑल्ट न्यूज़ ने बताया कि क़ब्र वास्तव में भारत के शहर हैदराबाद के एक क़ब्रिस्तान में मौजूद है.

इस ख़बर को बिना पुष्टि के प्रकाशित करने पर भारतीय और पाकिस्तान दोनों ही देशों में सोशल मीडिया पर उन न्यूज़ पोर्ट्ल्स की आलोचना हो रही.

भारत में विभिन्न मीडिया प्लेटफ़ार्म, जिनमें समाचार एजेंसी एएनआई, एनडीटीवी, वल्र्ड इन वन न्यूज़, हिन्दुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और इंडिया टुडे समेत दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स शामिल हैं, ने इस ख़बर को शेयर किया था.

कहां से शुरु हुआ इस ग़लत ख़बर के फैलने का सिलसिला

एक ट्विटर यूज़र हारिस सुल्तान की ओर से सबसे पहले इस गलत जानकारी को ट्वीट किया. सुल्तान ने ऑल्ट न्यूज़ के फ़ैक्ट चेक के बाद अपनी ट्वीट डिलीट करने के साथ-साथ माफ़ी भी मांगी है.

समाचार एजेंसी एएनआई की ओर से भी अपनी ख़बर वापस लेते हुए इसके बारे में स्पष्टीकरण दिया गया था. आईये जानते हैं कि आल्ट न्यूज़ की ओर से किये फ़ैक्ट चेक में क्या बात सामने आई है.

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हैदराबाद की इस क़ब्र पर जाली क्यों लगाई ?

यह मामला शुरू उस समय हुआ था जब सोशल मीडिया पर एक ऐसी क़ब्र की तस्वीर शेयर की गई जिसपर लोहे के सलाख़ों से बनी हरे रंग की जाली लगी हुई थी और इसे एक ताले से बंद किया गया था.

सोशल मीडिया पर इस तस्वीर के शेयर होने के बाद कुछ ट्वीट में दावा किया जाने लगा कि यह तस्वीर पाकिस्तान से और कहा गया कि अब महिलाओं के साथ मौत के बाद भी रेप से लोग इतने डरे हुए हैं कि उन्होंने क़ब्रों पर जालियां और दरवाज़े लगाने शुरू कर दिये हैं.

मीडिया में जिन ट्वीट का सहारा लेकर इस ख़बर को प्रकाशित किया गया था उनमें भी यही दावा दोहराया जा रहा था. लेकिन ऑल्ट न्यूज़ के सह संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर की ओर से इसकी पड़ताल की गयी जिसके बाद एक एक करके सच्चाई सामने आने लगी.

क़ब्र का सच

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हैदराबाद में है ये कब्र

ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल से यह बात मालूम हुई कि यह क़ब्र असल में भारत के शहर हैदराबाद के एक क़ब्रिस्तान में स्थित है. यह क़ब्रिस्तान मदानापत इलाक़े की दाराब जंग कालोनी की मस्जिद सालार मलिक के सामाने स्थित है.

ऑल्ट न्यूज़ की ओर से उस इलाक़े में रहने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता से इस बारे में बात की गई जिन्होंने वहां मस्जिद के मुअज़्ज़िन यानी अज़ान देने वाले के साथ उस क़ब्र पर जाकर एक वीडियो बनाई. इस वीडियो में मुअज़्ज़िन बता रहे हैं कि इस जाली को लगवाने की बात मस्जिद कमिटी के सामने आई थी.

अज़ान देने वाले ने बताया कि जाली लगवाने की एक वजह तो यह थी कि यहां कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनमें लोगों ने पहले से मौजूद क़ब्र को खोदकर वहां मुर्दे दफ़नाये हैं. दूसरी वजह यह थी कि चूंकि यह क़ब्र क़ब्रिस्तान के दरवाज़े पर है इसलिए घर वालों को यह भी डर था कि लोग इस पर चढ़ न जाएं.

ऑल्ट न्यूज़ के अनुसार यह क़ब्र जिस महिला की है उनकी उम्र लगभग 70 साल थी और छड़ से बनी यह जाली उनके बेटे ने लगवाई है.

