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एनडीटीवी-अडानी मामले में आया नया ट्विस्ट क्या है
एशिया के सबसे अमीर शख़्स गौतम अडानी के नियंत्रण वाले अडानी ग्रुप ने मीडिया कंपनी एनडीटीवी में परोक्ष रूप से क़रीब 30 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीद लिया है.
अडानी ग्रुप ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज़ (एनएसई) को बताया कि वह एनडीटीवी में 26 फ़ीसदी हिस्सेदारी और ख़रीदने के लिए ओपन ऑफ़र भी लाएगा.
इसका मतलब ये है कि अडानी समूह का इरादा एनडीटीवी में मालिकाना हिस्सेदारी हासिल करने का है. अगर अडानी का ओपन ऑफ़र कामयाब रहा तो एनडीटीवी में उसकी कुल हिस्सेदारी 55 फ़ीसदी से अधिक हो जाएगी.
एनडीटीवी प्रबंधन ने अडानी समूह के इस क़दम पर हैरानी जताई है और कहा है कि उसे इस डील के बारे में कुछ भी पता नहीं था.
मामले में नया ट्विस्ट
अब इस मामले में नया ट्विस्ट आ गया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, गुरुवार को एनडीटीवी ने अडानी समूह के प्रयास को रोकने की कोशिश की है. एनडीटीवी ने इस बारे में रेगुलेटरी पाबंदियों का हवाला देते हुए कहा है कि अडानी ग्रुप की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकती है.
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक़, एनडीटीवी के संस्थापक प्रणॉय रॉय और राधिका रॉय पर साल 2020 से प्रतिभूति (शेयर) बाज़ार में शेयर ख़रीदने और बेचने पर प्रतिबंध लगा हुआ है, इसलिए वे लोग अडानी समूह को उन शेयरों का ट्रांसफ़र नहीं कर सकेंगे जिनके आधार पर अडानी एनडीटीवी का मालिकाना हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
अडानी समूह ने मंगलवार को कहा था कि वो एनडीटीवी को नियंत्रित करने लायक हिस्सा लेने की कोशिश कर रहा है. हालांकि एनडीटीवी ने इस पर कहा था कि ये ''पूरी तरह से अप्रत्याशित'' क़दम है और इस संबंध में कंपनी से कोई बातचीत नहीं हुई है और उसकी सहमति नहीं ली गई है.
एनडीटीवी उन कुछ मीडिया समूहों में शामिल है, जो अक्सर केंद्र सरकार की नीतियों पर आलोचनात्मक रवैया रखती है.
एनडीटीवी ने 2020 के सेबी (सेक्यूरिटिज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया) के जिस ऑर्डर का हवाला दिया है उसके मुताबिक़ सेबी ने 26 नवंबर 2022 तक प्रणॉय और राधिका रॉय को भारतीय शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करने से रोक दिया है.
सेबी ने ये कार्रवाई एक जाँच में ये पाए जाने के बाद की कि रॉय दंपत्ति ने संदिग्ध इनसाइडर ट्रेडिंग के ज़रिए एनडीटीवी के शेयर में ग़लत तरीक़े से मुनाफ़ा कमाया था.
एक भारतीय लॉ फ़र्म पायोनियर लीगल की पार्टनर प्रिथा झा ने रॉयटर्स को बताया, ''ऐसा लगता है कि एनडीटीवी की तरफ़ से इस पूरी प्रक्रिया को रोकने या धीमी करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि कंपनी पर अधिग्रहण की आगे बढ़ती कार्रवाई को कंपनी रोक पाएगी, थोड़ी देर भले ही हो करवा पाए.''
इस बीच गुरुवार को एनडीटीवी के शेयर में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद अपर सर्किट लग गया.
विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड का पेच
इस पूरे प्रकरण के केंद्र में एक कम जानी-पहचानी कंपनी विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (वीसीपीएल) है जिसे 2008 में बनाया गया था.
प्रणॉय और राधिका रॉय ने 2008-09 में आरआरपीआर (राधिका रॉय प्रणॉय रॉय) होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिए वीसीपीएल से चार अरब रुपए का क़र्ज़ लिया था.
इस क़र्ज़ के बदले वीसीपीएल को 29.18 फ़ीसदी रेहन में दिए गए थे. साथ ही ये विकल्प भी दिया गया था कि क़र्ज़ न चुका पाने की स्थिति में वे इन वाउचर्स का 99.5 फ़ीसदी हिस्सा इक्विटी में बदल सकते हैं.
ये क़र्ज़ 10 साल के लिए लिया गया था और इसकी अवधि 2019 में ख़त्म हो गई थी. लेकिन आरआरपीआर ने लिया गया क़र्ज़ नहीं चुकाया था.
किसके पास कितनी हिस्सेदारी
एनडीटीवी के प्रमोटर्स प्रणॉय रॉय के नाम कंपनी में 15.94 फ़ीसदी हिस्सेदारी है, जबकि उनकी पत्नी और राधिका रॉय का कंपनी में 16.32 फ़ीसदी हिस्सा है. प्रणॉय और राधिका ही आरआरपीआर के प्रोमोटर्स थे, इस कंपनी के पास एनडीटीवी के 29.18 फ़ीसदी शेयर थे.
रीटेल निवेशकों के पास कंपनी के 12.57 फ़ीसदी शेयर हैं, कॉर्पोरेट संस्थाओं के पास एनडीटीवी का 9.61 फ़ीसदी हिस्सा है, जबकि फ़ॉरेन पोर्टफ़ोलियो इन्वेस्टर्स यानी एफ़पीआई के पास 14.7 फ़ीसदी शेयर हैं. अन्य के पास कंपनी की 1.67 फ़ीसदी हिस्सेदारी है.
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