लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान होंगे देश के नए सीडीएस, जानें 12 बातें

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लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान (रिटायर्ड) भारत के नए सीडीएस नियुक्त किए गए हैं. लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान (रिटायर्ड) सैन्य मामलों के विभाग के सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे.
देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद से यह पद खाली था. बीते वर्ष 8 दिसंबर को देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत के क़रीब साढ़े नौ महीने बाद यह नियुक्ति की गई है.
लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान अब देश के दूसरे सीडीएस होंगे.

जाने लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान के बारे में 12 बातें
1. 40 सालों से अधिक की अपनी सैन्य सेवा के दौरान लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने कई कमांड संभाले हैं. उन्हें जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में आतंक निरोधी ऑपरेशन का व्यापक अनुभव है.
2. 18 मई 1961 को जन्मे लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान 1981 में भारतीय सेना के 11 गोरखा राइफ़ल्स में शामिल हुए थे.
3. राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) खड़गवासला और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून से पढ़े हैं.
4. मेजर जनरल के पद पर रहते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर के बारामूला सेक्टर में नॉर्दर्न कमांड में इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली.
5. बाद में लेफ़्टिनेंट जनरल के पद पर रहते हुए उन्होंने पूर्वोत्तर कोर का नेतृत्व किया. भारतीय सेना में कुल 14 कोर हैं.

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उत्तराखंड से ही हैं लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान
6. उसके बाद वे सितंबर 2019 से मई 2021 यानी अपने रिटायरमेंट तक ईस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ़ रहे.
7. इसके अलावा वे डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन के पद पर भी रह चुके हैं.
8. लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने संयुक्त राष्ट्र के अंगोला मिशन में भी अपनी सेवाएं दी हैं.
9. 31 मई 2021 को लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान सेना से रिटायर हुए थे.
10. सेना से रिटायरमेंट के बाद भी उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मसलों पर अपना योगदान देना जारी रखा.
11. सेना में उनके विशिष्ट और शानदार सेवा के लिए लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान (रिटायर्ड) को परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है.
12. देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की तरह ही नए सीडीएस लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान भी उत्तराखंड से ही हैं.


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जनरल रावत समेत 11 फ़ौजियों का निधन
बीते वर्ष दिसंबर में देश के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत का एक हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हो गया था.
जनरल बिपिन रावत एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर में अपनी पत्नी और 12 अन्य सैन्य कर्मियों के साथ हादसे का शिकार हुए थे.
उस दुर्घटना में ब्रिगेडियर लखबिंदर सिंह लिड्डर, लेफ़्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, विंग कमांडर पीएस चौहान, स्क्वॉड्रन लीडर के सिंह, नायक गुरसेवक सिंह, नायक जितेंद्र कुमार, लांस नायक विवेक कुमार (जनरल रावत के पीएसओ), लांस नायक बी साई तेजा, जूनियर वारंट ऑफिसर दास, जूनियर वारंट ऑफिसर ए प्रदीप और हवलदार सतपाल सवार थे. इन सभी की मौत हो गई थी.
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सीडीएस की अहम ज़िम्मेदारियां
सीडीएस की मुख्य ज़िम्मेदारियों में सेना, नौसेना और वायुसेना के कामकाज में बेहतर तालमेल बिठाना और देश की सैन्य ताक़त को और मज़बूत करना है.
केंद्र सरकार के मुताबिक सीडीएस की ज़िम्मेदारी रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के तौर पर है. सीडीएस के अधीन तीनों सेनाओं के मामले आते हैं.
सीडीएस की डिफ़ेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) और डिफ़ेंस प्लानिंग कमीशन (डीपीसी) जैसे महत्वपूर्ण रक्षा मंत्रालय समूहों में जगह होगी.
जब जनरल बिपिन रावत को सीडीएस के पद पर नियुक्त किया गया था तो वो सेना प्रमुख थे और अपने रिटायरमेंट के क़रीब थे.
सीडीएस के पद पर उनकी नियुक्ति तीन साल के लिए हुई थी और रिटायरमेंट की आयु सीमा बढ़ा कर 65 वर्ष कर दी गई थी.
लिहाज़ा जानकारों की नज़र में सीडीएस पद के लिए आयु सीमा 65 साल की है और कार्यकाल तीन साल का हो सकता है.
नए सीडीएस लेफ़्टिनेंट जनरल अनिल चौहान (रिटायर्ड) फ़िलहाल 61 वर्ष के हैं. अगर उनका कार्यकाल तीन साल का होता है तो वे अगले तीन साल इन तीन ज़िम्मेदारियों को संभालेंगे:-
पहला, सीडीएस की ज़िम्मेदारी.
दूसरा, चेयरमैन, चीफ़ ऑफ़ स्टॉफ़ कमेटी.
तीसरा, सचिव, डीएमए की ज़िम्मेदारी. डीएमए यानी डिपार्टमेंट ऑफ़ मिलिट्री अफ़ेयर्स. ये रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला सैन्य मामलों का विभाग है.
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