नूरा और अदीलाः वेडिंग फ़ोटोशूट से सुर्ख़ियों में लेस्बियन कपल

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- Author, मेरिल सेबेस्टियन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, कोच्चि
"हम आज़ाद हैं, अपने सपने को जी सकते हैं."
इस एक बयान से समझी जा सकती है फ़ातिमा नूरा और अदीला नासरीन की खुशी. केरल की ये महिला समलैंगिक जोड़ी इस साल की शुरुआत से ही सुर्ख़ियों में है, जब केरल की एक अदालत ने दोनों महिलाओं को दोबारा एक साथ रहने की इजाज़त दे दी थी.
नूरा और अदीला के परिवार वालों ने जबरन दोनों को अलग कर दिया था. परिवार के विरोध के बाद नूरा और अदीला ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और एक याचिका के ज़रिए एक साथ रहने की गुहार लगाई थी.
पिछले महीने ये जोड़ी फिर से चर्चा में आई जब दोनों ने दुल्हन की लिबास पहनकर अपनी वेडिंग फ़ोटोशूट कराया.
भूरे और गहरे नीले रंग के लहंगे और चांदी के जेवरात से सजी-धजी नूरा और अदीला ने फ़ोटो शूट के दौरान एक दूसरे को अंगूठी पहनाई और सूर्ख़ गुलाब से बनी माला भी एक दूसरे को पहनाई.
23 साल की नूरा ने वेडिंग फ़ोटोशूट के फ़ोटो अपने फ़ेसबुक पेज पर डाली तो बधाइयों की बाढ़ आ गई. नूरा ने फ़ोटो अलबम को अंग्रेजी में एक आकर्षक कैप्शन दिया था जिसका मतलब है- जीवन की बड़ी उपलब्धि हासिल- अब हमेशा के लिए साथ.

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अब करेंगे शादी का ख्वाब पूरा
बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत में अदीला ने बताया, "हमने वेडिंग फोटोशूट इसलिए कराया क्योंकि हमें ये आयडिया बेहद दिलचस्प लगा."
नूरा और अदीला से पहले भी समलैंगिक समुदाय के कई जोड़े इस तरह के फ़ोटोशूट करा चुके हैं. अदीला ने कहा कि "हमने अभी शादी नहीं की है, लेकिन एक वक्त पर हम ये जरूर करना चाहेंगे."
भारत में समलैंगिक जोड़ों को इस तरह साथ रहने की आजादी 2018 से मिली जब सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फ़ैसले में समलैंगिक संबंधों को अपराध मुक्त कर दिया. इससे पहले देश में समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखा जाता था. इस प्रावधान के ख़िलाफ़ LGBTQ+ कम्यूनिटी ने एक दशक से ज़्यादा लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी.
सुप्रीम कोर्ट की इस व्यवस्था के बाद के बरसों में समलैंगिक समुदाय को लेकर जागरूकता ज़रूर बढ़ी है. लेकिन समाज में ऐसे संबंधों को स्वीकारे जाने को लेकर अब भी बड़ी झिझक है.
हालांकि भारत में समलैंगिक शादियों पर भी कोई क़ानूनी बंदिश नहीं है. लेकिन इसे क़ानूनी मान्यता दिलाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हैं, जिन पर अभी फ़ैसला आना बाकी है.
नूरा और अदीला को भी केरल हाई कोर्ट से एक साथ रहने की मंजूरी मिली हुई है. लेकिन इन्हें आज भी दूसरे शादी शुदा जोड़े की तरह रहने की आज़ादी और सुविधाएं नहीं है.
अदीला कहती हैं, "अगर हम कोई फॉर्म भरते हैं, तो उसमें पति या पत्नी के तौर पर नाम पूछे जाते हैं. मैं जहां काम करती हूं वहां आज भी मुझे अपने पिता के नाम का इस्तेमाल करना पड़ता है. अभी हम दोनों एक अस्पताल में गए थे, जहां हमें अपने पिता का नाम दर्ज करवाना पड़ा. ये बेहद निराश करने वाली बात है."
ये बात और भी ज़्यादा मुश्किल इसलिए हो जाती है, क्योंकि ऐसे समलैंगिक जोड़ों के संबंध इनके परिवारों के साथ पहले की तरह सामान्य नहीं रह जाते.

