तमिलनाडु में बिहार के लोगों के साथ कथित हिंसा पर हंगामा जारी

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- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना से
तमिलनाडु में बिहारी मज़दूरों के साथ कथित हिंसा पर सियासत लगातार गर्म हो रही है.
दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस मामले पर आपस में बातचीत की है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार से कहा है कि प्रवासी मजदूरों पर कथित 'हमलों' की अफवाह फैलाने वाले लोग भारत की अखंडता के ख़िलाफ़ काम कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि बिहार के सभी कामगार हमारे कामगार हैं जो तमिलनाडु के विकास में मदद करते हैं और मैं विश्वास दिलाता हूं कि उन्हें कुछ परेशानी नहीं आएगी.
तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि जो लोग जानबूझकर अफवाह फैला रहे हैं, फेक वीडियो पोस्ट कर रहे हैं, सोशल मीडिया पर झूठी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं और राज्य में डर और तनाव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ कड़ी क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.
इस मामले में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा है कि हम पर यकीन न हो तो बीजेपी केंद्रीय गृह मंत्री से जांच करा लें.
वहीं गुरुवार को तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक के दावे के बाद भी बीजेपी लगातार आरोप लगा रही है कि तमिलनाडु में बिहारी मज़दूरों को बुरी तरह पीटा जा रहा है.
तमिलनाडु में बीजेपी की राज्य इकाई के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा, "तमिलनाडु में प्रवासी मजदूरों पर हमले के बारे में सोशल मीडिया पर झूठी ख़बरों को देखना दुखद है. आज जो हालात हम देख रहे हैं, उसके लिए उत्तर भारतीयों पर डीएमके सांसदों की टिप्पणियां, डीएमके के मंत्री का उन्हें पानीपुरी वाला कहना और उनकी सहयोगी पार्टियों द्वारा उन्हें निकाले जाने की मांग करना, जैसी बातें जिम्मेदार हैं."
अब एलजेपी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने भी इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री के अलावा तमिलनाडु और बिहार के मुख्यमंत्रियों को भी चिट्ठी लिखी है.
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गुरुवार को इस मुद्दे पर तमिलनाडु के डीजीपी ने ट्वीटर पर एक वीडियो संदेश जारी किया था. डीजीपी सी शैलेंद्र बाबू ने दावा किया था कि बिहार में किसी ने सोशल मीडिया पर एक झूठा और भ्रामक वीडियो पोस्ट किया है.
उनके मुताबिक़, "तमिलनाडु में बिहारी मज़दूरों के साथ कोई हिंसा नहीं हुई है. ये दोनों ही वीडियो पुराने हैं. एक वीडियो तिरुपुर का है जिसमें बिहारी मज़दूरों के दो गुटों के बीच आपस में लड़ाई हो रही है. जबकि दूसरा वीडियो कोयंबटूर का है और इसमें स्थानीय लोगों के बीच झगड़ा हो रहा है, इसका बिहारी मज़दूरों से कोई संबंध नहीं हैं."
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दरअसल सोशल मीडिया और कई समाचार माध्यमों में दावा किया जा रहा है कि बिहार से काम करने तमिलनाडु गए मज़दूरों को वहां के स्थानीय लोग बुरी तरह पीट रहे हैं.
विधानसभा में हंगामा
शुक्रवार को भी बिहार विधानसभा के अंदर और बाहर यह मुद्दा काफ़ी गरम रहा है. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु के डीजीपी का बयान झूठा है.
विजय कुमार सिन्हा ने दावा किया है कि उनके पास तमिलनाडु से एक पीड़ित प्रवासी बिहारी मज़दूर का फ़ोन आया था, जो कह रहा था कि यहां बिहारियों को बुरी तरह पीटा जा रहा है.

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हमने इस मुद्दे पर विजय कुमार सिन्हा से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका है. विजय सिन्हा ने मांग की कि सरकार एक टीम बनाकर इस मामले की जांच कराए और वहां फंसे लोगों को सुरक्षित वापस लाए.
