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आईएनएस मोरमुगाओ: मिसाइल को मार गिराने वाले भारतीय नौ सेना के इस विध्वंसक के बारे में जानें 7 ख़ास बातें
भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में पी15बी मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत रविवार को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ.
मुंबई में हुए एक समारोह में रक्षा मंत्री ने इस युद्धपोत के बारे में कहा कि ये भारत में बनने वाले सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में से एक है और ये समंदर में भारत की क्षमताओं में बढ़ोतरी करेगा.
उन्होंने कहा, "माज़गांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड का बनाया गया ये युद्धपोत देश की रक्षा उपकरण तैयार करने की देश की काबिलियत का बड़ा उदाहरण है. इसमें शक़ नहीं है कि आने वाले वक़्त में हम न केवल अपनी ज़रूरतों के लिए, बल्कि दुनियाभर की ज़रूरतों के लिए भी युद्धपोत बनाएंगे."
नेवी प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि मोरमुगाओ का नाम इसी नाम के बंदरगाह पर आधारित है.
उन्होंने कहा "ये युद्धपोत आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की मिसाल है, इसमें लगे सामान का 75 फ़ीसद भारत में ही बना है."
राजनाथ सिंह क्या बोले?
आईएनएस के निशान समारोह (नेवी के हाथों युद्धपोत सौंपने के लिए आयोजित समारोह) में रक्षा मंत्री बोले, "हाल में हमारा देश दुनिया की सबसे बड़ी पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है. दुनिया की एक बड़ी एजेंसी के अनुमान के अनुसार अगले पांच सालों में (2027 तक) भारत दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगा."
उन्होंने कहा, "तेज़ी से बदलती दुनिया में हर तरह की परिस्थिति के लिए खुद को तैयार रखना हमारी सबसे बड़ी ज़रूरत है. समय के साथ देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक, और व्यापारिक संबंध लगातार बदल रहे हैं."
उन्होंने भारत के बढ़ते व्यापार और समुद्री मार्गों की अहमियत के बारे में भी बात की.
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उन्होंने कहा, "हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और इसका सीधा अर्थ है कि बढ़ता व्यापार जिसमें से अधिकांश समुद्री रास्तों के माध्यम से होता है. हम वैश्वीकरण के दौर में हैं जहां सभी देश एकदूसरे पर निर्भर हैं. ऐसे में स्थायित्व. आर्थिक प्रगति और दुनिया के विकास के लिए समंदर में नेविगेशन की आज़ादी और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पहले से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गई है."
उन्होंने कहा, "वैश्विक सुरक्षा के मद्देनज़र दुनियाभर के देश अपनी सैन्य ताक़त बढ़ा रहे हैं और अपना सेना को आधुनिक और मज़बूत बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं."
उन्होंने कहा, "भारत उन देशों में से एक है, जिनका हित सीधे तौर पर हिंद महासागर से जुड़ा है. इस प्रांत का एक महत्त्वपूर्ण देश होने के कारण, इसकी सुरक्षा में हमारी नौसेना की भूमिका और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है."
आईएनएस मोरमुगाओ में क्या-क्या ख़ास है
- ये युद्धपोत भारतीय नेवी के प्रोजेक्ट 15बी के तहत बनाया गया है. इस प्रोजेक्ट की शुरुआत अक्तूबर 2013 को हुई थी. इसके तहत चार युद्धपोत बनने थे- विशाखापत्तनम, मोरमुगाओ, इम्फ़ाल और सूरत. भारतीय नेवी के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो ने जो चार विशाखापट्टनम क्लास विध्वंसक युद्धपोत डिज़ाइन किए हैं उनमें से आईएनएस मोरमुगाओ दूसरा है. इस क्लास का पहला युद्धपोत आईएनएस विशाखापत्तनम 21 नवंबर 2021 में औपचारिक तौर पर भारतीय नेवी का हिस्सा बना था.
- आईएनएस मोरमुगाओ युद्धपोत बनाने की शुरुआत सितंबर 2016 से हुई थी और समंदर में इसका ट्रायल 19 दिसंबर 2021 में हुआ था.
- आईएनएस मोरमुगाओ की लंबाई 163 मीटर और चौड़ाई 17 मीटर है. पानी में उतरने पर इसकी डिस्प्लेसमेंट क्षमता 7,400 टन है.
- इस युद्धपोत में अत्याधुनिक सेंसर लगे हुए हैं जो दुश्मन के हमले का अंदाज़ा लगा सकते हैं और रक्षा मंत्री का कहना है कि हथियारों से लैस यह दुनिया का सबसे आधुनिक मिसाइल करियर होगा.
- ये युद्धपोत ज़मीन से हवा में मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें, ज़मीन से ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइल ब्रह्मोस से लैस है. समंदर के भीतर दुश्मन की पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिए इसमें देश में ही बने टॉरपीडो ट्यूब लॉन्चर और रॉकेट लॉन्चर लगे हैं.
- नेवी के अनुसार ये युद्धपोत परमाणु, बायोलॉजिकल और केमिकल युद्ध की स्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार है. इसमें आधुनिक सर्विलांस रडार सिस्टम लगा है जो दुश्मन के हमले का सटीक आकलन करने में सक्षम है.
- इसमें चार ताक़तवर टर्बाइन लगे हुए हैं और ये युद्धपोत 30 नॉट्स (क़रीब 55 किलोमीर प्रति घंटे) की स्पीड ले सकता है.
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