You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
बिहार: अमित शाह ने नीतीश पर साधा निशाना, लालू बोले- 2024 में बीजेपी की विदाई तय
- Author, विष्णु नारायण
- पदनाम, पश्चिम चंपारण से, बीबीसी हिन्दी के लिए
"नीतीश बाबू आप प्रधानमंत्री बनने के लिए विकासवादी से अवसरवादी बने, कांग्रेस और आरजेडी की शरण में चले गए. आपकी इस मंशा ने बिहार का बंटाधार कर दिया, लेकिन उनको मालूम नहीं कि वहां वैकेंसी ख़ाली नहीं, 2024 में तो मोदी जी आने वाले हैं."
देश के गृह मंत्री और भाजपा नेता अमित शाह ने बिहार के पश्चिमी चंपारण ज़िले में आयोजित एक आम सभा में प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए ये बात कही.
वहीं इसी दिन यानी 25 फ़रवरी को बिहार के सीमावर्ती इलाक़े पूर्णिया में महागठबंधन के नेताओं की भी एक सभा थी.
ज़ाहिर तौर पर बिहार के अलग-अलग इलाक़ों में होने वाली इन राजनीतिक सभाओं को आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. साथ ही बिहार के मज़बूत वामपंथी दल भाकपा (माले) के महाधिवेशन की शुरुआत से पहले पटना के गांधी मैदान में की गई रैली को भी लोकसभा चुनाव के आग़ाज़ के तौर पर देखा गया.
वैसे तो अमित शाह आज से लगभग पांच महीने पहले भी बिहार आए थे. उस वक्त उन्होंने मुस्लिम बहुल इलाक़ा कहे जाने वाले सीमावर्ती इलाक़े में जनसभा को संबोधित किया था. तब भी पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखी-सुनी गई थी.
चाहे वो पूर्णिया के एयरपोर्ट को लेकर हो या फिर बिहार में बढ़ते क्राइम का मसले को लेकर हो लेकिन तब से अब तक गंगा में काफी पानी बह चुका है.
नीतीश कुमार इस बीच भाकपा (माले) के मंच से भाजपा को 100 के नीचे ले जाने और कांग्रेस की ओर से संदेशे के इंतज़ार की बात भी कहते देखे-सुने गए.
ज़ाहिर तौर पर अगला लोकसभा चुनाव होने तक बिहार समेत पूरी हिन्दी पट्टी का सियासी तापमान हर बीतते दिन के साथ अभी और बढ़ेगा. इस बीच नए दलों और गठबंधनों का बनना-बिगड़ना तो जारी है ही.
अगर पश्चिमी चंपारण (वाल्मिकीनगर लोकसभा) में गृह मंत्री अमित शाह के जनसभा की बात करें तो यहां नेताओं ने एक तरफ नीतीश कुमार को पाला बदलने के लिए आड़े हाथों लिया, तो दूसरी तरफ अगले चुनावों में बीजेपी की जीत का भी भरोसा जताया.
बिहार की पूर्व उप मुख्यमंत्री रेणु देवी ने चंपारण के इलाक़े को भाजपा का गढ़ करार दिया, तो बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी बोले कि इस बार बीजेपी जदयू को किसी सीट पर जीतने नहीं देगी.
उन्होंने कहा, "साल 2014 में भी नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनने का कीड़ा काट लिया था, और उन्हें फिर से कीड़े ने काटा है लेकिन तब भी बिहार की जनता ने उनका इलाज किया था और इस बार भी भरपूर इलाज करेगी. इस बार तो जदयू का सूपड़ा ही साफ हो जाएगा."
जदयू और राजद, पानी और तेल का गठबंधन
जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने जहां एक ओर कांग्रेस और आरजेडी के साथ जाने पर नीतीश कुमार को आड़े हाथों लिया, वहीं जदयू और राजद के गठबंधन को पानी और तेल का गठबंधन करार दिया.
उन्होंने कहा, "मैं बिहार की जनता को अपील करने आया हूं कि जदयू और आरजेडी का मेल अपवित्र गठबंधन है, जैसे पानी और तेल. पानी और तेल इकट्ठा कभी होते हैं क्या? मगर यह ऐसा गठबंधन है जहां जदयू पानी है और आरजेडी तेल ही तेल."
वहीं शनिवार को सीएम नीतीश कुमार ने पूर्णिया में एक जनसभा को संबोधित किया.
उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधा और कहा "ये लोग (भाजपा वाले) तो अटल बिहारी वाजपेयी तक को भूल गए. अब तो हमलोग एकजुट हैं और एकजुट रहेंगे."
उन्होंने कहा, "हम लोगों को मिलकर बिहार बचाना है, इनके भुलावे में नहीं आना है. हमें आपस में भाईचारा बनाए रखना है. ये लोग किन्हें-किन्हें पार्टी से ले जाते हैं, जब इनकी पार्टी 2024 में हारेगी तो एक-एक बात पता चलेगी. अभी हमें कुछ कहने की ज़रूरत नहीं."
