हरियाणा: अमीर माने जाने वाले राज्य में बढ़ती बेरोज़गारी

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    • Author, अरविंद छाबड़ा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कालका शहर यूं तो हरियाणा राज्य में आता है लेकिन हिमाचल प्रदेश के ख़ूबसूरत पहाड़ों से बिलकुल नज़दीक है. यहीं पर रहती हैं रेखा,जो शादी से पहले हिसार में रहती थीं. रेखा बताती हैं कि उनके पिता क्लर्क थे लेकिन फिर भी बड़ी मेहनत कर उन्होंने अपने सभी चार बच्चों को पढ़ाया लिखाया.

रेखा कहती हैं, "उन्हें बहुत उम्मीद थी कि एक दिन हम कुछ बन जाएंगे. मैंने गणित और विज्ञान में ग्रेजुएशन की और फिर एमएमसी. उन दिनों हमारे इलाके में बहुत कम लड़कियां पढ़ा करती थीं और विज्ञान तो बहुत ही कम. लेकिन इतनी शिद्दत से पढ़ाई करने का कोई फायदा नहीं मिला. पिछले सालों में कई जगह आवेदन किया. एक निजी स्कूल ने चार हज़ार की नौकरी दी जब कि वहां ऑटो से आने-जाने में ही महीने के दो हज़ार रुपये लग जाते थे. सरकार यह कहती है कि अभी कोई पद खाली नहीं है. हालांकि स्कूलों में देखो तो टीचर नज़र नहीं आते."

रेखा को आज भी रोज़गार का इंतज़ार है. फिलहाल थोड़ा बहुत टयूशन कर लेती हैं.

वो कहती हैं, ''नौकरी न मिलने की वजह से पिता से नज़र नहीं मिला पाते. उन्हें क्या समझाएं क्यों नौकरी नहीं मिली. सच तो यह है मैंने बहुत कोशिश की पर कोई पद तो निकले."

रेखा हरियाणा में अकेली नहीं है जिसे अच्छी नौकरी नहीं मिली है. आंकड़ों की मानें तो हरियाणा में बेरोज़गारी बहुत अधिक है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में बेरोज़गारी दर सबसे अधिक यानि 34.5 प्रतिशत है, जिसके बाद राजस्थान और बिहार का स्थान है.

प्रति व्यक्ति आय सबसे अधिक लेकिन बेरोज़गारी कम नहीं

आंकड़ों के मुताबिक़, देश में बेरोज़गारी दर अप्रैल में बढ़कर 7.83 प्रतिशत हो गई, जो मार्च में 7.6 प्रतिशत थी.

हालांकि इन आंकड़ों को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ख़ारिज किया है. सीएम कहते हैं कि हरियाणा में बेरोज़गारी दर केवल आठ फ़ीसदी है.

खट्टर राज्य के कई और आंकड़े भी दिखाते हैं. हरियाणा एक ऐसा राज्य है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय लगभग 2 लाख 74 हज़ार रुपये सालाना है जो देश के प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है.

आर्थिक विकास के मानकों पर हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है. पिछले कई सालों से राज्य की विकास दर लगातार छह फ़ीसदी से अधिक देखी गई है. हरियाणा की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ रेट दस फ़ीसदी है, जो देश में सबसे ज़्यादा है. इसी राज्य के प्रमुख शहर गुरुग्राम में फॉर्च्यून लिस्ट में शामिल दुनिया की कई कंपनियों के ऑफिस हैं.

लेकिन हाल के दिनों में हरियाणा कुछ ऐसी सुर्खियां बटोर रहा है कि यह देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां की बेरोज़गारी दर सबसे अधिक है. बीबीसी ने राज्य के कुछ हिस्सों का दौरा किया और कई लोगों से बात की ताकि ज़मीनी हक़ीक़त का पता लगाया जा सके और यह समझ में आए कि यहां रोज़गार की समस्या क्यों है?

हिसार में हमने बात की यहां के गुरु जंबेश्वर विश्वविद्यालय के इकोनॉमिक्स विभाग के हेड प्रोफ़ेसर नरेंद्र कुमार बिश्नोई से. उन्होंने दावा किया कि सीएमआईई के जो आंकड़ें हैं वो इसलिए हैं क्योंकि उनका तरीका कुछ अलग है.

उन्होंने माना कि बेरोज़गारी की समस्या तो है और वो इसलिए है क्योंकि अवसर राज्य में समान नहीं हैं. जैसे गुरुग्राम में बहुत रोज़गार हैं लेकिन वहां जाना बहुत ज़िलों के लोगों को फायदेमंद नहीं लगता क्योंकि वो अपने घर के आसपास नौकरी ज़्यादा करना पसंद करते हैं. अगर सरकार बाकी ज़िलों जैसे हिसार, रोहतक वगैरह में कुछ अवसर पैदा करे तो इससे फायदा हो सकता है.

रेखा
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हरियाणा में बेरोज़गारी बड़ी समस्या

हाल में सरकारी आंकड़े भी इस ओर इशारा करते हैं कि राज्य में रोज़गार की समस्या काफ़ी है.

केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्यवन मंत्रालय के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण यानि पीएलएफ़एस से पता चलता है कि शहरी हरियाणा में सभी आयु समूहों के लिए बेरोज़गारी दर जनवरी-मार्च तिमाही में बढ़कर 13.5 प्रतिशत हो गई. यह पिछली तिमाही में 11.5 प्रतिशत थी. जम्मू-कश्मीर के 15.6 प्रतिशत के बाद हरियाणा दूसरे स्थान पर था.

