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पूर्णिया मांगे एयरपोर्ट पर नहीं सुन रही सरकार, क्या है वजह - ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, पूर्णिया (बिहार से), बीबीसी हिंदी के लिए
तीन अप्रैल, 1933 के दिन किसी विमान ने पहली बार दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर 'माउंट एवरेस्ट' के ऊपर से उड़ान भरी थी और वो विमान बिहार के पूर्णिया से उड़ा था.
लेडी हाउस्टन नाम की महिला की आर्थिक मदद से एवरेस्ट पर विमान उड़ाने का सपना सच हो पाया था. 1930 के दशक में एवरेस्ट पर विमान उड़ाने के मिशन को लेकर लंदन में 'माउंट एवरेस्ट फ्लाइट कमिटी' का गठन किया गया.
इस मिशन के लिए वेस्टलैंड पीवी छह और वैस्टलैंड पीवी 3 विमानों को डिजाइन किया गया. इन दोनों विमानों में दो लोगों, यानी एक पायलट और एक ऑब्ज़र्वर के बैठने की व्यवस्था थी.
पायलट का कॉकपिट खुला रखा गया था, लेकिन ऑब्ज़र्वर के बैठने की जगह बंद रखी गई थी. ऑब्ज़र्वर को कैमरा भी दिया गया था, ताकि पूरे मिशन को फिल्माया जा सके. इन विमानों में 15 मिनट के लिए इमरजेंसी ऑक्सीजन की व्यवस्था भी की गई थी.
वेस्टलैंड के इन विमानों को पहले लंदन से कराची, समुद्र के रास्ते 11 फरवरी, 1933 को लाया गया. एक महीने बाद, कराची से 1,500 मील का हवाई सफर करके ये विमान पूर्णिया पहुंचे थे.
पायलट मारकिउस ऑफ क्लाइडेसडेल और डोनाल्ड मैकलनटायर ने मौसम ठीक होने के बाद 3 अप्रैल, 1933 को पूर्णिया से उड़ान भरी थी.
इस पूरे मिशन को 'विंग्स ओवर एवरेस्ट: द स्टोरी ऑफ हाउस्टन- मांउट एवरेस्ट फ्लाइट' नाम की शार्ट डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाया गया है.
ये डॉक्यूमेंट्री जिओफैरी बरकास और इवोर मोंटग्यू के निर्देशन में साल 1934 में बनी थी. लगभग 40 मिनट की इस ब्रिटिश डॉक्यूमेंट्री को अकादमी अवार्ड से सम्मानित भी किया गया था. इस फिल्म में एवरेस्ट की रियल फुटेज का इस्तेमाल भी हुआ था.
'एयरपोर्ट फॉर पूर्णिया' कैंपेन
इस तीन अप्रैल को पूर्णिया ज़िले से पहली बार हवाई जहाज उड़े 90 साल बीत गए.
90 साल पहले पूरी तरह से नया विमान बनाना, उस सफ़र को फिल्माकर डॉक्यूमेंट्री तैयार करने का काम आसान नहीं रहा होगा लेकिन आज की तारीख़ में उससे कहीं मुश्किल काम यहां एयरपोर्ट बनाना साबित हो रहा है.
अगस्त 2015 में बिहार को दिए पीएम पैकेज में पूर्णिया से आम लोगों के लिए हवाई सेवा शुरू करने का एलान किया गया था. पूर्णिया में चूनापुर एयरफोर्स स्टेशन का विस्तार करके यह सेवा शुरू की जानी है.
लेकिन गर्मी के इस मौसम में एक ओर बिहार का सियासी और मौसम का पारा चढ़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर हर हफ़्ते रविवार के दिन इस इलाके के नौजवान और बुजुर्ग, खुले आसमान के नीचे टेंट लगा कर धरने पर बैठ रहे हैं. इसे उन्होंने 'एयरपोर्ट फॉर पूर्णिया' कैम्पेन का नाम दिया है.
'एयरपोर्ट फॉर पूर्णिया' कैंपेन के तहत हर हफ्ते शहर के अजीत सरकार स्मारक चौक के पास धरना दिया जाता है.
'सीमांचल कभी प्राथमिकता में नहीं रहा'
इस मुहिम से जुड़े लोगों का आरोप है कि पूर्णिया एयरपोर्ट का काम केन्द्र और राज्य सरकार की अंदरूनी खींचतान और लालफीताशाही में फंसा हुआ है.