'लालटेन से उठती लौ में धधक रहा बिहार'
जनसभा के मंच से अमित शाह जदयू और आरजेडी के साथ आने और मिलकर सरकार चलाने को लेकर हमलावर रहे.
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लालटेन से उठती लौ में पूरा बिहार धधक रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य अराजकता की चपेट में है और यहां क़ानून और व्यवस्था ध्वस्त हो गई है.
उन्होंने कहा कि बालू और शराब माफ़ियाओं के समूह राज्य में फिर से ज़िंदा हो रहे हैं.
वहीं महागठबंधन की जनसभा को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने भी डिजिटल माध्यम से संबोधित किया.
उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा, "आज देश टुकड़े-टुकड़े होने की कगार पर है और भाजपा सिर्फ़ आरएसएस का मुखौटा भर है. आरक्षण विरोधी भाजपा की 2024 में विदाई तय है. बिहार के करवट पर ही देश की हवा बदलती है."
नीतीश को किया चैलेंज, गुप्त डील की उठाई बात
अमित शाह ने जनसभा में केंद्र की ओर से शुरू की जा रही रक्सौल एयरपोर्ट जैसी योजनाओं को लेकर नीतीश कुमार पर आरोप लगाया और कहा कि लालू प्रसाद यादव के दबाव में आकर उन्होंने ज़मीन के आवंटन में रोड़े अटकाए.
वहीं उन्होंने ये भी कहा कि नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद से वादा किया है कि वे उनके बेटे तेजस्वी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाएंगे, लेकिन नीतीश जी तिथि नहीं बता रहे.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में इतनी तो पारदर्शिता होनी चाहिए कि आप तारीख घोषित करें और बताएं कि बिहार में कब तक पूरा जंगलराज प्रस्थापित करेंगे. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य में आधा जंगलराज तो आ ही गया है.
हालांकि दूसरी तरफ सीमांचल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सूबे के उप मुख्यमंत्री व राजद नेता तेजस्वी यादव ने अमित शाह के बिहार में जंगलराज वाले बयान पर कहा भाजपा के नेताओं में कोई शर्म नहीं बची.
उन्होंने कहा, "यहां जंगलराज नहीं जनता का राज है. ग़रीबों का राज है. बिहार के लोग बिकाऊ नहीं हैं बल्कि टिकाऊ हैं."
तो वहीं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह 'ललन सिंह' ने कहा "लालू प्रसाद बिहार में जंगलराज के प्रतीक नहीं, बल्कि बिहार में सामाजिक न्याय की लड़ाई के सूत्रधार के प्रतीक हैं."
बिहार में क्यों हो रहा घमासान?
अब इस बात को तो सभी राजनीतिक पंडित जानते और समझते हैं कि राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज़ से उत्तर प्रदेश के बाद बिहार पर सबकी नज़रें क्यों रहती हैं?
ज़ाहिर तौर पर यहां से लोकसभा की 40 सीटें हैं और पिछली बार 40 में से 39 सीटें एनडीए गठबंधन के झोले में गईं थीं.
तब एक ओर जहां भाजपा-जदयू और लोजपा साथ में चुनाव में उतरे थे, तो वहीं दूसरी तरफ राजद-कांग्रेस के साथ जीतन राम मांझी, मुकेश सहनी और उपेन्द्र कुशवाहा के संबंधित दलों के साथ वाम दल का भी साथ था.
तब का महागठबंधन या कहें कि यूपीए ने सिर्फ़ एक, किशनगंज लोकसभा सीट जीती थी. इसके पीछे भी एक मुख्य वजह उसका मुस्लिम बहुल इलाक़ा होना था.
पिछले साल सितंबर में अमित शाह ने इस इलाक़े में राजनीतिक सभा की और एक तरह से यहं से लोकसभा चुनाव की अनौपचारिक शुरुआत भी कर दी थी.
अब जब नीतीश कुमार भाजपा का साथ छोड़ने के बाद महागठबंधन के साथ हैं तो बिहार के राजनीति की रूपरेखा बदलनी भी तय है.
किसी को रिझाने की कोशिशें हो रही हैं तो कोई कहीं का दिखते-दिखते कहीं और का हो जा रहा है. जैसे कुछ दिन पहले तक जदयू में हिस्सेदारी मांग रहे उपेन्द्र कुशवाहा ने अपना अलग दल बना लिया है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की शिकायतों और निवारण की बात ख़ुद सीएम नीतीश कुमार ने पूर्णिया की जनसभा में की.
ज़ाहिर तौर पर अगले लोकसभा चुनावों से पहले बिहार जैसे राजनीतिक नज़रिए से बेहद सजग माने जाने वाले राज्य में दलों के गठबंधन और टूट-फूट के कई और रंग अभी दिखने बाकी हैं.
लेकिन एक बात स्पष्ट है कि बिहार में अभी और राजनीतिक प्रयोग होने बाक़ी हैं. हालांकि शनिवार यानी 25 फ़रवरी को बिहार में जिस तरह अलग-अलग पार्टियों की जनसभाएं हुईं और उनमें जिस तरह अपने विरोधिों पर तंज कसा गया, इसे सियासी शनिवार कहना ग़लत नहीं होगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)