मोरबी हादसे के लिए गिरफ़्तार लोग कौन, ओरेवा ग्रुप के जयसुख पटेल ने क्या कहा?

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गुजरात के मोरबी में रविवार को सस्पेंशन ब्रिज गिरने से अब तक 135 लोगों की जान जा चुकी है. इस मामले में पुलिस ने नौ लोगों को गिरफ़्तार किया है. हादसे के बाद पुल की देखरेख करने वाली कंपनी ओरेवा ग्रुप भी सवालों के घेरे में आ गई है जिसको लेकर कंपनी के प्रमुख ने सफ़ाई भी दी है.
पुलिस ने इस मामले में ग़ैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है. वहीं, प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को पुल हादसे के पीड़ितों और उनके परिवारों से मुलाक़ात करने पहुंचे हैं. उन्होंने पहले दुर्घटनाग्रस्त पुल का जायज़ा लिया और फिर घायलों से मिलने अस्पताल भी गए हैं.
हादसे के बाद से ही इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है और बीजेपी और विपक्षी पार्टियां अब आमने-सामने हैं.
विपक्ष ने बीजेपी सरकार से घटना की गहन जाँच कराने की मांग की है.
कौन-कौन गिरफ़्तार?
इस मामले में कार्रवाई की जानकारी देते हुए आईजी अशोक यादव ने बताया कि पुलिस नौ लोगों को अरेस्ट कर चुकी है. इनमें ओरेवा कंपनी के मैनेजर भी शामिल हैं.
गिरफ़्तार हुए लोगों में ओरेवा कंपनी के प्रबंधक दीपक नवीनचंद्र पारेख और दिनेश मनसुख दवे, टिकट कलेक्टर मनसुख वालजी टोपिया और मदार लखभाई सोलंकी, ब्रिज कॉन्ट्रैक्टर लालजी परमार और देवांग परमार शामिल हैं.
इनके अलावा पुलिस ने तीन सुरक्षा गार्डों को भी गिरफ़्तार किया है जिनके नाम मुकेशभाई चौहान और दिलीप गोहिल हैं.

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पुल के हादसे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिना फ़िटनेस सर्टिफ़िकेट के इस ब्रिज को खोला गया? साथ ही, क्या पुल को मरम्मत के लिए निर्धारित समय से पहले जनता के लिए खोल दिया गया था?
ओरवा ग्रुप और मोरबी नगरपालिका के बीच 300 रुपये के स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर किए गए चार पन्नों के समझौते में टिकट की दरों का विवरण है.
बता दें कि इस पुल की मरम्मत में 8 से 12 महीने लगने का अनुमान था, फिर भी समझौते के सातवें महीने में ही इसे खोल दिया गया.
ओरेवा ग्रुप ने हादसे पर क्या कहा?
इन सवालों को लेकर ओरेवा ग्रुप के प्रमुख जयसुखभाई पटेल ने कहा, "ये लगभग 150 साल पुराना सस्पेंशन ब्रिज है जो मोरबी के राजा के समय का है. इसे रख-रखाव, संचालन और सुरक्षा के लिए 15 साल के लिए हमारी कंपनी को सौंपा गया. सरकार और मोरबी नगरपालिका के बीच चार पन्नों के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं."
जयसुखभाई ने कहा, "ये सस्पेंशन ब्रिज मोरबी की पहचान है. पिछले छह महीने से ये मरम्मत के लिए बंद था. इसे बैठक के दिन जनता के लिए खोल दिया गया था."

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उन्होंने कहा, "चूंकि ये एक लटकता हुआ पुल है, इसलिए इसकी मरम्मत के लिए विशेष कंपनी की मदद ली गई. इसकी ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए प्रकाशभाई की मदद ली गई जिन्होंने साल 2007 में भूकंप के बाद इस पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद भी मरम्मत का काम किया था."
"इस बार क़रीब दो करोड़ रुपये की लागत से इसकी पूरी तरह मरम्मत की गई थी."
गुजरात के मोरबी में माच्छू नदी पर बना पुल रविवार शाम क़रीब साढ़े छह बजे ढह गया.
पुलिस के मुताबिक़ मोरबी में पुल गिरने से अब तक 135 लोगों की मौत हो चुकी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोरबी आपदा में जान गंवाने वालों के परिवारों को प्रधानमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये देने की घोषणा की है.
इसके साथ ही गुजरात सरकार ने आर्थिक मदद का भी एलान किया है.
पुल को छह महीने पहले मरम्मत के लिए बंद कर दिया गया था और हादसे से चार दिन पहले 26 अक्टूबर को जनता के लिए खोल दिया गया था.

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आज क्या-क्या हुआ?
गुजरात के क़ानून मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि मोरबी पुल हादसे में अब तक 135 लोगों की मौत हो चुकी है. क़ानून मंत्री ने ये भी बताया कि घटना के बाद 2 नवंबर को पूरे राज्य में शोक मनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि 2 नवंबर को सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा.
राजेंद्र त्रिवेदी ने बताया कि अब तक 153 घायलों का इलाज कर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और 17 लोगों का अभी इलाज चल रहा है.

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पुलिस ने क्या बताया
हादसे के लिए नगर पालिका और ओरेवा कंपनी की ज़िम्मेदारी तय करने के बारे में पूछे जाने पर आईजी अशोक यादव ने कहा, "कोई भी जांच वैज्ञानिक और फ़ोरेंसिक साक्ष्य पर आधारित होती है, अगर इस स्तर पर कोई लापरवाही पाई जाती है तो दोषी को जाने नहीं दिया जाएगा. फ़िलहाल, पुलिस द्वारा सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है."
रेंज आईजी अशोक यादव ने बताया कि पुलिस हेल्प डेस्क पर रविवार रात तक 14 लोगों के लापता होने की ख़बर है जिनके ठिकाने का पता लगा लिया गया है.
हालांकि, उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से परहेज़ किया कि क्या इस मामले में ओरेवा कंपनी का मालिक और कोई सरकारी अधिकारी ज़िम्मेदार था.
पुल टूटने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, गृह मंत्री हर्ष सांघवी मोरबी पहुंचे. हादसे के मृतकों के लिए दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की गई है.
गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने सोमवार तड़के प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि ''पुल रविवार शाम 6.30 बजे गिरा और 6 बजकर 45 मिनट पर राहत कार्य शुरू हो गया था.'
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