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मणिपुर भूस्खलन: वो जगह जो बन गई 18 लोगों की कब्रगाह
- Author, सलमान रावी के साथ मनीष जालुई
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मणिपुर से
मणिपुर सरकार के अधिकारियों का कहना है कि जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है वैसे वैसे नोने ज़िले में हुए भूस्खलन के बाद मलबे के ढेर के नीचे फंसे हुए लोगों के ज़िंदा बचने की संभावनाएं कम होती जा रही हैं.
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव एस एम ख़ान ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि गीली मिटटी की वजह से ज़िंदा होने की संभावनाएं कम हो गई हैं. वो कहते हैं कि अगर मलबा सूखा होता तो उसमे एयर पॉकेट बनने की संभावना थी.
आज मलबे के ढेर से राहत और बचाव दल के कर्मियों ने कुल 10 शव बरामद किए हैं जिसमे ज़्यादातर टेर्रीटोरियल आर्मी के जवान ही थे.
इसी के साथ अब तक कुल 18 शव बरामद किए जा चुके हैं. जबकि 18 घायल लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. घायलों में पांच लोग रेलवे कर्मचारी और मज़दूर हैं.
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने घटनास्थल पर बीबीसी से बात करते हुए कहा कि मलबे की मिट्टी कीचड नुमा है इसलिए बड़ी मशीनें राहत कार्य में कारगर साबित नहीं हो पा रहीं हैं.
आज बारिश नहीं हुई तो राहत और बचाव का काम तेज़ी से संभव हो सका, लेकिन चिंता की बात ये है कि कल और अगले 24 घंटों में बेहद तेज़ बारिश की भविष्यवाणी की गई है. अगर ऐसा होता है तो बचाव कार्य पूरी तरह ठप्प पढ़ जाएगा.
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि मलबे में लोगों को ढूंढने के लिए विदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसकी क्षमता 20 मीटर की है. मगर तेज़ बारिश की सूरत में ये तकनीक कितनी कारगर होगी ये बताया नहीं जा सकता है.
50 से ज़्यादा लोगों के लापता होने की बात अधिकारी स्वीकार तो कर रहे हैं लेकिन स्थानीय लोगों को अंदेशा है कि रेल की इस परियोजना में बाहरी मज़दूर भी काम कर रहे थे जिनके न तो नाम उपलब्ध हैं न दस्तावेज़.
इस लिए लोगों को ये भी अंदेशा है कि लापता लोगों की संख्या जो प्रशासन बता रहा है उससे कहीं ज़्यादा इनकी तादात हो सकती है.
जानकारी के मुताबिक जिरीबाम को इंफाल से जोड़ने के लिए एक रेलवे लाइन का निर्माण हो रहा था जिसकी सुरक्षा के लिए टेरिटोरियल आर्मी के जवानों को तैनात किया गया था. बुधवार रात को वहां पर भारी भूस्खलन हुआ जिसमें कई जवान दब गए.
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