इस कैंपेन का नेतृत्व कर रहे विजय कुमार श्रीवास्तव कहते हैं, "राज्य और केन्द्र सरकार की प्राथमिकताओं में कभी सीमांचल नहीं रहा. दरभंगा एयरपोर्ट पीएम पैकेज का हिस्सा नहीं था, लेकिन वहां 78 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करके तुरंत हवाई सेवा शुरू हो गई."
वहीं पंचायत सचिव के पद से रिटायर हुए सुनील कुमार सिंह कहते हैं, "अभी दिल के ऑपरेशन के लिए चेन्नई गया था. चेन्नई से पटना तो दो घंटे में आ गया, लेकिन पटना से पूर्णिया पहुंचने में 15 घंटे लग गए. इसलिए एयरपोर्ट ज़रूरी है."
जेडीयू की प्रदेश महासचिव और पूर्णिया विश्वविद्यालय की सिंडिकेट सदस्य कौशल्या जायसवाल भी इस धरने का हिस्सा हैं.
वे कहती हैं, "पूर्णिया से नेपाल, बांग्लादेश, बंगाल सब जुड़ा हुआ है. ये व्यापार का अहम केन्द्र है. केन्द्र को यहां एयरपोर्ट जल्दी देना चाहिए."
वहीं विद्या विहार स्कूल और इंजीनियरिंग कॉलेज के संचालक राजेश मिश्रा कहते हैं, "एयरपोर्ट होगा, तो प्लेसमेंट एजेंसी और स्टूडेंट का आना-जाना भी आसान होगा."
अलग है किसानों का दर्द
लेकिन शहर के दिल कहे जाने वाले अजीत सरकार स्मारक चौक पर एयरपोर्ट को लेकर जितना उत्साह है, उससे कुछ किलोमीटर दूर गोआसी पंचायत में उतनी ही बेचैनी है.
इस पंचायत के दो वार्ड से पूर्णिया एयरपोर्ट के लिए ज़मीन का अधिग्रहण किया गया है. ये पहली बार नहीं है, जब यहां के किसानों की ज़मीन का अधिग्रहण किया जा रहा है. 1962 में भारत चीन युद्ध के समय भी चूनापुर एयरफोर्स स्टेशन स्थापित करने के लिए ज़मीन अधिग्रहित की गई थी.
किसान अशोक कुमार मेहता की 13 एकड़ ज़मीन 1962 में अधिग्रहित हुई थी. अब बाकी बची 2 एकड़ जमीन भी अधिग्रहित हो गई है.
क्या आपने मुआवज़ा लिया?... इस सवाल पर वो गुस्से में कहते हैं, "हम अपनी ज़मीन नहीं देंगें, तो मुआवज़ा लेने का सवाल ही कैसे उठता है? सरकार चाहे तो सड़क पर खड़ा करके गोली मार दे. मेरे तीन बच्चे हैं, चाचा का परिवार है, सब कैसे पलेगा? सरकार को एक ही किसान से दो-दो बार ज़मीन लेनी है."
अशोक मेहता जैसा गुस्सा पंकज कुमार यादव, भोला मेहता, प्रभात कुमार मेहता, निर्मला में भी है.
बुजुर्ग निर्मली देवी कहती हैं, "ज़मीन सरकार ले लेगी, तो हमारे बच्चे क्या खाएगें? सरकार करोड़ों रुपया भी दे दे, तो वो कितने दिन चलेगा?"
गोआसी के किसानों ने इस अधिग्रहण को पटना हाई कोर्ट में भी चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने मार्च 2022 में सात पेंडिंग मामलों को डिस्पोजल के लिए कलेक्टर कोर्ट भेज दिया. उसका निपटारा अप्रैल 2022 में तत्कालीन ज़िलाधिकारी ने कर दिया गया था.
लेकिन ये प्रशासनिक निपटारा किसानों को संतुष्ट नहीं कर सका है. किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया.
'ज़मीन लेनी थी उत्तर में, ले ली दक्षिण में'
किसानों से 52.18 एकड़ भूमि अधिग्रहण के बाद भी पूर्णिया एयरपोर्ट का निर्माण कार्य चालू नहीं हो पाया है. इसकी वजह केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से 9 जनवरी, 2023 को पूर्णिया सांसद संतोष कुमार को लिखे पत्र में मिलती है.
पूर्णिया एयरपोर्ट के लिए 150 करोड़ रुपए के आवंटन का ज़िक्र करते हुए इस पत्र में लिखा है, "राज्य सरकार ने जिस 52.18 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया है, वो भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित भूमि नहीं है."
