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माणिक साहा: पूर्व कांग्रेसी जो अब त्रिपुरा में बीजेपी सरकार का चेहरा बने
- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
देश के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी ने 69 साल के डॉ. माणिक साहा को अपना नया मुख्यमंत्री बनाया है. डॉ. साहा ने अगरतला के राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में रविवार, 11.30 बजे राज्य के 11वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.
त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव से महज 10 महीने पहले शनिवार को बीजेपी ने बिप्लब कुमार देव को मुख्यमंत्री की सीट से हटा कर साहा को नया सीएम बनाने का फ़ैसला लिया.
इससे पहले भी बीजेपी ने उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जिस तरह मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को हटा कर पुष्कर सिंह धामी को प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी थी, राजनीति के जानकारों का यह मानना है कि ठीक वैसा ही प्रयोग त्रिपुरा में किया गया है.
त्रिपुरा विधानसभा की 60 सीटों के लिए अगले साल फरवरी-मार्च में चुनाव होने है.
दरअसल, बीजेपी एक साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति के नाम पर अगला चुनाव लड़ना चाहती है और प्रदेश के बीजेपी नेताओं में डॉ. साहा की छवि काफ़ी अच्छी मानी जाती है. हालांकि डॉ. साहा ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में एक भी बड़ा चुनाव नहीं जीता है. इसी साल मार्च में डॉ. साहा त्रिपुरा की एकमात्र सीट से राज्यसभा के लिए चुने गए थे.
कांग्रेस से लेकर बीजेपी का सीएम बनने तक
साल 1976 में प्री-मेडिकल आंदोलन में बतौर एक छात्र नेता अहम भूमिका निभा चुके डॉ. साहा कांग्रेस में लंबे समय तक रहने के बाद 2016 में बीजेपी में शामिल हो गए.
पार्टी ने उन्हें 2018 के विधानसभा चुनाव में बूथ प्रबंधन कमेटी की ज़िम्मेदारी सौंपी. इस दौरान उन्होंने ज़मीनी स्तर पर बीजेपी को मजबूत बनाने के लिए काफ़ी काम किए.
राज्य के वरिष्ठ वकील और राजनीतिक विश्लेशक संदीप दत्ता चौधरी कहते है, "माणिक साहा एक पढ़े-लिखे और सज्जन व्यक्ति है. वे काफ़ी सालों से राजनीति में है लेकिन उन्हें चुनाव जीतने का कोई अनुभव नहीं है. आज तक उन्होंने विधायक का चुनाव भी नहीं जीता है. इससे पहले कांग्रेस में रहते हुए 1995 में साहा ने केवल एक बार वार्ड कमिश्नर का चुनाव जीता था. उस समय कांग्रेस सरकार ने अगरतला नगर निगम के चुनाव में जीत हासिल की थी."
डाक्टर से राजनेता बनने की कहानी
पटना के सरकारी डेंटल कॉलेज से बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. साहा ने लखनऊ के किंग जॉर्ज डेंटल कॉलेज से ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में एमडीएस की पढ़ाई की.
राजनीति में कदम रखने से पहले डॉ. साहा त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हुआ करते थे.
इसके अलावा वे त्रिपुरा क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं और पहले त्रिपुरा स्पोर्ट्स काउंसिल के सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं.
त्रिपुरा में 25 साल के वाम मोर्चे के शासन को ख़त्म कर साल 2018 में बीजेपी ने पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनाई और बिप्लब कुमार देव राज्य के मुख्यमंत्री बने.
डॉ साहा को बिप्लब देव का करीबी माना जाता है और माना जाता है इसीलिए 2020 में उन्हें त्रिपुरा प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया.
बिप्लब देव की सरकार में उप-मुख्यमंत्री रहे जिश्नु देव वर्मा को राजनीतिक अनुभव के हिसाब से नए मुख्यमंत्री का प्रबल दावेदार माना जा रहा था.
लेकिन बिप्लब देव ने ही विधायक दल की बैठक में डॉ. साहा के नाम का प्रस्ताव रखा.
कहा जा रहा है कि इस दौरान बीजेपी के वरिष्ठ विधायक राम प्रसाद पाल ने विधायकों को बिना अवगत किए मुख्यमंत्री पद के लिए डॉ. साहा को चुनने का विरोध किया.
उन्होंने विधायक दल की बैठक के बाहर गुस्से में कुर्सियां तोड़ दी.
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. साहा को 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले कई चुनौतियों का सामना करना होगा.
सीपीएम और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्य में मिल रहीं चुनातियों के अलावा डॉ साहा के सामने राज्य में होने वाली 'राजनीतिक हिंसा' को रोकना भी एक बड़ी चुनौती होगी.
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