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भारत की इंटरसेप्टर मिसाइल का क्या पाकिस्तान के पास है कोई तोड़?
- Author, शकील अख्तर
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी
भारत ने हवा में परमाणु मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को नष्ट करने में सक्षम एक इंटरसेप्टर मिसाइल का परीक्षण किया है. इस रक्षात्मक बैलिस्टिक मिसाइल को डीआरडीओ ने बनाया है. यह परीक्षण उड़ीसा के समुद्र में एक द्वीप पर स्थित मिसाइल लैब से किया गया था और अधिकारियों की तरफ़ ने इसे एक 'सफल परीक्षण' बताया है.
इस मिसाइल का नाम 'एडी-1' रखा गया है.
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि डीआरडीओ ने फ़ेज़ 2 के प्रोग्राम के तहत एडी-1 बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण किया है.
बयान में कहा गया है कि मिसाइल दो फ़ेज़ वाली सॉलिड मोटर से चलती है और इसमें सटीक लक्ष्य तक पहुंचने के लिए भारत मे तैयार किये गए कंट्रोल सिस्टम, नेविगेशन और गाईडेंस के आधुनिक उपकरण लगाये गए हैं.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परीक्षण के बाद कहा है कि यह इंटरसेप्टर मिसाइल ऐसी आधुनिक तकनीक से लैस है, जो पूरी तरह से नई है और यह क्षमता कुछ ही देशों के पास है. इससे देश की बैलिस्टिक मिसाइल से रक्षा करने वाले डिफेंस सिस्टम की क्षमता में और अधिक सुधार होगा.
यह मिसाइल ज़मीनी सतह के अंदर और बाहर दोनों ही जगह 15-25 किमी की ऊंचाई से 80-100 किमी की ऊंचाई तक परमाणु मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को नष्ट करने के लिए बनाई गई है.
पाकिस्तान अब क्या करेगा?
कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि फिलहाल सरकार इस मिसाइल को किसी प्रमुख बेस पर स्थापित करने की योजना से बच रही है. इसका एक कारण इसके विकास में शामिल भारी लागत हो सकती है.
और यह भी संभव है कि संभावित स्थापना की घोषणा करने से इस लिए भी बचा गया हो, क्योंकि इसके जवाब में पाकिस्तान और अधिक परमाणु बम बनाने या भारत की इंटरसेप्टर मिसाइल का कोई तोड़ हासिल करने की कोशिश करेगा.
रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी ने बीबीसी को बताया कि इसकी तैयारी लंबे समय से चल रही थी, लेकिन कुछ तकनीकी कठिनाइयों और अन्य लागतों के कारण इसे अंतिम रूप देने में देरी हुई.
डीआरडीओ के फ़ेज़-1 के प्लान के मुताबिक़ ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित की जानी हैं जो 2000 किमी की रेंज में दुश्मन की मिसाइल की पहचान कर उसे हवा में ही नष्ट करने में सक्षम होंगी.
लेकिन जिस मिसाइल का अब फ़ेज़ 2 के तहत परीक्षण किया गया है, उसकी मारक क्षमता 5000 किमी तक है.
राहुल बेदी का कहना है कि इसे पाकिस्तान और चीन दोनों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है. भारत दुनिया का एकमात्र देश है जो दो ऐसे विरोधी देशों से घिरा हुआ है जो परमाणु शक्तियां हैं. ज़ाहिर है, भारत का लक्ष्य यही दो देश (चीन और पाकिस्तान) हैं.
भारत की अपनी तक़नीक
राहुल बेदी का कहना है कि 'मिसाइल टेक्नोलॉजी एक ऐसी तकनीक है जो कोई भी देश दूसरे देश को नहीं देता है. भारत ने अपनी तकनीक से कई मिसाइलें बनाई हैं. अब इस नई मिसाइल के परीक्षण के बाद क्षेत्र में मिसाइलों की दौड़ शुरू हो जाएगी. पाकिस्तान और चीन भी अपने-अपने तरीक़े से इन मिसाइलों का तोड़ हासिल करने की कोशिश करेंगे.
याद रहे कि परमाणु मिसाइलों और इवाक्स जैसे लड़ाकू विमानों को ज़मीनी सतह से बाहर नष्ट करने की तकनीक केवल अमेरिका, इसराइल, रूस और चीन जैसे देशों के पास है. ग़ौरतलब है कि भारत ने हाल ही में रूसी निर्मित एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को अपनी सेना में शामिल किया है.
यह अत्याधुनिक रूसी रक्षा मिसाइल हवा में लड़ाकू विमानों, जासूसी विमानों, हमलावर ड्रोन और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को पहचान कर उन्हे हवा में नष्ट करने में सक्षम है.
डीआरडीओ भारत की सबसे बड़ी मिसाइल और रक्षात्मक हथियार बनाने वाली संस्था है.
पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश, नाग, निर्भय और रूस के साथ मिलकर विकसित की गई ब्रह्मोस मिसाइलें इसी संस्था ने बनाई हैं. ये सभी मिसाइलें अब भारतीय सेना में शामिल हैं और सैन्य ताक़त का एक प्रमुख हिस्सा हैं. इनमें से कुछ मिसाइलों को दूसरे देशों ने भी ख़रीदा है.
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