साजिद मीर कौन है जिसके लिए चीन ने भारत और अमेरिका की राह में अटकाए रोड़े

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- साजिद मीर अमेरिका और भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट में
- साजिद मीर पर 2008 के मुंबई हमलों के मुख्य साज़िशकर्ता होने का आरोप
- अमेरिका ने 35 करोड़ रुपए का इनाम रखा है
- अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के लिए अमेरिका और भारत लाया था प्रस्ताव
- चीन ने एक बार फिर इस प्रस्ताव का विरोध किया
- विस्तार से पढ़िए कौन है साजिद मीर और भारत क्यों उसे अतंरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाना चाहता है.
- ये लेख पहली बार 19 सिंतबर 2022 को प्रकाशित किया गया था. उस बार भी चीन ने साजिद मीर के लिए वीटो पॉवर का प्रयोग किया था.

संयुक्त राष्ट्र में भारत और चीन एक बार फिर टकराए और मुद्दा था 2008 के मुंबई हमले के मुख्य अभियुक्तों में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के चरमपंथी साजिद मीर को ब्लैकलिस्ट में डालना.
दरअसल, अमेरिका संयुक्त राष्ट्र में साजिद मीर को 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी' घोषित करने का प्रस्ताव लाया था और भारत ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था.
लेकिन चीन ने अपने 'वीटो' पावर का इस्तेमाल करते हुए इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी. प्रस्ताव के तहत मीर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की (1267 अल क़ायदा प्रतिबंध) समिति के अंतर्गत 'अंतरराष्ट्रीय आंतकवादी' घोषित किया जाना था.
भारत और अमेरिका की कोशिश थी कि साजिद मीर की वैश्विक यात्राओं पर प्रतिबंध लगाया जाए और उनकी संपत्ति फ़्रीज़ की जाए. लेकिन ऐसा करने के लिए सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के सभी 15 सदस्यों का सहमत होना ज़रूरी है. पिछले चार महीनों में ये चौथा मौक़ा है जब चीन ने ऐसा क़दम उठाया है. पिछले महीने ही पाकिस्तान के विवादास्पद धार्मिक नेता मौलाना मसूद अज़हर के भाई अबुल रऊफ़ असगर उर्फ़ अब्दुल रऊफ़ अज़हर को संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची में शामिल कराने के लिए अमेरिका और भारत की तरफ़ से प्रस्ताव लाया गया था जिसका चीन ने विरोध किया था.
साजिद मीर भारत की 'मोस्ट वांटेड' सूची में शामिल हैं और अमेरिका ने उन पर 50 लाख डॉलर यानी 35 करोड़ रुपए का इनाम घोषित किया है.
पाकिस्तान के रवैए पर सवाल

इसी साल जून में पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत ने साजिद मीर को टेरर फ़ाइनेंसिंग मामले में 15 साल जेल की सज़ा सुनाई थी और इन दिनों वह पाकिस्तान की जेल में बंद हैं. मीर को लेकर पाकिस्तान के रवैए पर सवाल उठते रहे हैं.
पाकिस्तान के अधिकारियों ने दिसंबर 2021 में यह दावा किया था कि साजिद मीर की मौत हो चुकी है, लेकिन अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने पाकिस्तान की बात पर यक़ीन नहीं किया था और कहा था पाकिस्तान को साजिद मीर की मौत के पुख़्ता सबूत पेश करने चाहिए.
पाकिस्तान ने फिर अचानक 21 अप्रैल 2022 को साजिद मीर को गिरफ़्तार करने का दावा किया और 16 मई 2022 को उन्हें सज़ा सुनाई गई और लाहौर की कोट लखपत जेल भेज दिया गया.

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भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर सीधी प्रतिक्रिया तो नहीं दी थी, लेकिन मीर की सज़ा की टाइमिंग को लेकर सवाल ज़रूर उठाए थे. भारत ने आधिकारिक तौर पर कहा था कि पाकिस्तान की यह कार्रवाई एफ़एटीएफ़ मामले में पश्चिमी देशों की सहानुभूति हासिल करने के इरादे से कई गई है.
पाकिस्तान की कोशिश रही है कि वह पेरिस स्थित फ़ाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) की ग्रे लिस्ट से बाहर आ जाए.
एफ़एटीएफ़ दुनियाभर में मनी लॉन्ड्रिंग यानी हवाला से निपटने के लिए नीति बनाने वाली संस्था है. पिछले साल जून में एफ़एटीएफ़ की प्लैनरी मीटिंग में पाकिस्तान को एक बार फिर ग्रे लिस्ट में बनाए रखने का फ़ैसला किया गया था.
तब एफ़एटीएफ़ के अध्यक्ष मार्कस प्लेयर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था, "पाकिस्तान को जो सुझाव दिए गए थे उनमें उसने काफी प्रगति की है और 27 में से 26 शर्तों को पूरा किया है. लेकिन अभी उसे आतंकवादियों को ज़िम्मेदार ठहराने और उन्हें सज़ा देने की दिशा में काम करना बाक़ी है."
उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान अब भी 'इन्क्रीज़्ड मॉनिटरिंग लिस्ट' में बना रहेगा. 'इन्क्रीज़्ड मॉनिटरिंग लिस्ट' को ही ग्रे लिस्ट कहा जाता है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक़ 'साजिद मीर एफ़बीआई की मोस्ट वांटेड टेररिस्ट सूची में शामिल है. माना जाता है कि वह पाकिस्तानी नागरिक है.'

