सरकारी खजाने में आए हर तोहफ़े का हिसाब दो- पाकिस्तान की अदालत

पाकिस्तान के लाहौर हाई कोर्ट के आदेश के बाद एक बार फिर 'तोशाखाना' सुर्खियों में आ गया है.

कोर्ट ने सरकार से तोशाखाने से जुड़े उन सभी तोहफों के बारे में जानकारी मांगी है जो पाकिस्तान बनने के बाद नेताओं और अफसरों को विदेशी मेहमानों से मिले हैं.

लाहौर हाई कोर्ट ने ये जानकारी जमा करने के लिए 16 जनवरी तक का समय दिया है.

जस्टिस आसिम हाफिज़ ने आदेश पारित करते हुए इस बात की जानकारी भी मांगी है कि किस- किस व्यक्ति ने तोशाखाने से गिफ्ट खरीदे हैं.

इससे पहले पाकिस्तान का चुनाव आयोग, तोशाखाना मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को पांच साल के लिए अयोग्य करार दे चुका है, इसका मतलब है कि वे अगले पांच साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.

इमरान ख़ान पर आरोप है कि उन्होंने सत्ता में रहते हुए जो तोहफ़े तोशाखाना से लिए थे उसके बारे में चुनाव आयोग को सही जानकारी नहीं दी.

सोमवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि तोशाखाना से जुड़ी जानकारियां गोपनीय हैं और वे सार्वजनिक नहीं की जा सकती हैं.

'गोपनीय है या नहीं, कोर्ट तय करेगा'

इस पर कोर्ट ने कहा कि सबसे पहले जानकारियों को जमा करें, उसके बाद कोर्ट तय करेगा कि वे गोपनीय हैं या नहीं.

तोशाखाना से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करने को लेकर याचिका वकील मुनीर अहमद ने लगाई है.

याचिका में तोशाखाना के सामान की कीमत निर्धारित करने के लिए इस्तेमाल किए गए तरीके की जानकारी भी मांगी गई है.

हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए पाकिस्तान के पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने केंद्र की सरकार पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने ट्वीट कर लिखा, "आश्चर्य की बात तो यह है कि जिस सरकार के पास विपक्ष के खिलाफ सारा मामला ही तोशाखाने की देन है वह खुद तोशाखाने की जानकारी देने से भाग रही है."

क्या है तोशाखाना

तोशाखाना एक सरकारी विभाग होता है. यहां प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या दूसरे बड़े अधिकारियों को किसी यात्रा के दौरान मिलने वाले क़ीमती तोहफों को रखा जाता है.

किसी भी विदेश यात्रा के समय, विदेश मंत्रालय के अधिकारी इन तोहफ़ों का रिकॉर्ड रखते हैं और वतन वापसी पर उन्हें तोशाखाना में जमा कर दिया जाता है.

तोशाखाना में रखी गई चीज़ों को स्मृति चिन्ह की तरह देखा जाता है. यहां रखी हुई चीज़ों को कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद ही बेचा जा सकता है.

पाकिस्तान में अगर मिलने वाले उपहार की क़ीमत 30 हज़ार रुपये से कम है तो उसे व्यक्ति मुफ़्त में अपने पास रख सकता है.

वहीं अगर गिफ़्ट की क़ीमत 30 हजार रुपये से ज़्यादा है तो उस क़ीमत का 50 प्रतिशत जमा करके उसे ख़रीदा जा सकता है. साल 2020 से पहले सामान की असल क़ीमत का सिर्फ़ 20 प्रतिशत ही जमा करना पड़ता था.

इन तोहफों में आमतौर पर महंगी घड़ियां, सोना और हीरे के गहने, क़ीमती सजावट का सामान, स्मृति चिन्ह, हीरा जड़ी कलम, क्रॉकरी और कालीन शामिल होते हैं.

इमरान ख़ान ने कौन से तोहफ़े ख़रीदे

पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के दो महीने के अंदर ही इमरान ख़ान ने तोशाखाना में दो करोड़ रुपये से ज़्यादा जमा कर कई तोहफ़े ख़रीदे थे.

इनमें क़रीब 85 लाख रुपये क़ीमत की एक ग्राफ घड़ी, क़रीब 60 लाख रुपये के कफ़लिंग, 87 लाख रुपये का पेन और अंगूठी जैसे चीज़ें शामिल थीं.

