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बंद इंटरनेट कैसे कश्मीर के उद्योग और व्यापार को डुबो रहा है?
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
"बीते चार महीने में मेरा तक़रीबन दस लाख रुपये का नुकसान हो चुका है. अपने काम को फिर से ज़िंदा करने के लिए मुझे श्रीनगर छोड़कर जम्मू आना पड़ा है."
फ़ोन पर अपनी परेशानी बयां करते हुए शारिक़ अहमद कुछ इस तरह बात की शुरुआत करते हैं.
वो कहते हैं, "काम के सिलसिले में मुझे सात हज़ार रुपये का एक क़मरा किराये पर लेना पड़ा है. नए ब्रॉडबैण्ड कनेक्शन के दो हज़ार रुपये प्रति माह देने होंगे. घर से दूर बाकी ख़र्चे भी ज़्यादा करने होंगे."
पिछले 25 दिनों से शारिक़ अहमद जम्मू में हैं. वो श्रीनगर में टूर एंड ट्रेवल से जुड़ी एक दुकान चलाते थे.
नए शहर में नए तरीक़े से काम जोड़ने पर ख़र्च बढ़ेंगे, इससे ज़्यादा चिंता उन्हें अपने बीवी-बच्चों की है जिन्हें शारिक़ को श्रीनगर में ही छोड़कर आना पड़ा.
5 अगस्त को अनुच्छेद-370 हटाए जाने के साथ ही भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया था.
इंटरनेट बंद होने से कश्मीर घाटी के आम शहरियों के काम धंधे लगभग चौपट हो चुके हैं.
इंटरनेट का इंतज़ार
श्रीनगर के सानी हुसैन एक बुक स्टोर चलाते हैं. इंटरनेट बंद होने की वजह से नई क़िताबों के ऑर्डर के लिए उन्हें हाल ही में दिल्ली जाना पड़ा.
वो कहते हैं, "श्रीनगर से एक बार दिल्ली जाने का मतलब है तीस हज़ार रुपये ख़र्च करना. क़िताबों के व्यापार में इतना तो मार्जिन भी नहीं बनता. 5 अगस्त से पहले क़िताबें लेने के लिए मुझे कभी दिल्ली नहीं जाना पड़ा था. मैंने हमेशा ही इंटरनेट के ज़रिए क़िताबें ऑर्डर कीं."
हुसैन अपनी क़िताबों के बारे में लोगों को सूचित करने के लिए इंस्टाग्राम पर एक पेज चलाते थे और क़िताबों के ऑनलाइन ऑर्डर के लिए एमेजॉन अकाउंट का प्रयोग करते थे. लेकिन इंटरनेट बंद होने के कारण दोनों बंद हो गए हैं.
हुसैन बताते हैं, "वॉट्सऐप पर बात नहीं हो पा रही. बिल वगैरह क्लियर करने का काम वॉट्सऐप पर आसानी से हो जाता था. स्थानीय दुकानदार भी अपनी डिमांड हमें इंटरनेट मैसेज सेवा से भेजते थे. पर ये सब अब कितने में दिन में शुरू होगा, हमें इंतज़ार है."
5 अगस्त को जब अनुच्छेद-370 निष्प्रभावी किये जाने की घोषणा हुई थी तब इंटरनेट और दूरसंचार सेवाएं सबसे पहले प्रभावित हुई थीं. इनके अलावा कस्बों और गाँवों तक में कर्फ़्यू लगा दिया गया था. स्कूल-कॉलेज बंद करा दिए गए थे. साथ ही बंद हो गए थे सब छोटे व्यापार.
हालांकि श्रीनगर में स्थानीय बाज़ार अब सामान्य स्थिति में लौट चुके हैं. पोस्ट-पेड मोबाइल और लैंड लाइन फ़ोन सेवाएं शुरू हो चुकी हैं.
लेकिन घाटी में इंटरनेट और प्री-पेड मोबाइल सेवा का शुरू होना अभी बाक़ी है.
कई व्यापार बुरी तरह प्रभावित
उमर अमीन श्रीनगर में सूखे मेवों की एक दुकान के मालिक हैं. वो कई तरह के ड्राय-फ़्रूट बेचते हैं. केसर उनकी दुकान की ख़ासियत है.
बाहर से अपने कश्मीरी माल का ऑर्डर लेने के लिए वो एक वेबसाइट चलाते हैं. इस वेबसाइट के संचालन के लिए उन्हें दिल्ली में एक आदमी रखना पड़ा है जिसकी वजह से उनका व्यापारिक ख़र्च बढ़ गया है.
