दिल्ली एसिड अटैक: ऑनलाइन मंगवाया था तेज़ाब, फ्लिपकार्ट और अमेज़न को नोटिस

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- 14 दिसंबर को दिल्ली में 17 साल की एक छात्रा पर दो बाइकसवारों ने तेजाब फेंका.
- पुलिस ने इस मामले में मुख्य अभियुक्त समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है.
- पुलिस का कहना है कि अभियुक्तने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म से तेजाब ख़रीदा था.
- राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले का स्वत:संज्ञान लिया और जांच के लिए अपनी टीम भेजी है.
- दिल्ली महिला आयोग ने फ्लिपकार्ट और अमेज़न को नोटिस जारी किया है.

राजधानी दिल्ली में स्कूल की एक छात्रा पर तेज़ाब फेंकने के मामले में दो ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया गया है.
इससे पहले पुलिस ने कहा था कि छात्रा पर फेंका गया एसिड ऑनलाइन ख़रीदा गया था. इसके बाद दिल्ली महिला आयोग ने फ्लिपकार्ट और अमेज़न को नोटिस जारी किया है.
आयोग ने नोटिस में लिखा है, "हमें पता चला है कि फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे जाने-माने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर तेजाब आसानी से उपलब्ध है जो कि ग़ैर-क़ानूनी है. ये गंभीर चिंता का विषय है और इस मामले में तुरंत जांच की जानी चाहिए."
आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा है कि "तेजाब का इस तरह ये ग़ैरक़ानूनी काम धड़ल्ले से चल रहा है, जो ठीक नहीं है. इन दोनों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए."
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आयोग ने क्या किए सवाल?
आयोग ने इन दोनों ई-कॉमर्स कंपनियों से इसकी वजह पूछी है और सवाल किया है कि वो उन विक्रेताओं के बारे में पूरी जानकारी दें जिन्होंने इन प्लेटफॉर्म्स पर बिक्री के लिए 'तेजाब' को उत्पाद के तौर पर रखा है.
आयोग ने फ्लिपकार्ट और अमेज़न से ये भी पूछा है कि क्या कंपनियों ने तेजाब बेचने वाले इन विक्रेताओं के लाइसेंस की जांच की है, अगर जांच नहीं की गई है तो इसका कारण बताने को कहा है.
आयोग ने दोनों कंपनियों को तेजाब खरीदने वालों की पूरी जानकारी भी देने को कहा है और सवाल किया है जिन लोगों ने ऑनलाइन तेजाब खरीदा है क्या उनके फोटो पहचान पत्र मांगे गए थे.
राष्ट्रीय महिला आयोग भी हुआ सक्रिय
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले में स्वत:संज्ञान लेते हुए जांच के लिए अपनी टीम को अस्पताल भेजा है और कहा है कि वो पीड़िता की पूरी तरह से मदद करेगा.
महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा है कि इस मामले में पीड़िता मात्र 17 साल की है इसलिए इस मामले की जांच राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी करेगा.
आयोग ने तेजाब की खुदरा बिक्री पर पाबंदी के संबंध में कार्रवाई रिपोर्ट मांगने के लिए दिल्ली सरकार के गृह विभाग को भी नोटिस जारी किया है.
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क्या है पूरा मामला?
14 दिसंबर को दिल्ली के द्वारका इलाक़े में स्कूल जा रही एक छात्रा पर बाइक पर सवार दो लड़कों में से एक ने तेज़ाब फेंक दिया था.
17 साल की इस लड़की का इलाज दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में चल रहा है. दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर सागर प्रीत हुड्डा का कहना है कि छात्रा को 8 फीसदी जल गई है.
पुलिस का कहना है कि इस मामले में उन्होंने 12 घंटे के अंदर सभी तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है
हुड्डा ने बताया, "मुख्य अपराधी सचिन ने फ्लिपकार्ट से तेजाब खरीदा था और इसके लिए पेटीएम से पैसे चुकाए थे."
पुलिस का कहना है कि इस साल सितंबर तक नाबालिग छात्रा और सचिन के बीच दोस्ती थी पर उसके बाद किसी बात पर अनबन हो गई और लड़की ने बात करना बंद कर दिया.
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देश में तेज़ाब बिक्री पर है प्रतिबंध
साल 2013 में महिलाओं पर बढ़ते तेज़ाब हमलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश में दुकानों में तेजाब की बिक्री पर रोक लगा दी थी.
कोर्ट ने ये भी कहा कि तेज़ाब की बिक्री के वक्त खरीदने वाले को अपनी कोई पहचान पत्र दिखाना होगा.
साल 2020 में उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले में तीन नाबालिग़ लड़कियों पर तेजाब फेंकने का मामला सामने आया.
राष्ट्रीय आपराधिक रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार साल 2014 से लेकर 2018 के बीच देश में तेजाब के हमलों के 1,483 शिकार हुए हैं.
इस दौरान इस तरह के मामलों में जो राज्य लिस्ट में सबसे ऊपर रहे उनमें उत्तर प्रदेश, बंगाल और दिल्ली शामिल थे.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था
2006 में लक्ष्मी अग्रवाल नाम की एक पीड़िता ने खुद पर हुए तेज़ाब के हमले के बाद एक सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. जब लक्ष्मी पर तेज़ाब फेंका गया था वो केवल 16 साल की थीं.
लक्ष्मी ने कोर्ट में गुहार लगाई कि तेज़ाब की खुली बिक्री पर रोक लगाई जाए और तेज़ाब हमले को अपराध की श्रेणी में शामिल करने के लिए दंड संहिता में उचित प्रावधान किया जाए और अपराधी को सज़ा देने के लिए क़ानून में सख्त प्रावधान किए जाएं.
साथ ही उन्होंने पीड़िता के लिए मदद की भी गुहार लगाई थी जिससे उसे एक बार फिर सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सके.
इस मामले में 2013 में कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि तेज़ाब की बिक्री के लिए लाइसेंस ज़रूरी होगा और व्यक्ति को इसके लिए द पॉयज़न्स ऐक्ट 1919 के तहत पंजीकरण कराना होगा.
इसके बाद सरकार ने दंड संहिता में बदलाव कर तेज़ाब हमले को महिला के ख़िलाफ अपराध मानते हुए इसमें कम से कम 10 साल की और अधिकतम आजीवन कारावास की सज़ा, साथ ही जुर्माने का प्रावधान किया.
सरकार ने कहा कि जुर्माने की इस रकम का इस्तेमाल पीड़िता के इलाज में किया जाएगा.
पीड़िता की मदद के लिए सरकार की तरफ से तीन लाख रुपयों के मुआवज़े की भी व्यवस्था की गई. साथ ही कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का इलाज मुफ्त में अस्पताल में किया जाए. इस मामले में सरकार ने कहा कि जो अस्पताल इस तरह के मामले में पीड़िता का इलाज करने से मना करेंगे उन्हें भी अधिकतम एक साल की सज़ा हो सकती है और उन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
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