उमेश पाल हत्या मामला: असद अहमद और ग़ुलाम के एनकाउंटर की एफ़आईआर क्या कहती है?

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- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उमेश पाल हत्या मामले के मुख्य अभियुक्त और बाहुबली नेता अतीक़ अहमद के बेटे असद अहमद और एक अभियुक्त मोहम्मद ग़ुलाम को गुरुवार को पुलिस ने झाँसी में हुई एक मुठभेड़ में मार दिया है.
उमेश पाल हत्या मामले में पुलिस को इन दोनों अभियुक्तों की तलाश थी. दोनों पर पांच-पांच लाख रुपए का इनाम रखा गया था.
मुठभेड़ के बाद क़ानूनी प्रक्रिया के तहत घटना की एक एफ़एआईआर भी दर्ज होती है. बीबीसी ने मुठभेड़ से जुड़ी तीनों एफ़आईआर की कॉपी देखी है. इस एनकाउंटर से जुड़ी तस्वीरें भी पुलिस ने मीडिया के साथ साझा की हैं.
विरोधी दल इसे एक 'फ़र्ज़ी मुठभेड़' कह रहे हैं और इस पर सवाल उठा रहे हैं. एक सवाल ये भी उठ रहा है कि आख़िरकार इस घटना से जुड़े तथ्य क्या हैं?
एफ़आईआर में घटना के बारे में क्या लिखा गया है
मुठभेड़ की घटना से जुड़ी तीन एफ़आईआर दर्ज की गईं हैं.
एक एफ़आईआर में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है और दो अलग-अलग एफ़आईआर में असद और ग़ुलाम से हथियारों की बरामदगी की बात दर्ज की गई हैं.
एफ़आईआर झाँसी के थाना बड़ागांव में रात 11 बजकर 22 मिनट पर दर्ज हुई है. हथियार बरामद वाली एफ़आईआर 11 बजकर 23 मिनट पर दर्ज हुई हैं.
एफ़आईआर के अनुसार मुठभेड़ सुबह 11:30 से दोपहर 12:55 के बीच हुई और पारीछा बाँध से लगभग 15 मील आगे बहद गांव में बबूल के झाड़ों के पास हुई.

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एसटीएफ़ को कैसे मिली जानकारी
यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़) की प्रयागराज यूनिट को यह जानकारी मिली कि उमेश पाल की हत्या में फ़रार चल रहा पांच लाख का एक इनामी अभियुक्त गुड्डू मुस्लिम पारीछा पावरप्लांट में किसी सतीश पांडेय के यहाँ रुका था, लेकिन पुलिस को सूचना मिलने से पहले वो वहां से भाग निकला था.
एसटीएफ़ को दो अन्य अभियुक्त अतीक़ अहमद के बेटे असद और शूटर मोहम्मद ग़ुलाम के झाँसी शहर या उसके आसपास के इलाक़े में छिपे होने की ख़बर मिली थी. असद और ग़ुलाम दोनों पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था.
पुलिस के मुताबिक़ दोनों को सीसीटीवी फुटेज में उमेश पाल पर हमला करते हुए पाया गया था.
एफ़आईआर के मुताबिक़ एसटीएफ़ की टीमें पहले से ही झाँसी में मौजूद थीं. एसटीएफ़ को मुख़बिर से असद और ग़ुलाम की झाँसी के चिरगांव क़स्बे में 12 अप्रैल की रात में देखे जाने की जानकारी मिली और ऐसा पता चला कि 13 अप्रैल को भी दोनों चिरगाँव क़स्बे में ही मौजूद हो सकते हैं.
आगे एफ़आईआर में लिखा है कि पुलिस को क़स्बा चिरगाँव में एक मुख़बिर से असद और ग़ुलाम को काली और लाल डिस्कवर बाइक पर सवार होकर चिरगांव से निकल कर पारीछा की तरफ़ जाने की सूचना मिली.
एफ़आईआर के अनुसार असद ने सफ़ेद रंग का पठानी सूट और काली टोपी पहनी हुई थी और मोहम्मद ग़ुलाम ने लोअर और गाढ़े हरे रंग की हाफ़ टीशर्ट पहनी हुई थी. उनके सर पर एक रुमाल बंधा हुआ था.
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कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन
एसटीएफ़ का कहना है कि उन्हें लगा कि "अगर शीघ्रता की जाए तो यहाँ से पारीछा के बीच उन्हें पकड़ा जा सकता था."
एसटीएफ़ की एक टीम को पारीछा की तरफ़ असद और ग़ुलाम को घेरने के लिए कहा गया और दूसरी टीम असद और ग़ुलाम के हुलिए वाले लोगों को ढूँढ़ते हुए सुबह 11:30 बजे चिरगाँव से पारीछा के लिए रवाना हुई.
एफ़आईआर में आगे लिखा है कि, "एसटीएफ़ की एक टीम पारीछा बाँध के मोड़ से 100 मीटर पहले पहुँची ही थी कि बताए हुए हुलिए के दोनों फ़रार अभियुक्त (असद और ग़ुलाम) बिना नंबर की एक मोटरसाइकिल पर पारीछा की तरफ़ जाते हुए दिखाई दिए."
जानकारी के मुताबिक़ एसटीएफ़ की टीम ने बाइक सवार असद और ग़ुलाम को ओवरटेक किया और 'बुलंद' आवाज़ देकर मोटरसाइकिल रोकने को कहा. लेकिन दोनों ने रुकने की बजाय स्पीड बढ़ा दी और पारीछा बांध मोड़ के आगे कच्चे रास्ते पर गाड़ी को मोड़कर भगाने की कोशिश करने लगे.
लेकिन दूसरी एसटीएफ़ की टीम ने सामने से पहले ही रास्ते को घेर लिया था. फिर दोनों टीमों ने आगे-पीछे होकर चेतावनी देने की कोशिश की. पुलिस के मुताबिक़ उन्हें चेतावनी देना व्यर्थ साबित हुआ.
फिर 1.5 किलोमीटर आगे जाकर मोटरसाइकिल फिसल कर कच्चे रास्ते से नीचे बबूल के झाड़ में गिर गई.

