आगरा में क्यों रद्द हुआ बुकर से सम्मानित गीतांजलि श्री का अभिनंदन समारोह? क्या है पूरा मामला

इमेज स्रोत, PA Media
अपने उपन्यास 'रेत समाधि' के लिए अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखिका गीतांजलि श्री को सम्मानित करने के लिए आगरा में आयोजित कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है.
कार्यक्रम शनिवार को होना था लेकिन हाथरस के संदीप पाठक ने सादाबाद कोतवाली में गीतांजलि श्री के खिलाफ दर्ज अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उन्होंने अपने उपन्यास 'रेत समाधि' में शिव पार्वती पर अपमानजनक टिप्पणी की है.
इस विवाद के बाद उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया. इससे गीतांजलि श्री के प्रशंसक खासे मायूस हैं. बुकर से सम्मानित हिंदी की पहली लेखिका के साथ इस बर्ताव की काफी आलोचना हो रही है.
आगरा में गीतांजलि श्री को सम्मानित करने के लिए दो सांस्कृतिक संगठन 'रंगलीला' और आगरा थियेटर क्लब ने शनिवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया था.
'रंगलीला' के पदाधिकारी अनिल शुक्ला ने बीबीसी संवाददाता शुभज्योति घोष से कहा, "संदीप पाठक की ओर से लेखिका के खिलाफ पहले थाने में शिकायत दर्ज कराने और फिर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ, मंत्री ब्रजेश और यूपी पुलिस के डीजीपी को टैग करके ट्वीट करने के बाद गीतांजलि श्री दुखी हो गईं और कुछ समय तक न निकलने का फैसला लिया. जब उन्होंने हमें अपने इस फैसले को बताया तो स्वाभाविक तौर पर हम लोगों को इस कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा."
'विवाद से गीतांजलि श्री दुखी और निराश'
अनिल शुक्ला कहते हैं, "इस कार्यक्रम को आयोजित करने में आगरा के छात्र, प्रोफेसर और कई प्रबुद्ध लोग लगे थे. उन्हें कार्यक्रम रद्द करने से बड़ी मायूसी हुई. फिर हमने नागरी प्रचारिणी सभा में एक कार्यक्रम आयोजित कर गीतांजलि श्री की कहानी 'प्राइवेट लाइफ' का मंचन किया. इस तरह हमने उनके साथ हुए इस बर्ताव के खिलाफ विरोध जताया."
अनिल शुक्ला ने कहा, "संदीप पाठक की शिकायत पर पुलिस ने अभी कोई कार्रवाई नहीं की है. सादाबाद पुलिस का कहना है कि वह उपन्यास पढ़ने के बाद ही वो कोई कदम उठाएगी. लेकिन इस बीच शिकायत करने वाले ट्वीट कर-कर के तूफान मचा दिया. जबकि उपन्यास में ऐसा कुछ नहीं है जिस पर आपत्ति की जाए. इसमें एक पौराणिक घटना का जिक्र भर किया गया है. लेकिन इस विवाद से गीतांजलि श्री काफी दुखी और निराश हो गईं. उन्होंने हमसे कहा कि वह अभी कहीं नहीं जाएंगी."

इमेज स्रोत, Getty Images
गीतांजलि श्री के प्रशंसकों को गुस्सा क्यों आ रहा है?
गीतांजलि श्री के अभिनंदन समारोह के रद्द होने से उनके प्रशंसक क्षुब्ध हैं. उनका मानना है कि हिंदी की पहली बुकर पुरस्कार विजेता होने के नाते गीतांजलि श्री को सत्ता प्रतिष्ठान से जो सम्मान मिलना था वो नहीं मिला. राजनीतिक नेताओं और यहां तक कि पीएम ने भी उनकी अनदेखी की.
वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने बीबीसी संवाददाता शुभज्योति घोष से कहा, "हिंदी में कहावत है, चेहरा देख कर टीका लगाना. अगर कोई व्यक्ति हमारी विचारधारा में फिट नहीं बैठता तो हम उसका सम्मान नहीं करेंगे. ये जाति के आधार पर किए जाने वाले भेदभाव की तरह है."
गीतांजलि श्री की अनदेखी करने वालों के बारे में ओम थानवी ने कहा, "इन लोगों ने उनका बैकग्राउंड देख लिया. ये जेएनयू वाली हैं. बाकी इन्होंने साहित्य तो पढ़ा नहीं है. हमारे यहां किसी खेल में पुरस्कार जीतने वालों को प्रधानमंत्री सम्मानित करते हैं लेकिन हिंदी की किसी लेखिका ने पहली बार बुकर जीता और उन्होंने बधाई तक नहीं दी."
थानवी कहते हैं, "पीएम कहते हैं कि मैं कविता लिखता हूं. लेकिन उन्हें साहित्य की समझ नहीं है. वरना ऐसा नहीं हो सकता था कि किसी को भारत में बुकर मिला हो और वो बधाई तक नहीं देते. हमारे यहां राजनीतिक सत्ता में बैठे लोग साहित्य के मामले में निरक्षर हैं."