"राज्य सरकार के अनुरोध पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने अधिग्रहित भूमि पर संशोधित योजना बनाई है. उसके लिए अतिरिक्त 15 एकड़ भूमि की आवश्यकता है. साथ ही अधिग्रहित भूमि को फोरलेन के ज़रिए एनएच-31 से जोड़ने का कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है."
6 मार्च, 2023 को बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय को एक पत्र लिखकर अधिग्रहित 52.18 एकड़ ज़मीन को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से लेने और हवाई अड्डे का निर्माण कार्य जल्दी शुरू करने का अनुरोध किया गया है.
इस पत्र में इस बात पर सहमति दी गई है कि "हवाई अड्डे को फोरलेन के ज़रिए एनएच-31 से जोड़ा जाएगा. इस फोरलेन के चौड़ीकरण का काम हवाई अड्डा भवन बनाने की स्वीकृति मिलने के तुरंत बाद शुरू किया जाएगा."
बिहार सरकार फोरलेन संपर्क पथ पर तो आश्वासन दे रही है, लेकिन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की और 15 एकड़ ज़मीन की मांग पर कोई साफ़ जवाब नहीं दे रही है.
बीजेपी नेता और सांसद सुशील कुमार मोदी ने इस बारे में कुछ दिन पहले ट्वीट किया.
दरअसल, ये पूरा मामला उत्तर-दक्षिण दिशा से जुड़ा हुआ है. एयरपोर्ट फॉर पूर्णिया कैंपेन चला रहे विजय कुमार श्रीवास्तव ने इस बारे में आरटीआई से अहम जानकारी जुटाई है.
उनके मुताबिक़, "नवंबर 2016 में राज्य सरकार, भारतीय वायुसेना, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के संयुक्त निरीक्षण दल में रनवे (चूनापुर एयरफोर्स स्टेशन) की उत्तर दिशा में 50 एकड़ में निर्माण करने पर सहमति बनी. इसमें भारतीय वायुसेना द्वारा 5 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी."
लेकिन 8 फरवरी, 2018 को दोबारा हुई एक समीक्षा बैठक में, सुरक्षा के दृष्टिकोण से सैन्य हवाई अड्डे को दक्षिण दिशा में शिफ्ट करने का प्रस्ताव पारित हुआ और इसके लिए ज़मीन चिन्हित की गई. यानी पहले जिस ज़मीन का अधिग्रहण रनवे के उत्तर दिशा में होना था, अब उसे दक्षिण दिशा में करने का फ़ैसला किया गया.
चूनापुर के स्टेशन कमांडर रहे विश्वजीत कुमार कहते हैं, "ये तकनीकी पक्ष थे, जिसमें किसी तरह की तब्दीली से पहले एक्सपर्ट से राय ली जानी चाहिए."
इस बीच गोआसी के किसानों का आरोप है, 'कुछ बड़े और प्रभावी' लोगों की ज़मीन बचाने के लिए उनकी ज़मीनें अधिग्रहित की गई.
पूर्णिया के वर्तमान ज़िलाधिकारी कुंदन कुमार ने बीबीसी से कहा, "मैंने अभी ही पूर्णिया डीएम के तौर पर ज्वाइन किया है. मैं इस मामले में अभी कमेंट करने की स्थिति में नहीं हूं."
वैसे पूर्णिया में इससे पहले भी आम लोगों के लिए 2012 में हवाई सेवा शुरू की गई थी. उस वक्त चूनापुर एयरफोर्स स्टेशन के कमांडर विश्वजीत कुमार ने ये सेवाएं शुरू करवाई थी, जो एक साल ही चल पाई.
केन्द्र और राज्य के अपने-अपने राग
सितंबर 2022 में अमित शाह ने पूर्णिया की रैली में कहा था, "पूर्णिया में हवाई अड्डा लगभग बन गया है. 12 ज़िलों के लोगों को अब बागडोगरा या पटना नहीं जाना पड़ेगा. पूर्णिया से सस्ते हवाई जहाज पर बैठकर दिल्ली और मुंबई जा सकते हैं. अरे ताली बजाओ, भाई. हवाई अड्डा आप लोगों के लिए बनाया है."
अमित शाह का ये बयान तब आया था, जब एएआई ने हवाई सेवा के लिए राज्य सरकार से ज़मीन ली ही नहीं.
फरवरी 2023 में पूर्णिया में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पत्रकारों से कहा, "केन्द्र जो कुछ कह रहा है, हम कर रहे हैं, लेकिन पूर्णिया में एयरपोर्ट का काम शुरू ही नहीं हो रहा है."
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