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झारखंड: दलित छात्रा ने ख़ुद को लगाई आग, टीचर पर क्लास में कपड़े उतरवाने का आरोप
- Author, मोहम्मद सरताज आलम
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, जमशेदपुर से
झारखंड के जमशेदपुर में एक स्कूल टीचर पर आरोप है कि उन्होंने नवीं कक्षा की एक छात्रा को डांटा, पीटा और फिर उनके कपड़े उतरवा दिए. स्कूल में परीक्षा चल रही थी और शिक्षिका ड्यूटी पर थीं.
आरोप है कि लड़की परीक्षा के दौरान नक़ल कर रही थी. पीड़ित छात्रा दलित हैं और कुछ लोग इसे जातिवाद के नज़रिए से भी देख रहे हैं.
रिश्तेदारों का आरोप है कि स्कूल टीचर के बर्ताव से आहत छात्रा ने शर्मिंदगी में अपने शरीर पर मिट्टी का तेल छिड़कर कर आत्महत्या की कोशिश की. डॉक्टर के मुताबिक छात्रा 70 फ़ीसद जल गई हैं.
इस मामले में पुलिस ने टीचर को गिरफ़्तार कर लिया है.
पीड़ित की बहन का आरोप
पीड़ित छात्रा ऋतु की बहन पूनम मुखी ने पूरी घटना की जानकारी दी.
पूनम ने बताया कि ऋतु शुक्रवार की शाम जमशेदपुर के शारदामणि गर्ल्स हाईस्कूल से घर पहुंची.
इसके बाद ऋतु ने अपनी दीदी यानी पूनम मुखी से कहा कि 'आप सभी को बड़ी मां बुला रही हैं.' पूनम अपनी दो बहनों के साथ बड़ी मां के घर पहुंचीं, लेकिन बड़ी मां ने बताया कि उन्होंने किसी को नहीं बुलाया.
पूनम के मुताबिक ये सुनकर वो फ़ौरन अपने घर की तरफ़ भागीं.
पूनम बताती हैं, "मैंने जैसे ही अपनी गली में प्रवेश किया तो मेरी बहन चीख़ती हुई मेरी ओर बढ़ी, उसके शरीर से आग की लपटें उठ रही थीं. मैंने और पड़ोस की आंटी ने दौड़कर आग बुझाने की कोशिश की."
पूनम कहती हैं कि उन्हें इस बात का ज़रा भी आभास नहीं था कि ऋतु ऐसा कर सकती है, नहीं तो वो उसे घर में अकेले छोड़कर अपनी बड़ी मां के घर नहीं जातीं.
पूनम मुखी बताती हैं, "हम सभी के कमरे से बाहर निकलने के कारण ऋतु को ख़ाली कमरा मिला और उसने यह क़दम उठाया."
पूनम के अनुसार ऋतु का शरीर बहुत जल चुका था लेकिन अस्पताल जाते समय उन्होंने ऋतु से पूछा, 'तुमने ये क्यों किया?'
पूनम के मुताबिक ऋतु ने उन्होंने बताया, "आज परीक्षा देते समय मुझ पर शिक्षिका चंद्रा दास को शक हुआ कि मैंने नक़ल की है. इस पर उन्होंने मुझको बहुत डांटा, फिर बहुत मारा, उसके बाद परीक्षा कक्ष के बीच में मुझे खड़ा कर के भरी कक्षा में छात्राओं के सामने मेरे शरीर के सारे कपड़े उतरवा दिए. शिक्षिका के इस कृत्य से मुझे बहुत शर्मिंदगी हुई इस कारण मैंने ये क़दम उठाया."
पूनम मुखी का दावा है कि आग से बुरी तरह जली हालत में उनकी बहन झूठ नहीं बोल सकतीं.
बर्न केयर यूनिट में भर्ती
ऋतु को इलाज के लिए सबसे पहले सरकारी अस्पताल 'महात्मा गांधी मेमोरियल' ले जाया गया. लेकिन नाज़ुक हालत होने के कारण अस्पताल ने उनको टाटास्टील के प्राइवेट अस्पताल में रेफ़र कर दिया.
उनका वहीं इलाज हो रहा है. लेकिन करीबी लोगों का कहना है कि ऋतु के परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय है. वो अस्पताल के खर्च को वहन नहीं कर सकते.
ज़िला शिक्षा पदाधिकारी निर्मला बरेलिया ने बीबीसी को बताया, "मैंने पूर्वी सिंहभूम ज़िले की डीसी को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि ऋतु का इलाज टाटा स्टील के अस्पताल टीएमएच में फ़्री में हो."
ऋतु के भाई सागर मुखी ने बताया कि ज़िला प्रशासन की पहल के बाद इलाज शुरू हो गया.
ऋतु टाटा मेन अस्पताल के बर्न केयर यूनिट में भर्ती हैं. वहां के डॉक्टर के मुताबिक 'मरीज़ का शरीर 70 प्रतिशत जल गया है.'
डॉक्टर के अनुसार जब मरीज़ का शरीर चालीस फ़ीसदी से अधिक जल जाता है तब मरीज़ की जान को ख़तरा हो जाता है.
साथी छात्राओं ने क्या बताया?