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अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक मीर साल 2001 से चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ सदस्य है. अमेरिका के मुताबिक़ साल 2006 से 2011 तक मीर की देखरेख में ही लश्कर अपने विदेशी चरमपंथ अभियानों को अंजाम देता था.
आरोप है कि मीर ने ही साल 2008 से 2009 के बीच डेनमार्क के एक अख़बार और उसके कर्मचारियों के ख़िलाफ़ चरमपंथी हमले की साजिश रची थी.
मुंबई हमलों के बाद अमेरिका ने साल 2011 में साजिद मीर को मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की सूची में शामिल किया था.
साजिद मीर उर्फ़ साजिद माजिद

26 नवंबर 2008 की रात समुद्र के रास्ते जो 10 बंदूकधारी मुंबई पर हमला करने आए थे उन्हें फोन पर कराची में लश्कर के एक ठिकाने से गाइड करने वाले तीन लोगों में साजिद माजिद आगे-आगे थे. बंदूकधारियों से बात करने का आइडिया साजिद का ही था.
मुंबई हमलों के अभियुक्त पाकिस्तानी-अमेरिकी डेविड कोलमैन हेडली ने 2011 में अमरीका में शिकागो की एक अदालत में सरकारी गवाह के तौर पर यह बयान दिया था.
हेडली ने मुंबई हमलों की योजना बनाने में लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के शामिल होने के दावा किया था.
इससे पहले हेडली ने अमेरीका की जेल में भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को 2010 में तफ़्सील से बयान दिया था. मुंबई हमलों की जाँच करने वाली इस भारतीय एजेंसी ने हेडली से तीन जून को पूछताछ शुरू की थी जो नौ जून को ख़त्म हुई थी.
साजिद ने यहूदी केंद्र चबाड हाउस पर हमलावरों से बार-बार कहा कि 'महिलाओं को मारो'.

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हेडली के अनुसार, बंदूकधारी अजमल कसाब की गिरफ़्तारी के बाद साजिद ने उसकी रिहाई के लिए चबाड हाउस के यहूदियों को रिहा करने का भी ऑफ़र दिया था.
हेडली और साजिद मीर हमलों की योजना के बनाने से पहले से एक-दूसरे को जानते थे. वो लश्कर का एक अहम कमांडर था. उसने लश्कर की थाईलैंड में एक शाखा भी बनाई थी. हेडली ने साजिद के बारे में बताते हुए कहा था, "वो काफ़ी चालाक था और वो लश्कर में मेरा पहला हैंडलर था."
हमलों के बाद 2009 में हेडली जब पाकिस्तान वापस लौटा, तो साजिद ने बंदूकधारियों से हुई अपनी बातचीत का ऑडियो टेप भी उसे सुनाया था.
मीर ने दिया चरमपंथियों को प्रशिक्षण?

हिंदुस्तान टाइम्स ने ख़ुफ़िया अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि मीर ने कई चरमपंथियों को प्रशिक्षण दिया और कम से कम तीन महाद्वीपों में लश्कर का विस्तार किया और ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों में आतंकी हमले की साज़िश रचने में अहम भूमिका निभाई.
अख़बार ने फ़्रांस के एक पूर्व नौसेना अधिकारी विली ब्रिगिट जो बाद में आतंकवादी संगठनों में शामिल हो गए थे, से हुई जाँच एजेंसियों की पूछताछ का भी हवाला भी अपनी रिपोर्ट में दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिगिट ने बताया था कि मीर के तार अफ़ग़ानिस्तान में अल क़ायदा से भी जुड़े थे और लश्कर के प्रमुख ज़की-उर-रहमान तक उनकी सीधी पहुँच थी.
रिपोर्ट में ख़ुफ़िया अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि मीर ने अप्रैल 2005 में क्रिकेट प्रशंसक के रूप में भारत में इंट्री ली थी. तब मीर ने देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी और दिल्ली स्थित नेशनल डिफ़ेंस कॉलेज की रेकी भी की थी.
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