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10वीं बिहार बोर्ड के टॉपर रूमान अशरफ़ की चाहत है आर्मी अफ़सर बनना
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, शेखपुरा (बिहार) से
मार्च की आख़िरी तारीख़ यानी 31 की रात मैं जब मोहम्मद रूमान अशरफ़ से मिलने पहुंची, तो उनसे मिलने वालों का तांता टूट ही नहीं रहा था.
मोहल्ले वाले, रिश्तेदार, सात घंटे का सफ़र करके आए छोटे कद के यूट्यूबर पत्रकार कपिल अहमद, पटना के कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधि रूमान के सामान्य से घर की कुर्सियों, पलंग और सोफ़े में धंसे हुए थे.
घर के अंदर महिलाओं, छोटे बच्चों की आवाजाही भी लगातार बनी हुई थी. जिनकी हंसी ठिठोली कई बार पूरे घर को गुलज़ार कर देती थी.
कोई चमकीली पन्नियों में लिपटा डायरी-पेन, कोई फूल माला, कोई मिठाई के छोटे डब्बे ला रहा था और सबका मकसद था कि रूमान उनके हाथ से मिठाई खाकर फ़ोटो खिंचवा ले.
इन खुशी से लबरेज लोगों के बीच, किसी बाहरी आदमी के लिए ये पता लगाना मुश्किल था कि इनमें रूमान के माता-पिता और बहन कौन हैं? सबकी खुशी एक जैसी ही तो थी.
जब टॉप करने की ख़बर मिली...
मोहम्मद रूमान अशरफ़ बिहार बोर्ड की दसवीं (2023) की परीक्षाओं के स्टेट टॉपर हैं. परीक्षा में 16 लाख से अधिक छात्र छात्राएं शामिल हुई थीं. 489 अंक लाकर अशरफ़ राज्य में टॉप किए.
स्वभाव से शर्मीले रूमान बीबीसी से अपनी इस उपलब्धि पर कहते हैं, "दोपहर की नमाज़ पढ़कर आया था तो पापा के पास इस्लामिया हाई स्कूल के जावेद सर का फ़ोन आया कि मैंने टॉप किया है. मुझे उम्मीद थी कि मेरे अच्छे नंबर आएंगे, लेकिन टॉप करूंगा ये सोचा नहीं था. मुझे बहुत खुशी हो रही है, लेकिन इतने सारे लोगों को देखकर नर्वस भी फील कर रहा हूं."
रूमान बिहार के सबसे छोटे ज़िले शेखपुरा के इस्लामिया हाई स्कूल के छात्र हैं. रूमान मूल रूप से शेखपुरा के चकन्दरा गांव के रहने वाले हैं.
उनके पिता नजीबुर रहमान, शेखपुरा के ही एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के प्रभारी टीचर है. जबकि मां शबनम परवीन हाउस मेकर और बहन महविश रहमान सातवीं की छात्रा हैं.
सोशल मीडिया से दूर लेकिन सोशल स्टडीज़ से प्यार
रूमान की शुरुआती पढ़ाई बरबीघा के आदर्श विद्या भारती से हुई. इसके बाद वे सैनिक स्कूल की प्रवेश परीक्षा पास कर गए और नालंदा सैनिक स्कूल से पढ़ाई की.
कोविड के दौरान वो घर वापस लौट आए और उन्होंने इस्लामिया हाई स्कूल में दाखिला लिया.
शेखपुरा के न्यू कॉलोनी बांग्लापार मोहल्ले के निवासी रूमान कहते हैं, "घर में शुरू से ही पढ़ाई का माहौल था. इसलिए सुबह 7 बजे उठकर पहला काम पढ़ाई करना था जो 1 बजे तक चलती थी. उसके बाद मैं ऑनलाइन क्लासेज लेता था और उसके बाद रोज़ाना जो पढ़ाई की, उसे दुहरा कर सो जाता था."