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कब आई मुठभेड़ की नौबत
पुलिस ने एफ़आईआर में बताया कि बाइक के गिरने के बाद, "दोनों (असद और ग़ुलाम) ने उठकर ज़मीन की आड़ लेकर जान से मारने की नीयत से पुलिसवालों को गालियां दी और उनपर गोलियां चलना शुरू कर दिया."
एफ़आईआर में आगे लिखा है कि जब अभियुक्त गोलियां चलाने लगे तब, "दोनों टीमों के लोगों ने गाड़ी रोककर, आत्मरक्षा में, मौक़े की भौगोलिक स्थिति की आड़ लेते हुए, असद और ग़ुलाम की फ़ायरिंग रेंज में पहुँच कर, उन्हें ज़िंदा पकड़ने की कोशिश की."
पुलिस का कहना है कि, "दोनों की अंधाधुध फ़ायरिंग देखते हुए सभी पुलिसवालों ने कुल मिला कर नौ बार फ़ायर किया."
एफ़आई आर के अनुसार, "थोड़ी देर में असद और ग़ुलाम से फ़ायरिंग बंद हो गई. जब सावधानी बरतते हुए पुलिसकर्मियों ने नज़दीक जाकर देखा तो दोनों ही (असद और ग़ुलाम) घायल पड़े कराह रहे थे."
पुलिसकर्मियों ने दोनों की शिनाख़्त, "मीडिया में प्रसारित फ़ोटो के आधार पर असद (पुत्र अतीक़ अहमद) और मोहम्मद ग़ुलाम (पुत्र मसूदुल हसन) के रूप में की."

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पुलिस: मुठभेड़ के बाद दोनों में ज़िदा होने के लक्षण दिखाई दे रहे थे
एफ़आईआर में आगे लिखा है कि, "चूँकि दोनों घायल अभियुक्तों में जीवन के लक्षण दिखाई दे रहे थे, इसलिए बिना किसी देरी के इस मुठभेड़ की सूचना 12:52 पर पुलिस कंट्रोल रूम और 12:55 पर एम्बुलेंस सहायता को दी गई."
पुलिस का कहना है कि इसके बाद "असद और ग़ुलाम को अलग-अलग एम्बुलेंस में पुलिसकर्मियों के साथ उपचार के लिए अस्पताल की तरफ रवाना किया गया."
एफ़आईआर के अनुसार, "असद और ग़ुलाम के साथ हुई मुठभेड़ की सूचना आला अधिकारियों को दी गई और बाद में एफ़एसएल की टीम मौक़े पर पहुँची. उसने मौक़ा-ए-वारदात को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया."