वहीं उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि बीजेपी का काम केवल अफ़वाह फ़ैलाना है. तेजस्वी यादव ने तमिलनाडु के डीजीपी के हवाले से बिहारी मज़दूरों के साथ हिंसा की ख़बर को अफ़वाह बताया है.
तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, "ये लोग (बीजेपी के नेता) भारत माता की जय बोलते हैं. तमिलनाडु भारत का ही अंग है न? जब तमिलनाडु भारत का ही अंग है तो आपस में प्रदेशों के बीच घृणा क्यों फ़ैलाते हैं."
तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि अगर ऐसी कोई घटना हुई है तो न बिहार और न ही तमिलनाडु की सरकार बैठी रहेगी. उपमुख्यमंत्री ने बीजेपी नेताओं को इसकी जांच केंद्रीय गृहमंत्री तक से कराने की सलाह दे डाली.

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आरजेडी में मतभेद
तमिलनाडु में बिहारी मज़दूरों के साथ कथित हिंसा के इस मामले में बिहार में सत्ता की साझेदार राष्ट्रीय जनता दल के भीतर भी मतभेद दिख रहा है.
आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने बयान जारी करते हुए इस हिंसा को देश की बेरोज़गारी से जोड़ दिया है.
शिवानंद तिवारी के मुताबिक़, "तमिलनाडु की घटना संकेत दे रही है कि ऐसी हिंसा दूसरे प्रांतों में भी हो सकती है. देश में बेरोज़गारी की समस्या बढ़ती जा रही है. जिन राज्यों को विकसित राज्य माना जा रहा था वहां भी बेरोज़गारी तेज़ी से बढ़ रही है."
ख़बरों के मुताबिक़ तमिलनाडु के कई इलाक़े में बिहार के मज़दूरों के साथ हिंसा हो रही है. पिछले कुछ समय में इस हिंसा में दो बिहारी मज़दूरों की मौत की ख़बर भी बिहार में चर्चा में रही है.
उस घटना के बाद बिहारी मज़दूरों में डर के माहौल और बड़ी संख्या में बिहारी मज़दूरों के वहां से पलायन की ख़बरें भी आ रही हैं.
इस मामले पर बीजेपी बिहार ने एक वीडियो भी ट्वीट किया है, जिसमें कुछ युवक तमिलनाडु में बिहारियों के साथ हिंसा का दावा कर रहे हैं. हालांकि बीबीसी इस वीडियो की सच्चाई की पुष्टि नहीं करता है.
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गुरुवार को ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस तरह की ख़बर पर बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिया था कि वो तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों से बात कर बिहारी मज़दूरी की सुरक्षा सुनिश्चित करें.
उसके बाद तमिलनाडु पुलिस की तरफ़ से एक वीडियो मैसेज के ज़रिए इस तरह की घटना को अफ़वाह बताया गया था. लेकिन इस बयान के बाद भी बिहार में इस मामले पर सियासी घमासान शांत नहीं हो रहा है.
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चाय की दुकान पर झगड़ा
शुक्रवार को बीबीसी ने इस मामले को समझने के लिए तमिलनाडु के तिरुपुर शहर के पुलिस कमिश्नर से भी बात की. पुलिस कमिश्नर प्रवीण कुमार अभिनपु ने बिहार में बीजेपी के लगाए आरोप के पूरी तरह से झूठा बताया है.
उनका कहना है, "यह पूरी तरह से झूठ और अफ़वाह है. यह एक दुष्प्रचार है. हम इसकी जांच कर रहे हैं. जो भी इस तरह के अफ़वाह के पीछे होगा उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी."
उनके मुताबिक़ जिस घटना को बिहारियों के साथ हिंसा से जोड़कर बताया जा रहा है उनमें से एक कोयंबटूर में हुई क़त्ल की वारदात है, यह कोयंबटूर के स्थानीय तमिल लोगों का मामला है. इसका बिहार के किसी प्रवासी से कोई संबंध नहीं है.