कब्रृ

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सोशल मीडिया पर

आल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापाक मोहम्मद ज़ुबैर की ओर से इस ख़बर को फ़ैक्ट चेक करने के बाद भारत में जहां लोग उनकी प्रशंसा कर रहे हैं और भारत में पत्रकारिता पर सवाल उठा रह हैं, वहीं कई लोग मोहम्मद ज़ुबैर को 'पाकिस्तान का बचाव' करने के लिए आलोचना का निशाना भी बना रहे हैं.

फ़ेक न्यूज़ के बढ़ते रुझान और बंटे हुए राजनीतिक वातावरण में पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर और उनके संगठन आल्ट न्यूज़ को आमतौर पर कई समूहों से आलोचना का निशाना बनाया जाता है

पिछले साल दिल्ली की पुलिस ने मोहम्मद ज़ुबैर को 'धार्मिक भावना आहत करने' के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया था.

ध्यान रहे कि जिस ट्विटर अकाउंट से यह तस्वीर भारतीय मीडिया में शेयर की गयी थी वह हारिस सुल्तान का है जो अपना परिचय पूर्व मुसलमान के तौर पर कराते हैं और उन्होंने इस बार में एक किताब भी लिखी है.

उन्होंने अपनी ट्वीट में लिखा था, ''पाकिस्तानी समाज इस हद तक यौन बीमारी का शिकार है कि वहां लोगों को अपनी बेटियों को दफ़्न करने के बाद उन्हें रेप से बचाने के लिए क़ब्रों पर ताले लगाने पड़ते हैं.''

एक यूज़र ने लिखा, ''एक इस्लाम विरोधी व्यक्ति ने इस बारे में दावा किया और भारतीय मीडिया ने कैसे इस फ़ेक न्यूज़ को प्रोपेगैंडा के तौर पर इस्तेमाल किया.''

हरे गेट वाली क़ब्र

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इस तस्वीर को भारत के साथ साथ पाकिस्तान में भी शेयर किया गया था और इसकी वजह पहले पाकिस्तान में मीडिया की ओर से रिपोर्ट की जानी वाली ऐसी घटनाएं हैं जिनमें कथित तौर पर महिलाओं की लाशों को क़ब्रों से निकाल कर रेप करने के आरोप सामने आए थे.

मारिया नाम की एक यूज़र ने इस बार में लिखा, ''जिन पाकिस्तानियों ने इस तस्वीर को गलत तरीक़े से शेयर किया और कहा कि या ख़ुदा! हमारा देश तो एक जहन्नम है, उन्हें इस बारे में खेद प्रकट करना चाहिए."

अनस नाम के एक यूज़र ने कहा, ''यही वजह है कि ख़बर को फ़ैक्ट चेक करना बहुत ज़रूरी है क्योंकि हम हर उस चीज़ का समर्थन करते हैं जो हमें लगता है कि सच है.''

तज़य्यन नाम के यूज़र मोहम्मद ज़ुबैर का इस बारे में ट्वीट-थ्रेड शेयर करते हुए लिखा, ''यह थ्रेड उन सभी लोगों के लिए है जो तुरंत ग़लत ख़बरें फैलाते हैं और इसकी पुष्टि नहीं कर लेते.''

पत्रकार फ़रज़ाना शाह ने पाकिस्तानी नेताओं की आलोचना करते हुए ध्यान दिलाया कि लगभग दो साल पहले ईयू डीएस इन्फ़ोलैब की रिपोर्ट में भारत की समाचार एजेंसी एएनआई पर पाकिस्तान विरोधी प्रोपेगैंडा करने का आरोप लगा था था जिसके बारे में बीबीसी की ओर से भी एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की गयी थी.

फ़रज़ाना शाह का कहना है, ''पाकिस्तानी नेता अपने लक्ष्यों के पीछे लगे हैं और एएनआई एक बार फिर फ़ेक प्रोपेगैंडा करने में कामायाब हुई है.''

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