इमेज स्रोत, Getty Images
उपन्यास में शिव-पार्वती पर कथित अपमानजनक टिप्पणी के सवाल पर थानवी कहते हैं, "देखिये, अगर कोई साहित्यिक कर्म है तो उसमें आजादी लेने की छूट मिलती है. क्योंकि आप कुछ रच रहे होते हैं."
वह कहते हैं, "साहित्य को आप अखबार की तरह नहीं पढ़ सकते. इसे राजनीतिक बयान की तरह नहीं देख सकते. अगर शिव-पार्वती के बारे में किसी लेखक ने किसी मनोवैज्ञानिक अवधारणा को विकसित करते हुए कुछ लिखा है तो वह कमेंट नहीं है. ये कमेंट नहीं है ये क्रिएटिविटी है. इसलिए जब ऐसे मामलों में कमेंट करने की शिकायत की जाती है तो मैं कहता हूं कि ऐसे लोग साहित्य के मामले में अज्ञानी हैं."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
शिकायत करने वाले शख्स ने क्या कहा था?
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक गीतांजलि श्री के अभिनंदन समारोह के आयोजक के प्रवक्ता रामभारत उपाध्याय ने कहा, "संदीप पाठक ने अपनी शिकायत में कहा है कि लेखिका के उपन्यास 'रेत समाधि' में शिव-पार्वती पर की गई टिप्पणियों से हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं."
संदीप पाठक ने गीतांजलि श्री के उपन्यास के खिलाफ हाथरस के सादाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. लेकिन जब इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो वो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, मंत्री ब्रजेश पाठक और यूपी डीआईजी को टैग करके शिकायत कर कार्रवाई की मांग करने लगे.
लेकिन इससे गीतांजलि श्री आहत हो गईं और उन्होंने आगरा में होने वाले अपने अभिनंदन समारोह में हिस्सा लेने से परहेज किया. लिहाजा कार्यक्रम रद्द करना पड़ा.

इमेज स्रोत, GEETANJALI SHREE
गीतांजलि श्री के नाम कई और प्रतिष्ठत पुरस्कार
इस साल मई में गीतांजलि श्री के उपन्यास 'रेत समाधि' के अंग्रेजी अनुवाद 'टॉम्ब ऑफ सैंड' को इंटरनेशनल बुकर प्राइज के लिए चुना गया था. अंग्रेजी में ये अनुवाद अमेरिकी अनुवादक डेजी रॉकवेल ने किया था.
इंटरनेशनल बुकर प्राइज़ देने वाली संस्था ने कहा है कि "टॉम्ब ऑफ़ सैंड' इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार जीतने वाली किसी भी भारतीय भाषा में मूल रूप से लिखी गई पहली किताब है. और हिंदी से अनुवादित पहला उपन्यास. टॉम्ब ऑफ़ सैंड उत्तर भारत की कहानी है जो एक 80 वर्षीय महिला के जीवन पर आधारित है. ये किताब ऑरिजिनल होने के साथ-साथ धर्म, देशों और जेंडर की सरहदों के विनाशकारी असर पर टिप्पणी है."

इमेज स्रोत, RAJKAMAL PRAKASHAN
गीतांजलि श्री पिछले तीन दशक से लेखन की दुनिया में सक्रिय हैं. उनका पहला उपन्यास 'माई' और फिर 'हमारा शहर उस बरस' 1990 के दशक में प्रकाशित हुए थे. फिर 'तिरोहित' आया और फिर आया 'खाली जगह'. उनकी रचनाओं के अनुवाद भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन सहित कई भाषाओं में हो चुके हैं. गीतांजलि श्री के उपन्यास 'माई' का अंग्रेजी अनुवाद 'क्रॉसवर्ड अवॉर्ड' के लिए भी नामित हुआ था.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

















