भारतीय सैनिकों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा चीनी सैनिकों के ज़ख़्मी होने की ख़बर: प्रेस रिव्यू

भारत और चीन सीमा

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अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत और चीनी सैनिकों के बीच बीते शुक्रवार हुई हिंसक झड़प में अब तक 12 से 15 भारतीय सैनिकों के जख़्मी होने की ख़बर आ रही है.

अंग्रेजी अख़बार द टेलिग्राफ़ में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्र ने बताया है कि इस झड़प में भारतीय सैनिकों के मुकाबले ज़्यादा चीनी सैनिक जख़्मी हुए हैं.

सूत्रों ने बताया है कि चीनी सैनिक सीमा पार करके भारत में दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे तभी भारतीय सैनिकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की. इसके बाद दोनों पक्षों में संघर्ष हुआ जिसमें कई भारतीय सैनिकों को हड्डियां टूटने जैसी चोटें आई हैं.

इस सूत्र ने अख़बार को बताया है कि दोनों पक्षों के बीच पहले हाथापाई हुई और फिर पत्थरबाज़ी हुई. इस संघर्ष में चीनी सैनिकों ने कील लगे डंडों का इस्तेमाल किया.

अंग्रेज़ी अख़बार इकॉनोमिक टाइम्स में इसी मुद्दे पर छपी ख़बर में चीनी सैनिकों की संख्या 350 के क़रीब बताई गयी है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, बीजेपी सांसद तापिर गाओ ने कहा है कि 'उन्हें जानकारी मिली है कि भारतीय सैनिकों को कुछ चोटें आई हैं, लेकिन पीएलए के सैनिकों को काफ़ी ज़्यादा चोटें आई हैं.'

वहीं, द टेलिग्राफ़ के मुताबिक़, साल 2020 में 15 जून को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष होने के बाद ये पहला मौका है, जब चीन और भारत के सैनिकों के बीच इस तरह का संघर्ष हुआ है. माना जाता है कि उस संघर्ष में भी इसी तरह के कीलों वाले डंडों का इस्तेमाल किया गया था.

इससे पहले रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर पत्रकारों को बेहद सावधानी से लिखा एक संदेश भेजा था जिसमें बताया गया था कि दोनों पक्षों को "मामूली चोटें" आई हैं.

इस संदेश में लिखा गया है कि 'नौ दिसंबर को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) के सैनिक तवांग सेक्टर में एलएसी के संपर्क में आए थे जिसे भारतीय सैनिकों ने पुरज़ोर तरीके से चुनौती दी. इस वजह से दोनों पक्षों के सैनिकों को हल्की चोटें आई हैं.'

इसके बाद दोनों पक्ष तुरंत पीछे हट गए. कुछ समय बाद भारतीय सेना के स्थानीय कमांडर ने अपने चीनी समकक्ष के साथ शांति स्थापित करने के लिए तय नियमों के तहत फ़्लैग मीटिंग की.

इस अधिकारी ने अपने संदेश में ये भी बताया है कि 'अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में एलएसी पर कुछ निश्चित जगहों को लेकर दोनों पक्षों के बीच स्पष्टता की कमी है, इन इलाकों में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के मुताबिक़ गश्त करते हैं. साल 2006 के बाद से यही देखा जा रहा है.'

भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है जिसे लाइन ऑफ़ ऐक्चुअल कंट्रोल यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा कहा जाता है. इसमें से 1,346 किलोमीटर का हिस्सा पूर्वी क्षेत्र में आता है.

पूर्वी लद्दाख में मई 2020 के बाद से भारतीय और चीनी सैनिक कई बार सीमा पर आमने-सामने आ चुके हैं.

अख़बार के मुताबिक़, ऐसा माना जाता है कि चीन ने लद्दाख में भारत के दावे वाली लगभग एक हज़ार वर्ग किलोमीटर जगह पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

अरुणाचल पूर्व लोकसभा सीट से संसद सदस्य गाओ ने कहा, "मैं कहना चाहता हूं मैकमोहन लाइन पर इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति भारत और चीन के रिश्ते ख़राब करेगी. मैं व्यक्तिगत तौर पर पीएलए के कदमों की निंदा करता हूं. भारतीय सैनिक एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे और चीन इस तरह की कितनी भी हरक़तें करे, हमारे सैनिक पर्याप्त जवाब देंगे."

