भारत और ऑस्ट्रेलिया की बढ़ती नज़दीकी, ये हैं प्रमुख कारण

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ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ बुधवार (आठ मार्च) से 11 मार्च तक भारत के दौरे पर हैं. ये पहला मौका है जब भारत के साथ सालाना शिखर सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री खुद शिरकत कर रहे हैं.
ऑस्ट्रेलिया में लेबर पार्टी की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री अल्बनीज़ पहली बार भारत आए हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि उनके दौरे का मक़सद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूती देना है.
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीज़ के साथ व्यापार और पर्यटन मंत्री डॉन फैरेल और संसाधन मंत्री मेडेलीन किंग के अलावा एक उच्च-स्तरीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आया है.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री बुधवार को अहमदाबाद पहुंचे. नौ मार्च को मुंबई पहुंचेंगे और 10 मार्च को दिल्ली में होंगे, जहां राष्ट्रपति भवन में उनके लिए रात्रि भोज आयोजित किया जाएगा.
बीते कुछ सालों में जिस तरह ऑस्ट्रेलिया के साथ द्विपक्षीय रिश्ते बदले हैं शायद ही उतनी तेज़ी से भारत के किसी और देश के साथ रिश्तों में सुधार आया है.
साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था तो ये लगभग तीन दशक में पहली बार था जब भारतीय प्रधानमंत्री कैनबरा पहुंचे.
इससे पहले राजीव गांधी ने साल 1986 में बतौर प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था.

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सरकार बदलने से बदले रिश्ते
इ द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है, "जब साल 2012 में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने भारत का दौरा किया था तब दोनों देशों के रिश्तों को सुधारने की कुछ कोशिश की गई थी लेकिन इसमें सफ़लता नहीं मिली. लेकिन बीते कुछ सालों में सबसे बड़ा बदलाव ये हुआ है कि दोनों देशों की सरकार के बीच रिश्ते बेहतर करने की इच्छा दिखी है."
"दोनों देश लोकतांत्रिक परंपराओं को मानने वाले हैं, दोनों जगह अंग्रेज़ी भाषा का व्यापक इस्तेमाल किया जाता है और आर्थिक तालमेल भी है. दोनों ही देशों में हुई राजनीतिक उपेक्षा, व्यापारिक संभावनाओं को नज़रअंदाज़ किए जाने और शीत युद्ध के समय से चली आ रही भूराजनीति ने द्विपक्षीय रिश्तों को सीमित करके रखा था."
अख़बार लिखता है, ''हालांकि, हालिया समय में उच्च स्तरीय आदान-प्रदान ने दोनों देशों को वो राजनीतिक गति दी जिसकी उन्हें सख़्त ज़रूरत थी. ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ रिश्तों के विस्तार पर खास ज़ोर दिया और बीते साल यानी 2022 में भारत की ओर से भी ऑस्ट्रेलिया को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी जिस समय 10 भारतीय केंद्रीय मंत्री ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गए."

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ऑस्ट्रेलिया के पीएम का एजेंडा क्या है
भारत दौरे से पहले सिडनी में एक व्यापारिक सम्मेलन में पीएम अल्बनीज़ ने कहा था कि उनकी सरकार व्यापार और विदेशी निवेश के भागीदारों में विविधता लाना चाहती है. वो भारत के दौरे पर एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "हम चाहतें हैं कि हम जिनके साथ व्यापार कर रहे हैं उनमें विविधता हो, जिस चीज़ का व्यापार करें उसमें भी विविधता हो. इससे हमारी अर्थव्यवस्था सुरक्षित और मज़बूत होगी."
जो कारोबारी प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के साथ भारत आया है उनमें शामिल हैं- मैक्वायर ग्रुप की चीफ़ एक्ज़ीक्यूटिव शेमारा विक्रमनके, कॉमनवेल्थ बैंक के चीफ़ एक्ज़िक्यूटिव मैट केमिन, फ़ोरटेस्क्यू मेटल ग्रुप के संस्थापक एंड्रयू, यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया की मुख्य कार्यकारी कैटरिओना जैक्सन और बीएचपी रियो टिंटो और ग्रेनकॉर्प के अधिकारी.
यानी परिवहन, संसाधन, वित्त, उच्च शिक्षा, वास्तुकला और ऊर्जा के कारोबारी अल्बनीज़ के साथ भारत आए हैं.
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री अल्बनीज़ व्यापार, निवेश, नवीकरणीय ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और सुरक्षा को लेकर साझेदारी बढ़ाने पर ज़ोर देंगे.
बयान में ये भी कहा गया है, "इससे भारत के साथ हमारे रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत किया जाएगा. भारत ऑस्ट्रेलिया का करीबी दोस्त और भागीदार है."
मुंबई में ऑस्ट्रेलिया के व्यापारी सीईओ फोरम में हिस्सा लेंगे.
ऑस्ट्रेलिया, चीन को सबसे ज़्यादा लौह अयस्क निर्यात करने वाला देश है और अब वो चाहता है कि अपने निर्यात को दूसरे देशों तक बढ़ाए. हालिया समय में ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच व्यापार में भारी गिरावट दर्ज़ की गई है. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के लिए व्यापार का नया क्षेत्र तलाशना उसकी मज़बूरी बनती जा रही है.

