त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में कौन जीता, कौन हारा?

पूर्वोत्तर भारत के तीन राज्यों त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में बीते महीने हुए विधानसभा चुनावों के वोटों की पूरी हो गई है और अब स्थिति एकदम साफ़ है.

इन तीनों राज्यों में 60 सदस्यीय विधानसभाएं हैं. त्रिपुरा में 16 फ़रवरी को तो नगालैंड और मेघालय में 27 फ़रवरी को मतदान हुए थे.

आंकड़ों के मुताबिक़, त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी 60 में से 32 सीटों पर जीत गई है.

इसके साथ ही आईपीएफ़टी पार्टी को एक सीट पर जीत मिली है. सीपीआई(एम) 11 और तिपरा मोथा पार्टी ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की है. कांग्रेस के खाते में केवल 3 सीटें आई हैं.

मेघालय में नेशनल पीपल्स पार्टी ने सबसे ज़्यादा 26 सीटें जीती हैं. यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) को 11 सीटें मिली हैं.

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस को पाँच-पाँच और बीजेपी को 2 सीटों पर जीत हासिल हुई है.

नगालैंड में नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी 25 सीटों पर जीत मिली है. इसके बाद बीजेपी कुल 12 सीटों जीती है.

कहाँ किसकी सरकार

तीनों राज्यों में बीजेपी या तो सत्ता में है या सरकार को समर्थन दे रही है. मेघालय में एनडीए की सरकार है.

साल 2018 में बीजेपी ने नेशनल पीपल्स पार्टी के साथ मिलकर सरकार चलाने की पेशकश की थी.

वहीं नगालैंड में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला रही है.

नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी एनडीए का हिस्सा है.

त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार है.

त्रिपुरा

त्रिपुरा में कुल 60 विधानसभा सीटे हैं. माणिक साहा अभी त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं. 2018 के चुनाव में एनडीए ने बहुमत की रेखा को पाँच सीटों से पार करते हुए 36 सीटें जीती थीं.

सीपीआई (एम) सिर्फ़ 16 सीटों पर सिमट गई थी. कांग्रेस को इस चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी.

2023 के विधानसभा चुनाव में जहाँ एक तरफ़ बीजेपी अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है, वहीं उसका सामना विपरीत विचारधारा की वाम मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन के साथ है.

वाम मोर्चा 43 और कांग्रेस 13 सीटों पर चुनाव लड़ी जबकि गठबंधन ने एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दिया.

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस भी त्रिपुरा विधानसभा चुनाव लड़ी है.

नगालैंड

नगालैंड में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी की सरकार है. नेफ़ियू रियो अभी नगालैंड के मुख्यमंत्री हैं.

ये पार्टी 2017 में चुनाव से पहले तत्कालीन सत्ताधारी नगा पीपल्स फ़्रंट से अलग हो कर बनी थी.

2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने एनडीए से गठजोड़ कर चुनाव जीता था.

तब चुनाव में एनडीए को 32 सीटें तो इनमें से नगा पीपल्स फ़्रंट को 27 सीटें मिली थीं.

इस बार के चुनाव में एनडीपीपी 40 सीटों पर तो बीजेपी 20 सीटों पर चुनाव लड़ी.

मेघालय

मेघालय की 60 सीटों वाली विधानसभा के लिए 27 फ़रवरी को मत डाले गए थे.

इस राज्य में जहाँ कांग्रेस अपने वजूद बचाने की जद्दोजहद में लगी है, वहीं बीजेपी डबल इंजन की सरकार के फ़ॉर्मूले को बरक़रार रखना चाहती है.

वहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस भी इस बार यहां से चुनाव लड़ी. तो दूसरी तरफ़ नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) जैसे क्षेत्रीय राजनीतिक दल सत्ता में शामिल होने की जद्दोजहद में हैं.

यहाँ नेशनल पीपल्स पार्टी के कॉनराड संगमा सीएम हैं.

साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस को 59 में 21 सीटों पर जीत मिली थी जबकि नेशनल पीपल्स पार्टी 20 सीटें जीत पाई थी. बीजेपी सिर्फ़ दो सीटें जीत सकी थी.

तब चुनाव के बाद बीजेपी से गठजोड़ कर नेशनल पीपल्स पार्टी ने सरकार बनाई थी.

2018 के मेघालय विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 28.5 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि नेशनल पीपल्स पार्टी को 20.6 प्रतिशत वोट मिले थे.

चुनावी वादे

त्रिपुरा में गृह मंत्री अमित शाह ने अपने एक भाषण में अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को एक जनवरी, 2024 को खोले जाने का एलान किया था.

जिसके बाद से जानकारों ने इस ओर ध्यान खींचा कि बीजेपी आगामी चुनावों में 'मंदिर और राष्ट्रवाद' की रणनीति के तहत चुनाव लड़ेगी.

हालांकि बीजेपी ने घोषणापत्र में कई वादे किए. बीजेपी ने कहा कि सत्ता में वापस लौटने पर आदिवासी क्षेत्रों के लिए विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियों में स्वायत्तता दी जाएगी.

त्रिपुरा में बीजेपी के प्रतिद्वंद्वी वाम दल ने बीजेपी पर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाया है.

त्रिपुरा में कांग्रेस रोज़गार, बिजली और पुरानी पेंशन योजना जैसे मुद्दों से वोटरों को साधती नज़र आई.

वहीं मेघालय में कांग्रेस ने राज्य को बेरोज़गारी और भष्टाचार मुक्त करने का भी वादा किया है.

राज्य में 36 विधानसभा सीटों पर पुरुषों के मुक़ाबले महिला आबादी ज़्यादा है. इसलिए राजनीतिक पार्टियां महिलाओं के मुद्दों को भी साधने की कोशिश करती दिखीं.

नगालैंड में बीजेपी 'एम्पावर नगालैंड' के नारे के साथ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ लड़ रही है.

वहीं कांग्रेस ने नगालैंड में वादा किया कि सरकार बनने के बाद वो राज्य में शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देगी और प्रति माह 3,000 रुपये वृद्धावस्था पेंशन भी देगी.

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