इसी तरह इमरान ख़ान ने 38 लाख रुपये क़ीमत की रोलेक्स घड़ी 7.5 लाख रुपये में और 15 लाख क़ीमत की रोलेक्स घड़ी को सिर्फ 2.5 लाख में तोशाखाना से ख़रीदा था.

एक और मौके पर इमरान ख़ान ने 49 लाख क़ीमत के कफ़लिंग और घड़ी से भरा एक बॉक्स आधे दाम पर लिया. इसके अलावा उन्होंने तोशाखाना को क़रीब दो अरब रुपये की जगह 80 लाख रुपये उपहारों की ख़रीद के एवज़ में चुकाए.

दस्तावेज़ों के अनुसार, कथित रूप से बेची गई घड़ी भी चुनाव आयोग की लिस्ट में दर्ज नहीं थी. ये घड़ी इमरान ख़ान की पत्नी बुशरा बीबी को उनकी सऊदी अरब की अपनी पहली यात्रा के दौरान गिफ़्ट के रूप में मिली थी.

इसकी क़ीमत 85 करोड़ रुपये बताई जाती है. इमरान ख़ान ने 20 प्रतिशत भुगतान कर इस घड़ी को ख़रीद लिया था.

चुनाव आयोग को इमरान ख़ान ने क्या बताया

इमरान ख़ान ने सात सितंबर को चुनाव आयोग को अपना लिखित जवाब सौंपा था. इसमें उन्होंने बताया था कि 1 अगस्त 2018 से 31 दिसंबर 2021 तक उन्हें और उनकी पत्नी को 58 तोहफ़े मिले थे.

लिखित जवाब में कहा गया था कि इन तोहफ़ों में ज़्यादातर फूलदान, मेज़पोश, सजावटी सामान, कालीन, पर्स, इत्र, माला, फ़्रेम, पेन होल्डर शामिल थे. इसके अलावा इसमें घड़ियां, पेन, कफ़लिंग, अंगूठियां और कंगन भी थे.

इमरान ख़ान ने बताया था कि इन सभी तोहफ़ों में तीस हज़ार रुपये से ज़्यादा की क़ीमत के सिर्फ 14 तोहफ़े थे. इन तोहफ़ों को उन्होंने प्रक्रिया के अनुसार पैसे देकर तोशाखाना से ख़रीदा था.

अपने जवाब में इमरान ख़ान ने अपने कार्यकाल में पैसे देकर ख़रीदे हुए तोहफे बेचने की बात स्वीकार की थी. इसमें एक घड़ी, कफ़लिंग, एक पेन, एक अंगूठी और चार रोलेक्स घड़ियां शामिल थीं.

उन पर आरोप है कि उन्होंने तोशाखाना के कुछ तोहफ़ों को सिर्फ़ 20 प्रतिशत और कुछ को 50 प्रतिशत भुगतान कर ख़रीदा था और महंगे दाम पर उन्हें बेच दिया था.

कई पूर्व शासकों पर चल रहा है मुक़दमा

तोशाखाना से अवैध रूप से गिफ़्ट लेने के लिए न सिर्फ़ इमरान ख़ान बल्कि पाकिस्तान के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों और एक पूर्व राष्ट्रपति को आज की तारीख़ में मुक़दमे का सामना करना पड़ा रहा है.

इसमें पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़, यूसुफ़ रजा गिलानी और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी शामिल हैं.

जब यूसुफ़ रजा गिलानी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने तोशाखाना के नियमों में ढील दी, जिसके बाद आसिफ़ अली ज़रदारी और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कारें ख़रीदीं.

इस्लामाबाद के अकाउंटेबिलिटी कोर्ट ने तोशाखाना से अवैध तरीके से उपहार में मिली महंगी गाड़ियों को ख़रीदने के आरोप में नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ गैर-ज़मानती वारंट जारी किया हुआ है.

आसिफ़ अली ज़रदारी ने राष्ट्रपति रहते हुए तोशाखाना से बख्तरबंद बीएमडब्ल्यू 750 एलआई, लेक्सस जीप और एक बीएमडब्ल्यू 760 एलआई खरीदी थी. उन पर आरोप है कि उन्होंने इन तोहफ़ों का भुगतान फ़र्जी बैंक खातों के ज़रिए किया था और इसमें मनी लॉन्ड्रिंग का पैसा डाला गया था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)