उमर कहते हैं, "जब 370 पर फ़ैसला होने वाला था तो मैंने विदेश में रह रहे अपने रिश्तेदारों को सबसे पहले सूचित किया. मैंने उन्हें बताया कि मेरी वेबसाइट बंद होने वाली है. मेरे काम का एक बड़ा हिस्सा इंटरनेट पर आधारित है. ऑनलाइन ऑर्डर वहीं से मिलते हैं. क़रीब डेढ़ महीने तक वेबसाइट बंद रही. बाद में हमने दिल्ली में एक टीम रखी जो वेबसाइट को चला सके. वेबसाइट बंद रहने के कारण इस सीज़न में हमें 70 फ़ीसद का नुकसान हुआ है."
उमर बताते हैं कि वेबसाइट इतने लंबे वक़्त तक बंद रहने के कारण उनकी वेबसाइट की ग्लोबल रेंकिंग काफ़ी गिर गई है जिसे दोबारा खड़ा करने में उन्हें अब काफ़ी समय लगेगा.
इन व्यापारों के अलावा इंटरनेट बंद होने से कश्मीर के हस्तशिल्प कारोबार पर भी बड़ा असर हुआ है.
ये व्यापारी कहते हैं कि हाथ से बनी चीज़ों का सबसे बड़ा बाज़ार इस दौर में मोबाइल पर है. लोग वॉट्सऐप पर चीज़ों की तस्वीरें मंगाते हैं, देखते हैं और पसंद करते हैं. लेकिन इंटरनेट बंद होने के कारण हम किसी को कुछ नहीं भेज पा रहे.
इन व्यापारियों के यहाँ काम करने वाले कारीगरों को भी चिंता है कि इंटरनेट की वजह से धंधा इतना ही मंदा रहा तो उन्हें भी काम मिलना बंद हो जाएगा.
'स्थिति और बिगड़ जाएगी'
शॉल बनाने की एक यूनिट में काम करने वाले फ़याज़ अहमद इंटरनेट की ज़रूरत का ज़िक्र करते हैं, "लंदन में बैठा हमारा कोई ग्राहक अगर चाहता है कि उसके लिए तैयार हो रहे शॉल में कुछ तब्दीली की जाए या वो कुछ नया आइडिया दे, तो हमारी बातचीत का ज़रिया सिर्फ़ इंटरनेट है. हम तस्वीरों देखकर काम करते हैं. रोज़ नए डिज़ाइन तैयार करते हैं. बिना इसके समझिए बाज़ार बंद हो गया है."
फ़याज़ अहमद जैसे कारीगर जो 5 अगस्त से पहले दस हज़ार रुपये प्रति माह तक कमा लेते थे. उन्हें अब सिर्फ़ पाँच हज़ार रुपये तक का काम मिल रहा है.
ये कारीगर कहते हैं कि हालात सामान्य नहीं हुए तो अगले कुछ महीने में स्थिति और बिगड़ जाएगी.
श्रीनगर में हस्तशिल्प कारोबारी मोहम्मद यासीन मीर एक अलग समस्या बताते हैं. वो कहते हैं, "जो लोग ऑर्डर मंगा चुके थे या जिनसे हम ऑर्डर मंगाने वाले थे, उनकी पेमेंट जगह-जगह अटक गई है. हाल ही में मुझे अमृतसर से एक फ़ोन आया, उन्हें दो इलेक्ट्रिक कंबल चाहिए थे. पर मैं उन्हें सेंपल नहीं भेज पाया और वो वहाँ से पैसे नहीं भेज पाए. किसी आदमी को इस काम के लिए भेजने का ख़र्च बहुत ज़्यादा होगा. इसलिए बात वहीं बंद हो गई. काम के लिए यह मुसीबत हो चुकी है."
हज़ारों करोड़ का नुकसान
इन सभी लोगों से जब हमने पूछा कि क्या वो मौजूदा सरकार से इसके बारे में कोई गुज़ारिश करने का विचार कर रहे हैं?
तो सभी का जवाब एक जैसा था. ये लोग कहते हैं, "ये सरकार हमारी बात नहीं सुनना चाहती. चुनी हुई सरकारों से हम गुज़ारिश कर भी लेते थे. लेकिन इस समय जो अफ़सर हैं, वो स्थानीय लोगों की नहीं सुनते. वो हमें नहीं जानते. हमारी ज़रूरतों को नहीं जानते. इसलिए हम किसी अधिकारी के पास जाना ही नहीं चाहते. हम बस अच्छे समय के इंतज़ार में बैठे हैं."
हाल ही में वॉट्सऐप ने यह सूचना जारी की थी कि कश्मीर घाटी में 90 दिन से अधिक समय तक इंटरनेट बंद रहने के कारण सभी निष्क्रिय वॉट्सऐप अकाउंट बंद कर दिए गए हैं.
द कश्मीर चेंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का कहना है कि 5 अगस्त 2019 से इंटरनेट बंद होने के कारण भारत प्रशासित कश्मीर की अर्थव्यवस्था को अब तक क़रीब 18,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.
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