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क़ानूनी अधिकार मिला, परिवार समाज अब भी नाराज़
इस तरह जिस परिवार और समाज में ये दोनों महिलाएं पली बढ़ीं, समलैंगिक संबंध सामने आने के बाद उसका सहयोग खो बैठीं. अब ये दोनों ही एक दूसरे का आसरा हैं. मदद का एक आसरा 'वनाजा कलेक्टिव' जैसा LGBTQ+ ग्रुप भी है, जिनकी मदद से नूरा और अदीला एक साथ रहने में कामयाब हुईं.
नूरा और अदीला हाई स्कूल में पढ़ते हुए एक दूसरे के नजदीक आईं थीं. स्कूल छोड़ने के बाद दोनों तीन साल तक अलग रहीं. इस दौरान ये केरल के अलग अलग जिलों में अपने-अपने परिवार के साथ रह रही थीं. इस दौरान ये दोनों कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर रही थीं और कभी कभार फ़ोन या मैसेज के ज़रिए संपर्क में रहती थीं.
इस दौरान इन्होंने अपने लिए सपोर्ट ग्रुप की तलाश कर ली थी. इस ग्रुप ने इन्हें सलाह दी थी- पहले अपनी पढ़ाई पूरी करो और नौकरी हासिल करो. अब ये सलाह नूरा और अदीला दूसरे समलैंगिक जोड़ों को देती हैं जो इनसे सहायता मांगते हैं.
अदीला बताती हैं हमारे जैसे जोड़ों को अपने रुढ़िवादी परिवारों से अलग होकर साथ रहना आसान नहीं है.
"हमारे समुदाय में बहुत सारे लोगों की शैक्षिक पृष्ठभूमि अच्छी नहीं है. जब हम इनके लिए नौकरी ढूंढने में मदद के लिए आगे आते हैं, तो शैक्षिक योग्यता कम होने से बड़ी मुश्किल आती है."
इसलिए समलैंगिक जोड़ों के लिए काम करने वाले सपोर्ट ग्रुप सबसे पहले आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने की सलाह देते हैं.
नूरा कहती हैं, "अपनी शर्तों के मुताबिक जीने के लिए नौकरी बहुत ज़रूरी है. अगर आप आर्थिक रूप से सुरक्षित हैं, तो आपको दूसरे की दया पर जीना नहीं पड़ेगा."
नूरा और अदीला दोनों ही आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और कोर्ट के फ़ैसले के बाद इन्हें जो आज़ादी मिली है, उससे पुराने कड़वे अनुभवों को भुलाने और आगे बढ़ने में काफ़ी मदद मिली है. इसकी एक झलक सोशल मीडिया पर जारी इनकी तस्वीरों से मिलती है.

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असल ज़िंदगी से सोशल मीडिया तक पहले से ज़्यादा मुखर
एक वक़्त था जब ऐसे समलैंगिक जोड़ों की तस्वीरें एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए या फिर एक साथ सिर जोड़े हुए सामने आती थीं. लेकिन आज के दौर की तस्वीरों में ये एक साथ अपने जीवन का ताना-बाना बुनते दिखाई देते हैं. इंस्टाग्राम रील्स से लेकर दोस्तों के साथ सैर सपाटा और एक साथ डॉग्स पालने तक.
नूरा कहती हैं, "फ़िलहाल ऐसा कुछ नहीं है, जिसे हम बदल देंगे, बस इतना है कि हम कड़वे अनुभवों के दौर से बाहर निकल चुके हैं."
नूरा और अदीला दोनों ही लोगों से मिले सपोर्ट को लेकर उत्साहित हैं. इनके कई इंटरव्यू महिलाओं की मशहूर मैग्ज़ीन्स में छप चुके हैं, कई टीवी शो में भी इनकी कहानियां दिखाई जा चुकी है.
अदीला बताती हैं, "आज हम अगर मास्क और चश्में पहन कर बाहर निकलते हैं, तो भी लोग पहचान लेते हैं."
जहां तक परिवार की बात है, तो नूरा और अदीला के मुताबिक इनके परिवार को लगता है कि दोनों का रिश्ता जल्दी ही ख़त्म हो जाएगा. इनके सोशल मीडिया पेज पर भी कुछ इसी तरह के कमेंट्स तमाम लोग करते हैं.
इसमें तमाम लोग वो भी हैं जिन्होंने दोनों को सपोर्ट किया, अब ये कहते हुए इनका विरोध करते हैं कि दोनों ने एक बुरा उदाहरण पेश किया है. दोनों को किसी पुरुष से शादी कर लेनी चाहिए.
नूरा और अदील ऐसी प्रतिक्रियाओं को पढ़ती हैं और कुछ का जवाब भी देती हैं. जवाब देने का इनका अंदाज़ बेहद चुटीला होता है.
हाल ही में एक इंस्टाग्राम यूज़र ने लिखा कि इनकी सेक्सुआलिटी जल्द ही ख़त्म हो जाएगी. क्योंकि आज तक मैंने 40 साल से ज़्यादा उम्र की लेस्बियन नहीं देखी.
इसके जवाब में दोनों ने लिखा, "हमारे 40 की होने का इंतज़ार कीजिए आप."
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