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एनडीटीवी में अडानी की एंट्री: कैसे, क्यों, कब - जानिए सब कुछ
- Author, दिनेश उप्रेती
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
एशिया के सबसे रईस शख़्स गौतम अडानी के नियंत्रण वाले अडानी ग्रुप ने मीडिया कंपनी एनडीटीवी में अप्रत्यक्ष रूप से 29.18 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीद लिया है.
कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज़, एनएसई को बताया है कि वह एनडीटीवी में 26 फ़ीसदी और हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए ओपन ऑफ़र भी लाएगी. यानी कुल मिलाकर अडानी समूह का इरादा एनडीटीवी में मालिकाना हिस्सेदारी हासिल करने का है. अगर अडानी का ओपन ऑफ़र कामयाब रहा तो एनडीटीवी में उसकी कुल हिस्सेदारी 55 फ़ीसदी से अधिक हो जाएगी.
हालाँकि एनडीटीवी प्रबंधन ने अडानी समूह के इस क़दम पर हैरानी जताई है और कहा है कि उसे इस डील के बारे में कुछ भी पता नहीं था.
कैसे हुई अडानी की एंट्री?
अडानी ने जिस तरह से एक अनजान सी कंपनी के ज़रिये एनडीटीवी में हिस्सा ख़रीदा उसे जानकार 'होस्टाइल टेकओवर' यानी प्रबंधन की इच्छा के विरुद्ध कंपनी पर क़ब्ज़े की कोशिश मान रहे हैं.
दरअसल, मंगलवार को अडानी ग्रुप ने एक्सचेंज को बताया कि उसने विश्वप्रधान कॉमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड यानी वीसीपीएल को ख़रीद लिया है. अडानी ने 100 फ़ीसदी हिस्सा तक़रीबन 114 करोड़ रुपये में ख़रीदा.
मीडिया और कंसल्टेंसी कारोबार में दखल रखने वाली वीसीपीएल का लेखा-जोखा खंगालने पर पता चला कि वीपीसीएल के पास एनडीटीवी की एक प्रमोटर ग्रुप कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के 29.18 फ़ीसदी इक्विटी शेयर गिरवी थे.
एनडीटीवी ने शेयर क्यों रखे गिरवी?
दरअसल, प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय एनडीटीवी के संस्थापक और प्रोमोटर्स हैं. साल 2008-09 में उन्होंने आरआरपीआर (राधिका रॉय प्रणॉय रॉय) होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिये वीसीपीएल से क़र्ज़ लिया था.
इस क़र्ज़ के बदले वीसीपीएल को 29.18 फ़ीसदी रेहन में दिए गए थे. साथ ही ये विकल्प भी दिया गया था कि क़र्ज़ न चुका पाने की स्थिति में वे इन वाउचर्स का 99.5 फ़ीसदी हिस्सा इक्विटी में बदल सकते हैं.
ये क़र्ज़ 10 साल के लिए लिया गया था और इसकी अवधि 2019 में ख़त्म हो गई थी. लेकिन आरआरपीआर ने लिया गया क़र्ज़ नहीं चुकाया था.
अडानी का मालिकाना हक़ पाने का इरादा
वीसीपीएल के ज़रिये एनडीटीवी में 29 फ़ीसदी से अधिक हिस्सा लेने के बाद गौतम अडानी ने ये बताने में जरा भी देर नहीं की कि वो एनडीटीवी में मालिकाना हक हासिल करने का इरादा रखते हैं. एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक़, अडानी समूह एनडीटीवी में 26 फ़ीसदी हिस्सेदारी और ख़रीदेगा. यानी कुल मिलाकर उसका लक्ष्य एनडीटीवी में 55 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीदना है.
अडानी समूह ये 26 फ़ीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी ओपन ऑफ़र के ज़रिये खरीदेगा. समूह की तीन कंपनियां एएमएनएल और अडानी एंटरप्राइजेज़ लिमिटेड ओपन ऑफ़र में हिस्सा ख़रीदेंगी. ये ओपन ऑफ़र 294 रुपये प्रति शेयर के भाव पर होगा, जो कि शेयर की मौजूदा क़ीमत से क़रीब 20 फ़ीसदी कम है.
मंगलवार को एनडीटीवी का शेयर 366 रुपये पर बंद हुआ था. यानी 26 फ़ीसदी की अतिरिक्त हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए अडानी समूह 493 करोड़ रुपये ख़र्च करेगा.
क्या होता है ओपन ऑफ़र?
शेयर बाज़ार की नियामक संस्था सेबी के नियमों के मुताबिक़, देश में लिस्टेड किसी भी कंपनी जिसके पास 25 फ़ीसदी या उससे ज़्यादा शेयर हैं उसे और हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए ओपन ऑफ़र लाना अनिवार्य होता है जिससे कंपनी के माइनॉरिटी शेयर होल्डर पहले से तय क़ीमत पर अपने शेयर अपनी मर्ज़ी से नए निवेशक को बेच सकें.