आशीष मिश्रा

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आशीष मिश्रा को कब तक जेल में रख सकते हैं? - सुप्रीम कोर्ट

भारत की सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को लखीमपुर खीरी कांड में अभियुक्त आशीष मिश्रा को बिना ज़मानत जेल में रखे जाने पर सवाल उठाया है.

अंग्रेजी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने आशीष मिश्रा की ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अलग - अलग चीजों में संतुलन बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है जिसमें निष्पक्ष सुनवाई शामिल है.

कोर्ट ने कहा है कि पीड़ितों और चश्मदीदों को सुरक्षा देने के साथ-साथ अभियुक्त के अधिकारों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.

पिछले साल छह दिसंबर को उत्तर प्रदेश की अदालत ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र के ख़िलाफ़ हत्या, दंगा, और आपराधिक साज़िश रचने का मामला तय किया था.

इस मामले में आगामी 16 दिसंबर से सुनवाई शुरू होनी है. आशीष मिश्र लगभग एक साल से हिरासत में हैं.

सर्वोच्च अदालत ने लखीमपुर खीरी के अतिरिक्त सत्र न्यायाशीश से भी एक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है जिसमें उन्हें बताना होगा कि इस सुनवाई में कितना वक़्त लग सकता है.

कोर्ट ने मिश्रा की ज़मानत याचिका पर अगली सुनवाई आगामी 11 जनवरी को करने का फ़ैसला किया है.

जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा, "ये मामला इस अदालत की देखरेख में जांच से लेकर आरोप तय करने तक पहुंच चुका है. इस मामले के 200 चश्मदीद हैं जिन्हें अपनी गवाही देनी है.

सवाल ये है कि आख़िर एक ऐसे मामले में किस चरण पर ज़मानत दी जानी चाहिए...जिसमें सुनवाई पूरी होने में एक पर्याप्त समय की ज़रूरत है. तो ज़मानत कब दी जानी चाहिए? उन्हें कब तक हिरासत में रखा जाना चाहिए?"

पीड़ित पक्ष की ओर से अदालत में पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि आशीष मिश्रा के मामले में कुछ भी ऐसा विशेष या अपवाद नहीं है. और हत्या से जुड़े मामलों में ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट की ओर से ज़मानत याचिकाएं ठुकराए जाने के बाद सर्वोच्च अदालत सामान्य रूप से दखल नहीं देती है.

उन्होंने कहा, "ये ऐसा मामला नहीं है जहां अभियुक्त के अधिकारों को लेकर सोचने की ज़रूरत हो. तीन चश्मदीदों पर पहले ही हमला हो चुका है. ये बहुत ताक़तवर लोग हैं. वह विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को सबक सिखाना चाहता था."

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सब्ज़ी

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आख़िरकार कम हुई महंगाई, 2022 में सबसे कम स्तर पर

भारत में खुदरा चीज़ों के दामों में पिछले काफ़ी समय से जारी बढ़त में पिछले महीने अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गयी है.

सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक़, नवंबर महीने में महंगाई दर 5.88 के स्तर पर आ गयी है जो अक्तूबर में 6.77 थी. पिछले साल नवंबर में यही दर 4.91 थी.

अंग्रेजी अख़बार बिज़नेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, महंगाई दर में कमी आने के साथ-साथ औद्योगिक उत्पादन दर भी कम होकर 26 महीने पुराने स्तर पर आ गयी है.

ऐसे में फ़रवरी में होने जा रही एक अहम बैठक से पहले आरबीआई को रेपो रेट में लगातार होती बढ़त रोकने के लिए उचित माहौल मिल गया है.

महंगाई दर में कमी मुख्य रूप से सब्ज़ियों ( 8.08 फ़ीसदी) और फलों (2.62 फीसदी) की क़ीमतें कम होने की वजह से आई है. अंडे, दालों और मसालों की क़ीमतों में तेजी बनी हुई है.

वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, 'खाद्य क़ीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार जो प्रयास कर रही है, उसकी वजह से महंगाई दर आरबीआई के टारगेट छह फ़ीसद से भी नीचे आ गयी है. अनाज, दालों और खाद्य तेलों की क़ीमतों में नरमी लाने के लिए व्यापार संबंधी उपयुक्त उपाय किए गए हैं. आने वाले महीनों में इन उपायों का असर और दिख सकता है.'

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