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कर्नाटक: 'हिंदू कार्यकर्ताओं' ने मुस्लिम परिवार पर आधारित नाटक रोका
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक के शिवमोगा ज़िले में कथित बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने एक कन्नड़ नाटक को इसलिए रोक दिया क्योंकि ये एक मुसलमान परिवार की दर्दनाक कहानी पर आधारित था.
इस नाटक को जाने-माने गीतकार जयंत कइकिनी ने लिखा है, जो जोसफ़ स्टेन की प्रसिद्ध ब्रॉडवे म्यूजिकल से ब्लॉकबस्टर बनी फ़िल्म 'फ़िडलर ऑन द रूफ़' का रूपांतरण है.
मूल फ़िल्म एक यहूदी परिवार पर केंद्रित है, हालांकि नाट्य रूपांतरण में इसे मुस्लिम परिवार की कहानी बना दिया गया.
इस नाटक में पुलिस अधिकारी के किरदार में दिखे थियेटर कलाकार कोत्रापा हिरेमागड़ी ने बीबीसी हिंदी से कहा, "उनका विरोध इस बात पर था कि, "यह नाटक मुसलमान परिवार पर ही केंद्रित क्यों है?"
कोत्रापा ने कहा, "मैं इसमें पुलिस का किरदार निभा रहा था. मैं आख़िरी तीन अहम सीन के लिए तैयार हो रहा था और मूंछें लगा रहा था उस दौरान एक आयोजक की तरफ़ से मुझे लगातार कॉल्स आ रही थीं, मैंने उनसे कहा कि मैं उनसे नाटक ख़त्म होने के बाद बात करूंगा. मैं मंच पर जाने ही वाला था कि कुछ लोग स्टेज पर चढ़ कर नारेबाज़ी करने लगे."
कोत्रापा ने बताया, "मंच पर लड़की के पिता उसे विदा कर रहे थे और दर्शक इस सीन को देखकर रुआंसे हो रहे थे कि कुछ लोग स्टेज पर चढ़ कर 'भारत माता की जय' के नारे लगाने लगे. उन्होंने हम में से किसी की बात सुनने से इनकार कर दिया."
शुरू में जो कलाकार मंच पर किरदार निभा रहे थे उन्हें यह नहीं समझ आया कि ये विरोध करने वाले कौन थे.
कोत्रप्पा बताते हैं कि, "जब ये नाटक रोक दिया गया और दर्शकों को लौटने के लिए कहा गया तो हमें पता चला कि ये विरोध मुसलमान परिवार पर आधारित होने की वजह से हुआ. हमें बताया गया कि विरोध करने वाले बजरंग दल के थे"
ये कहानी बेकरी में काम करने वाले एक मज़दूर बड़े मियां पर आधारित थी, जिनकी तीन बेटियां थीं.
क्या है पूरा मामला?
नाटक का मंचन बीते कुछ दशकों में कर्नाटक के कई हिस्सों में हुआ है. 16 जून को इसका मंचन शिवमोगा क़स्बे में हुआ. इसे देखने के लिए क़रीब 800 लोग जुटे.
कोत्रापा कहते हैं, "तीन जुलाई को अन्नावट्टी के सोराबा तालुका में इसका मंचन हुआ. और दर्शकों के जाने के बाद वहाँ पुलिस पहुँची. हम नहीं चाहते कि शिकायत हो. इससे क्या फ़ायदा होगा? इससे तो तनाव ही बढ़ेगा."
लेकिन शिवमोगा के रंगकर्मियों और कलाकारों ने ज़िलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से औपचारिक शिकायत करने का निर्णय किया है.
रंगकर्मी सस्वेहल्ली सतीश ने बीबीसी हिंदी को बताया, "बैठक में फ़ैसला किया गया है कि अनावती में एक बार फिर सभी रंगकर्मियों की मौजूदगी में नाटक का मंचन किया जाए."
सतीश दावा करते हैं कि बजरंग दल के कार्यकर्ता श्रीधर अचार इस नाटक को रोकने के ज़िम्मेदार हैं.
लेकिन श्रीधर अचार ने इस आरोप का खंडन करते हुए बीबीसी से कहा, "मैं वहीं था. हमने कुछ नहीं किया. हमने नाटक देखा और हम चले गए. और भी किसी व्यक्ति ने नाटक रोकने का प्रयास नहीं किया. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मेरा नाम इससे क्यों जोड़ा जा रहा है. मैं किसी हिंदू संस्था का सदस्य नहीं हूँ. हालांकि मेरी उनसे दोस्ती है."
पुलिस ने भी ये नहीं कहा कि नाटक रुकवाने के लिए कौन ज़िम्मेदार है.
शिवमोगा के एसपी बीएम लक्ष्मी प्रसाद ने बीबीसी हिंदी को बताया, "ये एक इंडोर और प्राइवेट फ़ंक्शन था जिसके लिए किसी अनुमति की ज़रूरत नहीं है. आयोजकों की ओर से भी कोई शिकायत नहीं मिली है. हमें लोगों ने बताया कि उस जगह पर कुछ झगड़ा हो रहा है लेकिन जब तक पुलिस वहाँ पहुँची, हॉल लगभग ख़ाली था."
हाल ही में शिवमोगा ज़िले में एक हिंदू कार्यकर्ता की हत्या हो गई थी. उसके बाद शहर में प्रदर्शन हुए थे. इन प्रदर्शनों की अगुवाई कर्नाटक की बीजेपी सरकार के उस समय के मंत्री केएस ईशवरप्पा ने की थी.
इसी ज़िले में कई मुस्लिम लड़कियों ने बिना बुर्के के इम्तिहान देने से इनकार कर दिया था.
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