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हिंदूवादी नेता सुधीर सूरी कौन थे, जिनकी अमृतसर में हुई सरेआम हत्या
शुक्रवार को पंजाब के एक राजनीतिक दल शिवसेना (टकसाली) के नेता सुधीर सूरी की अमृतसर में दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई. ये घटना अमृतसर में गोपाल मंदिर के सामने हुई, जहां वो एक धरना प्रदर्शन कर रहे थे.
सुधीर सूरी अपने विवादित बयानों के कारण विवादों में बने रहते थे. ख़ास कर सिख कट्टरपंथियों के एक वर्ग को लेकर दिए गए बयानों के कारण वह अक्सर विवादों के घेरे में रहा करते.
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इंटेलिजेंस जानकारियों के आधार पर और सिख कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ दिए गए बयानों के कारण उन्हें 'गंभीर ख़तरा से घिरे हुए शख़्स' की श्रेणी में रखा गया था. इसकी वजह से उनकी सुरक्षा में 15 बंदूक़धारियों को तैनात किया गया था.
सूरी पर हेट-स्पीच के छह केस चल रहे थे. इनमें से ज़्यादा तर मामले सिख संगठनों ने उनके ख़िलाफ़ दर्ज कराए थे. दो केस उनपर एससी-एससी एक्ट के तहत दर्ज थे. महर्षि वाल्मीकी के लेकर दिए गए बयानों के कारण उन्हें जेल के चक्कर भी लगाने पड़े थे.
सूरी साल 2014 में तब चर्चा में आए, जब उन्हें एक सिख समूह की शिकायत पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में अभियुक्त बनाया गया.
नवंबर 2017 में सूरी को 'आम लोगों की भावनाएं आहत करने और हिंदू-सिख के बीच सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश' के मामले में गिरफ़्तार किया गया था.
साल 2020 में सुधीर सूरी पर मुसलमानों के एक धार्मिक संगठन तबलीग़ी जमात को लेकर दिए गए एक बयान के मामले में केस दर्ज किया गया था.
सूरी के ख़िलाफ़ लोगों की भावनाओं को कथित रूप से आहत करने और क़ानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करने को लेकर आईपीसी की धारा 115, 153-ए, 295-ए और 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया था.
सुधीर सूरी आर्थिक रूप से संपन्न थे. उनका 'सांई ट्रैवल' नाम से एक ट्रांसपोर्ट बिज़नेस है.
एक फ़ेसबुक वीडियो, जिसके बाद कुछ घंटों में हो गई हत्या
गोली लगने से बमुश्किल एक घंटे पहले सूरी ने फ़ेसबुक पर लाइव किया था, जहां उन्होंने कहा था कि पुरानी मूर्तियों को "बेशर्मी से कचरे में फेंका" जा रहा है.
उन्होंने कहा था कि "हम इस तरह की बेअदबी बर्दाश्त नहीं करेंगे, भले ही ये हिंदुओं के ज़रिए ही क्यों न हो."
हिंदू मूर्तियों की कथित बेअदबी को लेकर वह गोपाल मंदिर प्रबंधन के कुछ लोगों के साथ बहस में भी उलझ गए थे.
इंडियन एक्सप्रेस की साल 2020 में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि सूरी की सुरक्षा में पंजाब पुलिस के 15 जवान लगाए गए थे.
अख़बार से सुधीर सूरी के प्रवक्ता रंजीत सिंह ने तब कहा था, "उन्हें आठ बंदूक़धारी, पांच कॉन्स्टेबल और दो ड्राइवर दिए गए हैं. उन्हें सिर्फ़ एक पुलिस पायलट जिप्सी दी गई है. हालांकि सुरक्षा पर्याप्त नहीं है. हमने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में एक रिट दायर कर सूरी के लिए केंद्र सरकार से सुरक्षा की मांग की है."
पंजाब में हाई-प्रोफ़ाइल हत्या के बढ़ते मामले
सुधीर सूरी की मौत बीते महीनों में पंजाब में हुई हाई-प्रोफ़ाइल हत्या का दूसरा मामला है. इससे पहले पॉप सिंगर सिद्धू मूसेवाला की मई में हत्या कर दी गई थी.
पंजाब के मानसा में 29 मई को पंजाबी सिंगर और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला पर गोलियां चली थीं, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी. पुलिस के मुताबिक़ मूसेवाला की हत्या में दो मॉड्यूल शामिल थे, जिनका सीधा संपर्क कनाडा में बसे गैंगस्टर गोल्डी बरार से था.
शुक्रवार को क्या हुआ?
पंजाब के अमृतसर में शुक्रवार को गोपाल मंदिर के बाहर हिंदूवादी नेता सुधीर सूरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई.
शिवसेना नेता सुधीर सूरी अपने साथियों के साथ मजीठा रोड पर गोपाल मंदिर के बाहर धरना दे रहे थे, तभी उनका किसी से विवाद हो गया और उन्हें गोली मार दी गई.
पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि सुधीर सूरी पर गोली चलाने वाला शख़्स एक स्थानीय दुकानदार था, जिनकी विरोध प्रदर्शन वाली जगह के पास ही दुकान है. उनका नाम संदीप सन्नी है.
आप विधायक ने अपनी ही सरकार पर उठाया सवाल
आम आदमी पार्टी के विधायक ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाया है.
विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने इस घटना को शर्मनाक बताते हुए कहा कि अमृतसर में क़ानून-व्यवस्था पूरी तरह बिखर चुकी है.
उन्होंने मीडिया से कहा, "ये शर्मनाक घटना थी. मैं वहां सबसे पहले गया था. जो सच्चाई है वो सच्चाई है. अगर पुलिस सिस्टम बिखर गया है तो बिखर गया है. मैंने बार-बार कहा है कि यहां एक विशेषज्ञ टीम भेजो और अमृतसर की केस स्टडी करवाओ. यहां मॉकड्रिल करने से कुछ नहीं होने वाला."
विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने आगे कहा, "मैंने डीजीपी, गृह सचिव और मुख्यमंत्री से बात की थी. सबसे ज़्यादा शर्मिंदगी ये है कि ये सब कुछ अमृतसर उत्तर में हो रहा है. मैं ख़ुद परेशान हो गया हूं. हम कुछ और वादा करके जनता के बीच आए थे. जनता ने तुम्हें जिताया था. ये सबकुछ हमारे सामने हो रहा है तो हमें भी शर्म आती है. क़ानून-व्यवस्था की पूरी तरह असफलता है. पुलिस कमिश्नर को डिसमिस करना चाहिए."
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