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बिहारः 'नौकरी देने का वादा, नौकरी चाहने पर डंडे'
- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना से
बिहार की राजधानी पटना में एक बार फिर से नौकरी की इच्छा रखने वालों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है.
बीएसएससी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि बिना किसी सूचना के पुलिस ने उनपर लाठीचार्ज कर दिया.
दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि छात्रों ने कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने की कोशिश की, जिसकी वजह से बल प्रयोग करना पड़ा है.
इस घटना में कई छात्रों को चोट लगी है.
दरअसल, 23 दिसंबर को बिहार स्टाफ़ सेलेक्शन कमीशन के ग्रेजुएट लेवल की दो चरणों की परीक्षा हुई थी.
24 दिसंबर को इसके तीसरे चरण की परीक्षा हुई, लेकिन 23 तारीख़ की परीक्षा के पहले चरण का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद इसे रद्द कर दिया गया.
नाराज़ छात्रों की मांग है कि इसके तीनों चरणों की परीक्षा रद्द की जाए. इसी मांग को लेकर छात्र पटना में प्रदर्शन कर रहे थे.
छात्रों का क्या कहना है?
पटना के डाक बंगला चौराहे पर पुलिस की लाठी से घायल छात्र नवनीत ने बीबीसी को बताया, "हमलोग शांतिपूर्वक बीएसएससी की तरफ जा रहे थे, लेकिन पुलिस आई और लाठीचार्ज कर दिया."
"हमारी मांग है कि बीएसएससी के तीनों चरणों की परीक्षा रद्द की जाए."
बीएसएससी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे मोतिहारी के ओम प्रकाश का कहना है, "परीक्षा हुई नहीं और पेपर लीक हो गया, एक पेपर लीक हुआ तो आप कैसे कह सकते हैं कि दूसरा तीसरा लीक नहीं हुआ है."
मधुबनी के सुर नैन का कहना है, "मेरा परीक्षा 24 तारीख़ को पहली पारी में थी, 23 तारीख़ को पहले चरण का प्रश्नपत्र लीक हो गया. क्या गारंटी है कि दूसरे का पेपर लीक नहीं हुआ होगा? वो हमसे ही कह रहे हैं सबूत लाओ."
"हम कहां से लाएंगे? 2 हजार 250 सीटों के लिए परीक्षा हुई थी, जिसमें 9 लाख बच्चे शामिल हुए थे. हमारी मांग है कि सभी परीक्षा कैंसिल की जाए."
एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने क्या कहा
वहीं मौक़े पर मौजूद एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट एमएस ख़ान का कहना है कि क़ानून और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन को जो काम करना चाहिए, वो स्टेप बाय स्टेप किया गया है.
एमएस ख़ान ने आरोप लगाया, "प्रदर्शन करने वालों ने बैरिकेड उलट दिए, पुलिस से उलझ गए, प्रशासन पर हमला करने की कोशिश की. विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए क़ानून को जो काम करना चाहिए वो किया."
बीएसएससी पेपर लीक मामले की जांच इकोनॉमिक ऑफ़ेंस विंग, पटना कर रहा है. जब इसके सभी चरणों के प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका भी जताई जा रही थी तो बिहार स्टाफ सेलेक्शन कमीशन ने 28 दिसंबर को एक प्रेस नोट जारी किया था.
इसमें कहा गया कि अगर किसी के पास बाक़ी दो चरणों के पेपर लीक होने का कोई सबूत हो तो तीन दिनों के अंदर सूचित करें.
छात्रों का आरोप है कि एक चरण के पेपर लीक होने से बाक़ी पेपर पर उनका भरोसा नहीं रहा गया है और उन्हें भी कैंसिल किया जाना चाहिए.
इधर बीएसएससी ने पहले चरण की परीक्षा दोबारा 45 दिनों के अंदर कराने की बात कही है.
महागठबंधन का नौकरी का वादा
बिहार की राजधानी पटना का डाक बंगला चौराहा दिल्ली के जंतर-मंतर की तरह है, जहां प्रदर्शन की अनुमति न होने पर प्रदर्शन होना आम बात है.
जंतर मंतर से संसद भवन क़रीब है.
इसलिए प्रदर्शनकारी मानते हैं कि यहां से सत्ता तक बैठे लोगों तक आवाज़ पहुंचाना आसान होता है. वहीं डाक बंगला चौराहे से बिहार सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों तक आवाज़ पहुंचाने की कोशिश की जाती है.