सभी आयु समूहों में शहरी पुरुषों में हरियाणा में चौथी तिमाही में देश में सबसे अधिक बेरोज़गारी दर - यानि 13.3 प्रतिशत थी. अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में यह 10.5 प्रतिशत थी. पूरे देश का यह आंकड़ा 7.8 प्रतिशत है.

राज्य के लोग कहते हैं कि आंकड़े सही है या नहीं उन्हें तो इस बात से फर्क पढ़ता है कि उन्हें नौकरी मिली या नहीं.

अंबाला के पंकज भाटिया ने सालों पहले आईटीआई की और फिर पॉलिटेक्निक से मकैनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया. कोई ढंग की नौकरी नहीं मिली तो जहां कहीं जैसी नौकरी मिली करते रहे. उम्मीद थी कि एक दिन सरकारी नौकरी मिल जाएगी. रोज़गार एक्सचेंज में दस साल पहले अपना नाम लिखवाया था लेकिन वहां से भी नौकरी के लिए कोई कॉल नहीं आया. न ही कोई इनके काम की वैकेंसी ही सामने आई. आख़िर सरकारी नौकरी की आयु सीमा समाप्त होते देख अपना एसी रिपेयर का काम शुरू कर दिया. लेकिन आज भी अपने बच्चों के गुज़र-बसर के लिए अपने बुज़ुर्ग पिता की पेंशन पर निर्भर हैं.

वो बताते हैं कि जितना वो कमाते हैं उससे बच्चों की फ़ीस भी देनी मुश्किल है क्योंकि नौकरी भले ही न मिली हो, पर महंगाई तो लगातार बढ़ती ही आई है.

वो कहते हैं, "अगर पिता की पेंशन का सहारा न हो तो गुज़ारा करना मुश्किल है. बहुत शर्म आती है कि 40 की आयु के पार होने पर भी अपने पिता से पैसे लेने पड़ते हैं."

पंकज भाटिया
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हरियाणा सरकार की रोज़गार स्कीम का क्या हाल है?

वैसे ऐसा नहीं है कि सरकार बेरोज़गारी दूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही.

दशकों से युवा नौकरी के लिए रोज़गार कार्यालय पर भी निर्भर रहे हैं क्योंकि पंकज भाटिया ने भी इसका ज़िक्र किया तो हम अंबाला के एंप्लॉयमेंट एक्सचेंज गए. क्या आज भी यहां लोग नौकरी के लिए आते होंगे?

वहां जाकर देखा तो कुछ हैरानी हुई क्योंकि वहां बहुत सारे युवा पहुंचे हुए थे. लेकिन वो लोग राज्य की स्कीम के लिए आए थे जो रोज़गार तलाश कर रहे युवाओं में काफी लोकप्रिय है. यह है सक्षम योजना.

पता चला कि साल 2016 में योग्य युवाओं को 100 घंटे के मानद कार्य के बदले बेरोज़गारी भत्ता और मानदेय प्रदान करने के लिए सरकार ने सक्षम युवा योजना शुरू की थी.

इस योजना के तहत, पोस्ट ग्रेजुएट, ग्रेजुएट और 10+2 पास आवेदकों को क्रमशः 3,000 रुपये, 1500 रुपयेऔर 900 रुपये बेरोज़गारी भत्ते के रूप में दिए जाते हैं. फिर पात्र पंजीकृत आवेदकों को असाइनमेंट के लिए 6,000 रुपये दिए जाते हैं.

यहां अंबाला की ही मनीषा ने बताया कि यहाँ पंजीकृत कराने के कुछ दिन बाद ही उन्हें काम मिल गया था. महीने में 100 घंटे का काम है और कुल 7500 रुपये मिल जाते हैं जिससे वे काफी खुश हैं. लेकिन कुछ अन्य युवाओं ने बताया कि यह सिर्फ तीन साल के लिए ही मिलता है और बाद में इसका उन्हें कोई फायदा भी नहीं मिलता. अगर सरकार इन बातों की तरफ ध्यान दे तो इस योजना का और भी अधिक फायदा मिल सकता है.

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बेरोज़गारी और खुदकुशी का कनेक्शन

कहीं न कहीं बेरोज़गारी और अच्छा रोज़गार न होने का संबंध आत्महत्या से भी है.

हाल में एनसीआरबी ने आत्महत्या को लेकर साल 2021 के आँकड़े जारी किए हैं जिसमें पता चलता है कि लगभग एक चौथाई आत्महत्या करने वाले लोग दिहाड़ी कामगार हैं. हरियाणा का रिकॉर्ड भी कुछ खास अच्छा नहीं है. कुल 3692 लोगों ने आत्महत्या की और राज्य की आत्महत्या करने की दर 12.5 थी जो पड़ोसी पंजाब (8.6) से कहीं अधिक है.

हरियाणा में बेरोज़गारी 20 लोगों के आत्महत्या का कारण बनी जबकि गरीबी की वजह से 76 लोगों ने आत्महत्या की.

जैसे कालका की रहने वाली रेखा कहती हैं कि अच्छा रोज़गार पैसे कमाने के लिए ही ज़रूरी नहीं है बल्कि आत्मसम्मान के लिए भी ज़रूरी है.

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