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क्वाड के कारण क़रीब आए भारत-ऑस्ट्रेलिया?
क्वाड समूह में भारत और ऑस्ट्रेलिया सुरक्षा साझेदार हैं. इस समूह में अमेरिका और जापान भी शामिल हैं. इन चारों देशों के साथ आने के जो आधार हैं वो है इन देशों का लंकतांत्रिक व्यवस्था में यक़ीन.
अपने दौरे से ठीक पहले अल्बनीज़ ने एक समिट में कहा था, "दोनों ही देश समृद्ध इतिहास साझा करते हैं. ये देश क्रिकेट में खेल प्रतिद्वंद्विता से जुड़े हैं, हम लोकतांत्रिक मूल्यों से बंधे हुए हैं."
बीते साल भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सुरक्षा सहयोग में एक और कदम बढ़ाया गया. दोनों देशों ने एक संयुक्त सैन्य अभ्यास 'ऑस्ट्रा हिंद 2022' शुरू किया.
जानकारों की राय है कि भारत हिंद-प्रशांत के देशों के साथ तो क़रीबी बढ़ा ही रहा है लेकिन ये सैन्य अभ्यास इसलिए भी अहम था क्योंकि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रिश्ते लंबे वक़्त से अस्थायी रहे हैं और बीच बीच में बिगड़ते भी रहे हैं. ऐसे में ये पहल एक सकरात्मक शुरूआत की तरह मानी गई.
जब साल 1998 में भारत ने परमाणु परीक्षण किया था तो उस वक़्त ऑस्ट्रेलिया ने कड़ा रुख अख़्तियार किया था. साल 2007 में क्वाड्रिलैट्रल सिक्योरटी डॉयलॉग (जिसे अब क्वाड के नाम से जाना जाता है) बनाने का प्रयास जब नाक़ाम हुआ तो भारत ने इसका दोषी ऑस्ट्रेलिया को माना.
लेकिन आज दोनों देशों के बीच हालात कुछ और हैं. साल 2020 में भारत ने मालाबार नौसैनिक अभ्यास में अमेरिका और जापान के साथ ऑस्ट्रेलिया को शामिल होने का न्यौता दिया था.

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चीन के साथ रिश्ते
भारत ने क्वाड के कमज़ोर होने की चिंताओं के बावजूद ऑस्ट्रेलिया के त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौता ऑकस (AUKUS) में साझेदारी के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाया.
बीते साल जून में ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने भारत का दौरा किया और भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाक़ात की. इस मुलाक़ात में दोनों देशों के बीच रक्षा शोध और साझेदारी बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया.
ऑबज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन अपने एक लेख में लिखता है, "क्वाड के अलावा एक और वजह है जिसके कारण ऑस्ट्रेलिया और भारत पास आ रहे हैं. जून 2020 में चीन और भारत के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ने के बाद से दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ते जा रहे हैं. भारत सीमा पर कई जगह चीन की ओर से अंतरराष्ट्रीय सीमा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाता रहा है.''
''चीन के साथ बिगड़ते रिश्तों के बीच भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ साझेदारी बढ़ा रहा है. वहीं, दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया, जो चीन का बड़ा आर्थिक साझेदार रहा है उसके साथ बीते कुछ वक़्त से अपना व्यपार घटा रहा है. ऐसे में वो भी चीन के इतर अपने नए साझेदार तलाशने में जुटा है."
भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों को ही चीन से जुड़ी चिंताएं तो हैं लेकिन ये अलग-अलग हैं. चीन को लेकर ऑस्ट्रेलिया कुछ फंसा हुआ है क्योंकि चीन जहां उसका आर्थिक साझेदार है तो अमेरिका उसका सुरक्षा साझेदार. वहीं, भारत-चीन के बीच रिश्ते बीते लगभग तीन सालों से तनावपूर्ण हैं.

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दोनों देशों के बीच व्यापार
बीते साल भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए जो दिसंबर, 2022 से लागू हुआ. ये मुक़्त व्यापार समझौता 10 साल की बातचीत के बाद 2022 में पूरा हुआ. साल 2011 से इसे लेकर दोनों देश बातचीत कर रहे थे.
इस समझौते के तहत 23 अरब डॉलर का व्यापार ड्यूटी फ्री हो गया. साल 2021-22 में ऑस्ट्रेलिया में भारत का निर्यात 8.3 अरब डॉलर था और देश से आयात 16.75 बिलियन अमरीकी डॉलर था.
शिक्षा के क्षेत्र में भारत ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा सेवा निर्यातक है और साल 2021 में ऑस्ट्रेलिया को 4.2 अरब डॉलर की कमाई हुई है. साल 2022 अक्टूबर तक 57 हज़ार भारतीय वीज़ा लेकर ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे हैं.
ऑस्ट्रेलिया और भारत अब एक द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) पर काम कर रहे हैं और महत्वपूर्ण खनिजों, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, विज्ञान और कृषि सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
कॉपी: कीर्ति दुबे
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