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शार्क टैंक इंडियाः कश्मीर का एक स्टार्ट अप कैसे हज़ारों को प्रेरित कर रहा है
- Author, आक़िब जावेद
- पदनाम, बीबीसी के लिए
भारत-प्रशासित कश्मीर में शुरू हुए एक स्टार्ट अप को रियलटी टीवी शो शार्क टैंक इंडिया में फंडिंग मिली है. इससे कश्मीर क्षेत्र के अन्य उभरते हुए उद्यमियों को भी उम्मीद मिली है.
फ़ास्टबीटल- कश्मिर में स्थित एक कुरियर डिलीवरी सर्विस है. इसे शार्क टैंक इंडिया में 90 लाख रुपए की फंडिंग मिली हैं.
शार्क टैंक इंडिया शो में उद्यमी अपने उत्पाद प्रदर्शित करते हैं. शो के जज इनवेस्टर होते हैं जिन्हें शार्क कहा जाता है. उत्पाद के प्रदर्शन के बाद शार्क तय करते हैं कि उन्हें कंपनी में निवेश करना है या नहीं.
लिंकडिन पर शो का विज्ञापन देखने के बाद कंपनी के संस्थापकों शेख समीउल्लाह और अब्दुल रशीद ने शार्क टैंक इंडिया शो में पेश होन के लिए आवेदन दिया था.
कश्मीर से इस चर्चित टीवी शो में फंड के लिए आनी वाली ये पहली कंपनी है. शो के एक जज ने ये सवाल भी किया कि वो कश्मीर से अन्य उद्यमियों को शो में क्यों नहीं देख पा रहे हैं.
समीउल्लाह ने जवाब दिया, "हमारे पास ऐसी सुविधाएं नहीं हैं. वहां आप जैसे लोग नहीं हैं जो हम जैसे लोगों का समर्थन कर सकें. इसलिए ही कश्मीर के लोग रोज़गार पर निर्भर हैं."
समीउल्लाह और राशिद को उम्मीद है कि शो पर उन्हें फंड मिलने से कश्मीर के अन्य युवा भी अपना कारोबार करने के लिए प्रेरित होंगे.
हिमालय का कश्मीर क्षेत्र एक संवेदनशील इलाक़ा है जिस पर भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपना-अपना दावा ठोंकते हैं और ये क्षेत्र दोनों देशों में बंटा हुआ है.
अगस्त 2019 में भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष संवैधानिक दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर दिया था. ये अनुच्छेद मुस्लिम बहुल आबादी वाले कश्मीर को बहुत हद तक स्वायत्तता देता था.
सरकार के इस फ़ैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बंद कर दिया गया था और लंबे समय तक कर्फ्यू रहा था. सुरक्षा हालात को संभालने के लिए कई हज़ार अतिरिक्त सुरक्षा बल भी कश्मीर में तैनात किए गए थे.
अधिकारी हालांकि इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अब हालात सामान्य हो रहे हैं और स्थानीय स्टार्ट अप की संख्या बढ़ रही है.
जम्मू-कश्मीर उद्यमी विकास संस्थान (जेकेईडीआई) के निदेशक एजाज़ अहमद भट कहते हैं कि सरकार जम्मू-कश्मीर स्टार्ट अप नीति 2023-2028 बनाने पर काम कर रही है. इस नीति का मक़सद कश्मीर क्षेत्र में अगले पांच सालों में तीन हज़ार स्टार्ट अप का गठन करना है.
वो कहते हैं कि इससे क्षेत्र में नई नौकरियां पैदा होंगी और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा.
एजाज़ भट कहते हैं, "ये नीति पहले से थी लेकिन कुछ कारणों की वजह से हम इसे अब तक लागू नहीं कर पाए थे और उसके बाद महामारी आ गई. अब हम विशेषज्ञों की मदद से इस नीति में बदलाव कर रहे हैं और अगले कुछ महीने में इसे सार्वजनिक करने जा रहे हैं."
समीउल्लाह और राशिद ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने से छह महीने पहले 2019 में फास्टबीटल की शुरुआत की थी. अपना कारोबार शुरू करने से पहले समीउल्लाह एक ई-कॉमर्स कंपनी के लिए काम करते थे. ये कंपनी पूरे भारत में उत्पाद डिलीवर करती थी.
वो कहते हैं, "हमने सोचा कि हम इस मॉडल को कश्मीर में लागू कर सकते हैं और हमने कंपनी की शुरुआत कर दी.