उनके मुताबिक़ दूसरा मामला एक बिहारी प्रवासी के क़त्ल से जुड़ा हुआ है. इसका आरोप झारखंड के एक प्रवासी मज़दूर पर है और यह क़त्ल एक महिला को लेकर हुए झगड़े के बाद हुआ है.

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इस घटना को भी सोशल मीडिया पर ग़लत तरीके से तमिलनाडु और बिहार के लोगों से जोड़ा गया है. तिरुपुर के पुलिस कमिश्नर के मुताबिक़ बीते क़रीब दो महीने से वहां हिंसा की कोई घटना नहीं हुई है.
हमने पुलिस कमिश्नर से पूछा कि दो महीने पहले क्या हुआ था?
इस सवाल पर उनका कहना है कि जनवरी में एक चाय दुकान पर तमिलनाडु और बिहार के कुछ लोगों के बीच छोटा सा झगड़ा हुआ था, उसके बाद बिहार के 50-60 लोग इकट्ठा हो गए और तमिलों का पीछा करने लगे.
प्रवीण कुमार का कहना है कि पुलिस ने यह मामला दर्ज किया है और इसकी जांच की जा रही है.
वहीं तिरुपुर के एसपी जी शशांक साई ने बीबीसी से कहा है कि प्रवासी मज़दूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क़दम भी उठाए गए हैं और ऐसे मज़दूरों को सुरक्षा दी जा रही है.
माना जा रहा है कि चाय की दुकान पर हुए इस झगड़े के बाद से ही तमिलनाडु में बिहारियों के साथ हिंसा की ख़बरें आनी शुरू हुई हैं.
उस झगड़े के बाद इसी साल 14 जनवरी को तिरुपुर के एक वीडियो को पोस्ट कर सोशल मीडिया पर दावा किया गया था कि इसमें तमिलनाडु के स्थानीय लोग बिहार के प्रवासी मज़दूरों के साथ मारपीट कर रहे हैं.
वहीं कुछ ख़बरों में दावा किया जा रहा है कि हिंसा के डर से बिहार के लोग तमिलनाडु के अलग अलग जगहों से बिहार वापस आने की कोशिश कर रहे हैं. ख़बरों में ट्रेनों और स्टेशनों पर भारी भीड़ होने का दावा भी किया जा रहा है.
हालांकि दक्षिण रेलवे के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर बीबीसी को बताया कि तमिलनाडु के रेलवे स्टेशनों पर कोई असामान्य भीड़ नहीं है और ऐसी कोई ख़बर नहीं है कि स्टेशनों पर अफरा तफरी मची हो.
इन दिनों होली का त्योहार भी काफ़ी क़रीब है और इस समय ट्रेनों में थोड़ी ज़्यादा भीड़ होना सामान्य सी बात है. एर्नाकुलम-पटना या बाक़ी जिन ट्रेनों में भीड़ की बात की जा रही है वो ट्रेनें तिरुपुर के पीछे से ही भरी हुई आ रही हैं.
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विवाद की वजह
बीबीसी तमिल सेवा की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ हाल के वर्षों में तमिलनाडु में चेन्नई के अलावा भी कई शहरों में उत्तर भारतीय मज़दूरों की तादात काफ़ी बढ़ी है.
प्रवासी मज़दूर न केवल फ़ैक्ट्री बल्कि तमिलनाडु के तटीय इलाक़ों में मछली उद्योग में भी बड़ी संख्या में काम कर रहे हैं.
प्रवासी मज़दूरों में बड़ी संख्या आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों की है. ये लोग ओडिशा, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से तमिलनाडु आते हैं.

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प्रवासी मज़दूर अकेले या किसी जानने वाले के सहारे काम करने तमिलनाडु आते हैं. कई बार कंपनियां या एजेंसी भी काम के लिए दूसरे राज्यों के मज़दूरों को तमिलनाडु लाती हैं.
बाहर से आने वाले ये मज़दूर पहले आमतौर पर कंस्ट्रक्शन उद्योग में काम करते थे. लेकिन धीरे-धीरे ये छोटे-बड़े हर तरह के उद्योग में काम करने लगे हैं.
इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि स्थानीय लोग ऐसे काम से दूर भाग रहे हैं और प्रवासी मज़दूरों को पैसों के लिए काम चाहिए.
तिरुपुर की ही बात करें तो यहां नई पीढ़ी के लोग काम करने बाहर चले जाते हैं, जिसकी वजह से इस शहर में कामगारों की भारी कमी हो गई है.
तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एंड मैनुफ़ैक्चरर्स के अध्यक्ष मुथुरत्नम ने तमिल सेवा को बताया है कि तिरुपुर के वस्त्र उद्योग में मौजूदा समय में तीन लाख प्रवासी मज़दूर काम कर रहे हैं.
तिरुपुर में प्रवासी मज़दूरों और तमिलों के बीच हिंसक झड़प के बाद यह बहस भी तेज़ हो गई है कि क्या प्रवासी मज़दूरों की वजह से तमिल लोगों को रोज़गार नहीं मिल पा रहा है.
तिरुपुर की कंपनियों का कहना है कि स्थानीय कामगारों की कमी के कारण ही वो बाहर के लोगों को काम पर रख रहे हैं. लेकिन इसके पीछे एक वजह यह भी मानी जाती है कि प्रवासी मज़दूर कम पैसे में काम करने को राज़ी हो जाते हैं.
तिरुपुर में असंगठित कामगारों के संध से जुड़ी गीता कहती हैं, "इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि प्रवासी मज़दूरों को स्थानीय लोगों के मुक़ाबले आधे पैसे भी दे दें तो वो काम के लिए तैयार हो जाते हैं."
तमिलनाडु में प्रवासी मज़दूरों को लेकर एक और बहस होती है कि स्थानीय कामगार हफ़्ते में केवल चार दिन काम करना चाहते हैं, जबकि मिल मालिकों को हफ़्ते में छह दिन काम करने वाले मज़दूर चाहिए.
वहीं प्रवासी मज़दूरों का विरोध करने वालों का यह भी कहना है कि ऐसे मज़दूर कुछ साल बाद यहां का राशन कार्ड बनवा लेंगे और यहां कि सुविधाएं भी लेना चाहेंगे.
आरोप यह भी लगाया जाता है कि मज़दूर अपनी कमाई तमिलनाडु में ख़र्च करने की जगह अपने गांव भेज देते हैं. ऐसे में इन मज़दूरों से तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को कोई फ़ायदा नहीं हो सकता.

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प्रवासी कामगारों की बढ़ती जनसंख्या
केंद्र सरकार ने साल 2011 के सर्वे के आधार पर देश की जनसंख्या से जुड़े अलग-अलग आंकड़े जारी किए थे.
इसके मुताबिक़ उत्तर भारतीय राज्यों में तमिल, मलयालम, कन्नड़, तेलुगू बोलने वालों की संख्या में साल 2001 की जनगणना के मुक़ाबले कमी दर्ज की गई है, जबकि दक्षिण भारत में हिंदी भाषियों की संख्या बढ़ी है.
दक्षिण भारत में हिंदी भाषी लोगों की बढ़ती जनसंख्या के पीछे सबसे पहली वजह वहां नौकरी के अधिक अवसरों का होना बताया जाता है.
तमिलनाडु का पश्चिमी हिस्सा यानी कोयंबटूर और तिरुपुर के आस-पास का इलाक़ा उद्योगों के लिए मशहूर है. पिछले कुछ सालों में इन इलाकों में प्रवासी मज़दूरों की संख्या में काफ़ी बढ़ी है.
तिरुपुर में उद्योगों के जुड़े लोग बताते हैं कि वहां मज़दूरों की लगातार ज़रूरत रहती है और ऐसे में उत्तर भारत से आने वाले मज़दूर उनके लिए फ़ायदेमंद हैं.
फ़िलहाल फ़ायदे की यह लड़ाई बिहार की सियासत के लिए हंगामा बना हुआ है. इसका पूरा सच तमिलनाडु के डीजीपी के बयान, बीजेपी के आरोप और बिहार सरकार के दावे से बाहर निकलना अभी बाक़ी है.
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