घटना की जानकारी के लिए बीबीसी ने ऋतु के साथ पढ़ने वाली कुछ छात्राओं से संपर्क किया.
ऋतु की सहपाठी अनीशा साहू का दावा है, "चंद्रा मैम ने जब ऋतु से कपड़े उतरवाए तब कक्षा में पचास छात्राएं मौजूद थीं. उनमें से अधिकांश ऋतु पर हंसने लगीं, इस वजह से ऋतु बहुत शर्मिंदा थीं."
ऋतु की सहपाठी मनीषा नायक ने दावा किया, " कपड़े उतरवाने की घटना के बाद चंद्रा मैम ऋतु को प्रिंसिपल के पास ले गईं. उसके बाद चंद्रा मैम ऋतु को वापस परीक्षा कक्ष में ले आईं. लेकिन आगे की परीक्षा देने के लिए कॉपी नहीं दीं और कहा कि अब परीक्षा दे कर दिखाओ. ऋतु रोती रहीं, उस समय उनका शरीर कांप रहा था."
एक अन्य छात्रा प्रियंका कुमारी ने आरोप लगाया, "चंद्रा मैम सभी छात्राओं को हमेशा प्रताड़ित करती रहती हैं. हमने जब भी अपने अभिभावक से उनकी शिकायत की तो उन्होंने प्रिंसिपल को अवगत कराया लेकिन वे (प्रिंसिपल) अभिभावकों से ये कहते हैं कि ये छोटी बातें हैं."
अनीशा साहु, मनीषा नायक, प्रियंका कुमारी और भारती कुमारी का आरोप है, "शिक्षिका चंद्रा दास अक्सर स्कूल की छात्राओं को अपशब्द कहती थीं."
छात्राओं ने जो शिकायत की है उसे यहां लिखना संभव नहीं है.
ऋतु का परिवार
ऋतु जमशेदपुर की छायानगर बस्ती की रहने वाली हैं. इस बस्ती में लगभग तीन सौ घर हैं जिनमें शायद ही किसी घर की छत पक्की हो. ऋतु के घर में एक कमरा है जिसकी छत भी एस्बेस्टस से बनी है.
ऋतु के रिश्तेदार लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि ॠतु के पिता मज़दूरी करते थे. उनका देहांत दस वर्ष पहले हो गया था. इसके बाद चार बेटी व एक बेटे की ज़िम्मेदारी ऋतु की मां सरस्वती देवी के कंधों पर आ गई. वह एक प्राइवेट कंपनी में काम करती हैं. उन्हें छह हज़ार रुपये मासिक वेतन मिलता है.
ऋतु के भाई सागर मुखी भी मां के साथ काम करते हैं. लेकिन वह शिक्षा भी हासिल कर रहे हैं. उनकी चारों बहनें पढ़ाई कर रही हैं.
ऋतु की पड़ोसी अनीता प्रमाणिक कहती हैं, "सरस्वती देवी के सभी बच्चे पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं. लेकिन ऋतु इन सब में सबसे अच्छी छात्रा हैं. वह मुहल्ले के बच्चों को पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करती रही हैं."
अनिता आगे कहती हैं, "सरकार कहती है कि बच्चों को शिक्षित करो, अब बताइए यदि स्कूल में ऐसी घटना होगी तो बच्चों को स्कूल भेजने की हिम्मत कैसे करें."
शारदामणि गर्ल्स हाईस्कूल की प्रिंसिपल गीता रानी ने इस पूरे मामले में बस इतना कहा, "बच्ची की चिट टीचर ने कैसे पकड़ी इसकी जानकारी मुझे नहीं है."
जांच कमेटी
ज़िला शिक्षा पदाधिकारी निर्मला बरेलिया ने बताया कि मामले की पड़ताल के लिए चार सदस्यों की एक जांच कमेटी बनाई गई है.
उन्होंने कहा, "यदि शिक्षिका दोषी पाई गईं तो उनके ऊपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. लेकिन ये कार्रवाई स्कूल के प्रबंधन समिति द्वारा तय होगी. रही बात क़ानूनी कार्रवाई की तो ये पुलिस के स्तर से होगी."
जमशेदपुर के सीताराम डेरा थाना में इस मामले में एक एफ़आईआर दर्ज हुई है.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, " लगभग पचास वर्षीय शिक्षिका चंद्रा दास पर आईपीसी की धारा 323, 341, 509, पोस्को एक्ट की धारा 12 एवं जेजे की धारा 75 के तहत केस दर्ज किया गया है."
जमशेदपुर के एसएसपी प्रभात कुमार ने बीबीसी से कहा, "टीचर को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया है."
मुखी समाज से संबंध रखने वाले पूर्व मंत्री दुलाल भुइंया ने कहा, "ऋतु मुखी दलित समाज से हैं. स्कूल से ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिनमें दलित छात्रों के साथ सौतेला व्यवहार होता है."
उनका आरोप है, "ऋतु के साथ घटी ये घटना कहीं न कहीं जातिवाद से संबंधित है."
पूर्व मंत्री भुइंया ने माँग की है कि जाँच के लिए परीक्षा कक्ष के सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी जानी चाहिए.
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