फास्टबीटल के एजेंट सामान उठाते हैं, अपने दफ़्तर में उसे पैक करते हैं और फिर मोटरसाइकिल या मिनीवैन के ज़रिये सामान को तय पते पर पहुंचा देते हैं.
लेकिन अनुच्छेद 370 हटाये जाने से कारोबार ठहर गया. उत्पाद डिलीवर नहीं किए जा सकें क्योंकि आपात सेवाओं में लगे वाहनों के अलावा किसी को सड़क पर चलने की अनुमति नहीं थी.
फ़ोन पर लगी रोक की वजह से कंपनी के संस्थापक अपने स्टाफ़ से भी बात नहीं कर पाए. समीउल्लाह कहते हैं, कंपनी का घाटा लाखों रुपये में पहुंच गया था.
संस्थापक कहते हैं कि उन्होंने अपनी निजी बचत से कर्मचारियों को वेतन दिया. 2020 का अंत तक आते आते जब हालात सामान्य होना शुरू हुए तो उन्होंने फिर से अपने कारोबार को शुरू करने का निर्णय लिया. लेकिन फिर कोविड 19 महामारी आ गई और उन्हें महीनों लंबे चले लॉकडाउन का सामना करना पड़ा.
लेकिन समीउल्लाह और राशिद ने उम्मीद ने नहीं खोई.
उन्होंने महसूस किया कि राज्य के सेब कारोबारी अपने उत्पाद को पहुंचाने में संघर्ष कर रहे हैं. ऐसे में फास्टबीटल ने समूचे कश्मीर में फलों की डिलीवरी शुरू की.
समीउल्लाह कहते हैं, "राज्य में सेव उद्योग सबसे ज़्यादा रोज़गार देता है, फलों की डिलीवरी करके हमने जो पैसा कमाया उससे हमारे नुक़सान की भरपाई हो गई."
कंपनी ने मरीज़ों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर और कोविड की दवाइयों की डिलीवरी भी शुरू कर दी थी.
आज, फास्टबीटल कश्मीर में कुछ भी डिलीवर करती है. कंपनी के पास 130 कर्मचारी हैं और ये सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों में भी अपनी सेवाएं देती है. अब तक ये कंपनी 55 देशों में एक लाख से अधिक पार्सल डिलीवर कर चुकी है. कंपनी 1500 छोटे, मध्यम और लघु उद्योगों के साथ मिलकर भी काम कर रही है.
समीउल्लाह कहते हैं कि वो छोटे कारोबारियों के उत्पादों को कम दाम पर डिलीवर कर उनकी मदद भी कर रहे हैं.
कश्मीर के उत्पादों का ऑनलाइन स्टोर क्राफ्ट वर्ल्ड कश्मीर के संचालक 33 वर्षीय बीनिश बाहिर ख़ान कहती हैं कि उनके कारोबार को फास्टबीटल से बहुत मदद मिली है.
वो हमारे उत्पादों को पिक अप करते हैं और ग्राहक तक पहुंचा देते हैं, इससे हमें कारोबार बढ़ाने में मदद मिली है.
फास्टबीटल की कामयाबी ने क्षेत्र के अन्य उद्यमियों को भी प्रोत्साहित किया है. आरिफ़ इरशाद डार इनमें से एक हैं.
30 वर्षीय इरशाद कश्मीर ऑरिजिन नाम से एक ऑनलाइन ऑर्गेनिक स्टोर चलाते हैं जिसपर कश्मीर के किसानों और स्थानीय कलाकारों के उत्पाद बेचे जाते हैं.
इरशाद डार कहते हैं कि वो भी अपने कारोबार को फास्टबीटल की तरह बढ़ाना चाहते हैं ताकि अधिक लोगों को रोज़गार दे सकें.
उभरते हुए कारोबारी इरशाद डार कहते हैं कि शार्क टैंक इंडिया में फास्टबीटल को देखकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा है. इससे पता चलता है कि कश्मीर का स्टार्ट अप भी बढ़ा कर सकता है.
संस्थापक कहते हैं कि अब वो कश्मीर में स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए एक इकोसिस्टम बनाने पर काम कर रहे हैं.
वो कहते हैं कि अभी भी चुनौतियां हैं. लोग स्टार्ट अप में निवेश करने से कतराते हैं क्योंकि राज्य की राजनीतिक स्थिति अस्थिर है.
राशिद कहते हैं, "लेकिन हम यहां रहते हैं और हम स्थिति को जानते हैं. हमें बर्फ़वारी औक कर्फ्यू के बारे में जानकारी है. हमें इस माहौल की आदत डालनी है और आगे बढ़ते रहना है."
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