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कहाँ और कब हुई मौत?
एफ़आईआर में लिखा है, "बिना देरी किए असद और ग़ुलाम को अलग-अलग एम्बुलेंस में पुलिसकर्मियों के साथ उपचार के लिए रवाना किया गया."
बाद में बताया गया है कि घटनास्थल से पिस्तौल, कारतूस, खोखा, बाइक जैसे सबूतों को इकठ्ठा करने के बाद जब पुलिस की टीमें मेडिकल कॉलेज में असद और ग़ुलाम के बारे में जानकारी लेने पहुँची तो उन्हें पता चला कि उनकी मृत्यु हो गई है.
अंत में एफ़आईआर में लिखा है कि पुलिस सुप्रीम कोर्ट के और मानवाधिकार आयोग के आदेशों और निर्देशों का पालन कर रही है और असद और ग़ुलाम के परिवारों को 'उचित माध्यम' से सूचना दे रही है.

क्या-क्या हुआ, पुलिस ने और क्या-क्या कहा
- उमेश पाल की 24 फ़रवरी, 2023 को दिन-दहाड़े हत्या कर दी गई थी.
- उमेश पाल जैसे ही अपने घर के पास पहुंचे, बदमाशों ने पहले तो उनकी कार पर गोलियां चलाईं. उसके बाद जब वो अपने गनर के साथ घर की ओर भागे, तो बदमाशों ने उन पर दो बम फेंके.
- पेशे से वकील उमेश पाल 2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह थे.
- पुलिस की जांच के बाद उमेश पाल की हत्या में कुल 18 अभियुक्तों की भूमिका सामने आई.
- पुलिस ने अतीक़ अहमद, उनकी पत्नी शाइस्ता परवीन, उनके भाई और पूर्व विधायक अशरफ़, अतीक़ अहमद के बेटे असद के अलावा दूसरे हमलावरों और साज़िशकर्ताओं को अभियुक्त बनाया.
- मामले के एक अभियुक्त अरबाज़ को प्रयागराज में एक मुठभेड़ के दौरान पकड़ा था, लेकिन पुलिस के अनुसार गोली के घाव से अरबाज़ की मौत हो गई.
- विजय चौधरी उर्फ़ उस्मान नाम के एक और अभियुक्त की भी मौत एनकाउंटर में हो गई.
- पुलिस अतीक़ अहमद को साबरमती जेल और उनके भाई अशरफ़ को बरेली जेल से लाने गई थी.
- पुलिस के पास इंटेलिजेंस इनपुट थे कि रास्ते में उके काफ़िले पर हमला कर अपराधियों (अतीक़ और अशरफ़) को छुड़ाने की कोशिश हो सकती है. इस कारण पुलिस ने स्पेशल फ़ोर्सेज़ और सिविल पुलिस की विशेष टीमें लगाईं थीं.
- पुलिस ऑपरेशन में STF की टीम भी थी. मुठभेड़ में अभियुक्त असद और ग़ुलाम की घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई. इन दोनों को सीसीटीवी फुटेज में अपराध करते देखा गया था.
- असद और ग़ुलाम के पास से अत्याधुनिक विदेशी हथियार - ब्रिटिश बुल डॉग रिवाल्वर 455 बोर और वाल्थर P88 पिस्तौल 7.62 बोर बरामद की गईं.

पुलिस के आला अधिकारियों ने क्या कहा
घटना के महज़ दो घंटे बाद, लखनऊ में पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में उत्तर प्रदेश के स्पेशल डीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने घटना से जुड़ी जानकारी साझा की.
अंत में डीजे लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने कहा, "इस तरह से 2017 से उत्तर प्रदेश में लगभग अब तक पुलिस मुठभेड़ों में 183 बदमाश मारे जा चुके हैं और इस दौरान 13 पुलिसकर्मी भी मारे गए हैं."
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