एनडीटीवी की क्या है आपत्ति?
एनडीटीवी ने एक्सचेंज को बताया कि वीसीपीएल ने इस संबंध में उसे कोई जानकारी नहीं दी.
एनडीटीवी ने बताया, "एनडीटीवी के संस्थापक और कंपनी ये स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि वीसीपीएल ने क़र्ज़ को इक्विटी में बदलने के अधिकार का इस्तेमाल हमसे बातचीत और हमारी सहमति के बिना लिया गया है. हमें इस क़दम की जानकारी आज ही मिली है. हमने कल ही एक्सचेंज को बताया था कि संस्थापकों की हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं है."
कंपनी का यह भी कहना है कि वो आगे की प्रक्रिया पर जानकारी जुटा रही है और उसमें क़ानूनी या रेगुलेटरी विकल्प भी शामिल हो सकते हैं.
अब किसके पास कितनी हिस्सेदारी?
एनडीटीवी के प्रमोटर्स प्रणॉय रॉय के नाम कंपनी में 15.94 फ़ीसदी हिस्सेदारी है, जबकि उनकी पत्नी और राधिका रॉय का कंपनी में 16.32 फ़ीसदी हिस्सा है. प्रणॉय और राधिका ही आरआरपीआर के प्रोमोटर्स थे, इस कंपनी के पास एनडीटीवी के 29.18 फ़ीसदी शेयर थे.
रीटेल निवेशकों के पास कंपनी के 12.57 फ़ीसदी शेयर हैं, कॉर्पोरेट संस्थाओं के पास एनडीटीवी का 9.61 फ़ीसदी हिस्सा है, जबकि फ़ॉरेन पोर्टफ़ोलियो इन्वेस्टर्स यानी एफ़पीआई के पास 14.7 फ़ीसदी शेयर हैं. अन्य के पास कंपनी की 1.67 फ़ीसदी हिस्सेदारी है.
क्या रिलायंस से जुड़े हैं डील के तार?
कुछ मीडिया ख़बरों के मुताबिक़, अडानी समूह ने वीसीपीएल नाम की जिस कंपनी के ज़रिए एनडीटीवी की हिस्सेदारी लेने का फ़ैसला किया है, वो पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज यानी अंबानी घराने से जुड़ी हुई थी.
अडानी का फैलता कारोबार
एग्री ट्रेडिंग और पोर्ट्स से अपना कारोबार शुरू करने वाले गौतम अडानी इस साल सबसे अधिक संपत्ति अर्जित करने वाले अरबपतियों में शीर्ष पर हैं. पिछले कुछ सालों में अडानी ने अपने कारोबार का तेज़ी से विस्तार किया है और एयरपोर्ट, डेटा सेंटर, सीमेंट से लेकर बिजली, कोयला और गैस ट्रेडिंग के अलावा खाद्य तेल कारोबार में भी अपनी पैठ बनाई है.
अडानी समूह ने इसी साल मार्च में डिजिटल बिज़नेस न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म क्विंटिलियन बिज़नेस मीडिया में 49 फ़ीसद हिस्सा ख़रीदा था. पिछले साल सितंबर में भी अडानी समूह के एनडीटीवी को ख़रीदने की अफ़वाहें तेज़ी से उड़ी थी और एनडीटीवी के शेयरों में कई दिनों तक उछाल रहा था.
क्या एनडीटीवी पर जोर-जबदस्ती से कब्जा करने की कोशिश हो रही है?
पूर्व अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील के सी कौशिक ने बीबीसी से कहा कि ऐसी स्थिति में कंपीटिशन कमीशन ऑफ इंडिया यानी सीसीआई अडाणी ग्रुप को नोटिस भेज कर उसके इस कदम का औचित्य पूछ सकता है.
एनडीटीवी के पास भी यह अधिकार है वह अपने कंपनी एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के तहत अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हाई कोर्ट या कंपनी लॉ बोर्ड या दोनों में अपील करे.
उन्होंने कहा कि एनडीटीवी और इस ग्रुप की दूसरी कंपनियां कंपनी लॉ बोर्ड और सेबी में भी जा कर इस टेकओवर को चुनौती दी सकती हैं.
कौशिक ने कहा कि अडाणी समूह की ओर से एनडीटीवी की हिस्सेदारी खरीदना होस्टाइल टेकओवर की कोशिश है. इससे सीसीआई या ऐसे ही किसी सक्षम प्राधिकरण या फिर कोर्ट में निश्चित तौर पर चुनौती दी जाएगी.
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