हालांकि सरकार विरोधी आवाज़ आमतौर पर सत्ता पक्ष से पहले विपक्ष तक पहुंचा करती है.
बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय जायसवाल का कहना है कि युवाओं को 10 लाख़ नौकरी देने के नाम पर सरकार बनी और युवाओं पर दस लाख़ डंडे बरसाए जा रहे हैं.
संजय जायसवाल का आरोप है, "पिछली बार भी बीएसएससी की परीक्षा के बाद जो नौकरी दी गई उसकी मेरिट लिस्ट पर भी शक होता है. इस समय पेपर लीक मामले में जो महिला पकड़ी गई हैं, उनका बेटा का पिछली बार चयन हुआ था."
"भले ही पूरी लिस्ट ग़लत न हो लेकिन बड़ी संख्या में स्टाफ़ के ही बच्चों का अच्छे नंबर से चयन होना शक पैदा करता है."
हालांकि पिछली बार बिहार की सत्ता में बीजेपी भी जेडीयू की साझेदार थी, लेकिन वो विरोध में हैं तो सरकार को घेरने का मौक़ा कैसे छोड़ सकते हैं.
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा ने मीडिया से बातचीत में इस लाठीचार्ज को 'बर्बरता' कहा है और छात्रों से बातचीत कर इसका समाधान निकालने की मांग की है.
वहीं एलजेपी सांसद चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर इसी बहाने एक बार फिर से निशाना साधा है.
चिराग पासवान ने ट्वीट किया है, "मुख्यमंत्री जी, इतनी कड़ाके की ठंड में आपके प्रशासन के द्वारा BSSC अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज करना दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. लाठी से कभी कलम की आवाज दबाई नहीं जा सकती. नीतीश कुमार जी आप सिर्फ अपने स्वार्थ की राजनीति करते हैं."
इन आरोपों के बीच जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने बीबीसी से कहा, "अपनी बात रखने का हक़ सबको है लेकिन हम ही सही हैं ऐसा मानना ठीक नहीं है. दूसरी तरफ बीजेपी क्या रोज़गार की बात कर रही है."
"केंद्र सरकार नौकरी की जो स्कीम अग्निवीर लेकर आई है उसमें अग्निवीर बेटा पहले रिटायर हो जाएगा और बाप नौकरी करता रहेगा. बीजेपी नौकरी के नाम पर मज़ाक कर रही है."
वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने एक निजी मीडिया चैनल से बातचीत में कहा है कि छात्रों पर लाठी चार्ज होता रहा है, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है.
दिसंबर महीने में भी हुआ था लाठीचार्ज
बिहार में अगस्त 2022 में महागठबंधन की सरकार बनी थी. सरकार बनते समय युवाओं को नौकरी देने पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया गया था, लेकिन सरकार बनने के बाद नौकरी चाहने वालों पर एक महीने के अंदर लाठीचार्ज की ये दूसरी घटना है.
इससे पहले 13 दिसंबर को भी सातवें चरण की शिक्षक बहाली की मांग करने वाले अभ्यर्थियों पर पटना के डाक बंगला चौराहे पर ही लाठीचार्ज हुआ था.
हालांकि बिहार सरकार की तरफ से युवाओं को लगातार नौकरी देने के दावे हो रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव युवाओं को नौकरी की चिट्ठी देते अक्सर सोशल मीडिया पर दिख जाते हैं.
बुधवार को भी तेजस्वी यादव ने स्वास्थ्य विभाग में जल्द ही डेढ़ लाख से ज़्यादा नौकरी देने का वादा किया है. वहीं पटना में युवाओं पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर तेजस्वी के भाई और बिहार सरकार में मंत्री तेजप्रताप यादव ने युवाओं का साथ दिया है.
मीडिया से बातचीत में तेजप्रताप ने कहा है, "सबलोग अपनी मांग कर रहे हैं, सब संघर्ष कर रहे हैं. नए साल में हम सरकार से बात करेंगे, तेजस्वी जी से बात करेंगे. कि जल्द से जल्द सबको रोज़गार मिले. लोगों को रोज़गार मिल भी रहा है, हमने भी नियुक्ति पत्र दिया है."
बिहार में नौकरी और सियासत की इस तस्वीर के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी 'समाधान' यात्रा पर निकल चुके हैं. वो अगले एक महीने तक राज्य सरकार की योजनाओं की समीक्षा करेंगे और सरकार की नीतियों पर आम लोगों से राय लेंगे.
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