रूमान को शतरंज खेलना और क्रिकेट देखना पसंद है. लेकिन समय के साथ उनके ये शौक भी नहीं रहे. रूमान सोशल मीडिया से दूर रहते हैं लेकिन सोशल स्टडीज़ उनको पसंद है.
रूमान के पिता नजीबुर रहमान बताते हैं, "इसकी आज तक कभी शिकायत आई ही नहीं. जिस स्कूल में गया वहां से तारीफ़ ही मिली है."
पिता कहते हैं, "हम प्राइमरी स्कूल में टीचर हैं तो इसके दर्जे की पढ़ाई उतनी समझ नहीं आती थी, फिर भी बच्चे की पढ़ाई में मैं लगातार दिलचस्पी लेता था. जैसे मुझे लगा कि इसकी उर्दू कमज़ोर है तो इसके लिए उसका ट्यूशन रख दिया."
आर्मी ऑफिसर बनने का सपना
रूमान नेशनल डिफ़ेंस अकादमी में जाना चाहते हैं.
वो कहते हैं, "मैं आर्मी ऑफ़िसर बनकर देश की सेवा करना चाहता हूं. मेरे टॉप करने से पूरे समाज को ये पॉज़िटिव संदेश जाएगा कि मेहनत का कोई ऑप्शन नहीं है. और अगर आप मेहनत करते हैं तो आप कहां से आते हैं, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता."
रूमान के स्टेट टॉपर बनने के बाद सिर्फ़ घर वाले ही नहीं बल्कि मोहल्ले वाले भी ख़ुश हैं.
रूमान के पड़ोस में रहने वाली तीन बच्चों की मां नग़मा नाज़ कहती हैं, "रूमान के यहां की रसोई, मेरी रसोई से सटी हुई है. मैं हमेशा सुनती थी कि उनकी अम्मी उसके खाने पीने और पढ़ाई का ख़्याल रखती थीं. बाकी उनके यहां तो हमेशा से पढ़ाई का माहौल है. रूमान के टॉप करने से सारे मोहल्ले के बच्चे को प्रेरणा मिलेगी."
स्थानीय पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं, "बीते दो दशक में शेखपुरा में किसी बच्चे ने टॉप टेन में भी जगह नहीं बनाई थी. ऐसे में रूमान ने टॉप किया, ये बहुत बड़ी उपलब्धि है. शेखपुरा में शिक्षा क्षेत्र में 80 के दशक तक मुसलमानों ने अहम रोल निभाया. ज़मींदार हसन इमाम ने महिला कॉलेज के लिए ज़मीन दी तो इस्लामिया हाई स्कूल, मेहंदी सर, निज़ामुद्दीन सर का बहुत नाम रहा."
बिहार बोर्ड का मैट्रिक रिजल्ट
बिहार बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में इस बार 8,19,737 छात्राओं सहित कुल 16,10,657 परीक्षार्थी शामिल हुए थे.
31 मार्च को जारी हुए नतीजों के मुताबिक़, 81 फ़ीसद परीक्षार्थी दसवीं की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं.
टॉप 10 में कुल 90 छात्र-छात्राओं ने अपनी जगह बनाई है. वहीं टॉप-5 में कुल 21 विद्यार्थी हैं.
मोहम्मद रूमान ने जहां स्टेट टॉप किया है, वहीं भोजपुर की नम्रता कुमारी और औरंगाबाद की ज्ञानी अनुपमा ने 500 में से 486 अंक लाकर सेकेंड टॉपर बनी हैं.
नालंदा की संजू कुमारी, पश्चिम चंपारण की भावना कुमारी और लखीसराय के जयनंदन कुमार पंडित 484 अंक लाकर संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं.
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर कहते हैं, "परीक्षा को पारदर्शी तरीक़े से कराना और परिणाम सही समय पर देना हमारी प्राथमिकता है. इस पर हम लगातार काम कर रहे हैं और सफल भी हो रहे हैं."
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