You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, उदयपुर की घटना के लिए बताया 'ज़िम्मेदार'
- Author, सुचित्र मोहंती
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को कड़ी फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा की ही अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए कहा है कि शर्मा के बयान ने पूरे देश में अशांति फैला दी.
बीजेपी से निलंबित नूपुर शर्मा ने पैग़ंबर विवाद में उनके ख़िलाफ़ देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज हुई सभी एफ़आईआर को दिल्ली शिफ़्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दी थी.
उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय ने नूपुर शर्मा के बयानों को उदयपुर में हुई दुर्भाग्यपूर्ण वारदात के लिए 'ज़िम्मेदार' बताया.
न्यायाधीश सूर्यकांत और जेबी परदीवाला की अवकाशकालीन बेंच ने शर्मा की अर्ज़ी पर विचार करने से इनकार करते हुए उन्हें हाई कोर्ट जाने को कहा है. इसके बाद नूपुर शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय से अपनी अर्ज़ी वापस ले ली.
नूपुर शर्मा ने पिछले महीने एक टीवी डिबेट के दौरान पैग़ंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी की थी, जिसके विरोध में देश के कई राज्यों में उनके ख़िलाफ़ लगभग एक दर्जन एफ़आईआर दर्ज कराई गई थीं.
इस बयान के विरोध में दर्जन भर से अधिक मुस्लिम देश आ गए थे और भारत सरकार के समक्ष आधिकारिक तौर पर विरोध दर्ज कराया था.
हालाँकि, बाद में भारत सरकार ने कहा था कि ये कुछ 'फ़्रिंज एलिमेंट' की ओर से दिए गए बयान हैं और ये भारत सरकार के विचारों को नहीं दर्शाते.
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान नूपुर शर्मा की टिप्पणियों को "तकलीफ़देह" बताया और कहा- "उनको ऐसा बयान देने की क्या ज़रूरत थी?"
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये भी सवाल किया कि एक टीवी चैनल का एजेंडा चलाने के अलावा ऐसे मामले पर डिबेट करने का क्या मक़सद था, जो पहले ही न्यायालय के अधीन है.
सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा की बयानबाज़ी पर सवाल किया और कहा, "अगर आप एक पार्टी की प्रवक्ता हैं, तो आपके पास इस तरह के बयान देने का लाइसेंस नहीं है."
नूपुर शर्मा की ओर से पेश हुए सीनियर वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अपने बयान को तत्काल वापस ले लिया है और इसके लिए माफ़ी भी मांगी है.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इससे नाख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि उन्हें टीवी पर जाकर पूरे देश से माफ़ी मांगनी चाहिए थी.
सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के वकील से कहा, "उन्होंने बहुत देर कर दी और बयान को भी सशर्त वापस लिया. उन्होंने (नूपुर) कहा कि अगर किसी की भावनाएं आहत हुई तो वो माफ़ी मांगती हैं."
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "जिस तरह से नूपुर शर्मा ने देशभर में भावनाओं को उकसाया, वैसे में ये देश में जो भी हो रहा है उसके लिए वो अकेली ज़िम्मेदार हैं."
सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दायर करने पर भी नाख़ुशी जताते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा, "ये याचिका उनके अहंकार को दिखाती है, ऐसा लगता है कि देश के मजिस्ट्रेट उनके लिए बहुत छोटे हैं."
अदालत ने नूपुर शर्मा के वकील से ये भी कहा, "जब आपके ख़िलाफ़ एफ़आईआर हो और आपको गिरफ़्तार नहीं किया जाए, तो ये आपकी पहुँच को दिखाता है. उन्हें लगता है उनके पीछे लोग हैं और वो ग़ैर-ज़िम्मेदार बयान देती रहती हैं."
नूपुर शर्मा के वकील ने अदालत से अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति माँगी और साथ ही भरोसा दिया कि "नूपुर कहीं नहीं जाएंगी और जो एजेंसी जब भी जांच के लिए बुलाएगी, वो पूरा सहयोग करेंगी."
क्या है पूरा मामला
बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने एक टीवी डिबेट के दौरान पैगंबर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.
इस मामले पर विवाद होने के बाद नूपुर शर्मा ने माफ़ी मांगी और अपना बयान वापस लिया था. उन्होंने खुद को धमकियां मिलने की बात भी की थी.
लेकिन विवाद यहीं नहीं रुका और इस मामले की आंच इस्लामिक देशों तक पहुंच गई और 12 से अधिक देशों ने नूपुर शर्मा के बयान पर आपत्ति जताई थी. कतर ने इस बयान के लिए भारत से माफ़ी मांगने के लिए भी कहा था.
इनके अलावा मुस्लिम देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन यानी ओआईसी ने भी नाराज़गी प्रकट की थी.
इसके बाद बीजेपी ने नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया. उनके साथ-साथ पार्टी के दिल्ली मीडिया यूनिट के प्रभारी नवीन कुमार जिंदल को नूपुर शर्मा के बयान वाले पोस्ट को ट्वीट करने के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया.
बीजेपी ने एक बयान जारी करते हुए कहा था, "पार्टी ऐसी किसी भी विचारधारा के बिल्कुल ख़िलाफ़ है, जो किसी संप्रदाय या धर्म का अपमान करती है." साथ ही बीजेपी ने लिखा, "वह सभी धर्मों का आदर करती है और किसी भी धार्मिक महापुरुष के किसी अपमान की पुरज़ोर निंदा करती है."
दूसरी तरफ इस्लामिक देशों की नाराज़गी कम करने के लिए भारतीय कूटनीतिज्ञों ने कहा है कि ये बयान भारत सरकार की विचारधारा को प्रदर्शित नहीं करते और ये कुछ "फ्रिंज एलिमेंट्स" यानी कुछ शरारती तत्वों की विचारधारा है.
इसके बाद 10 जून जुमे की नमाज के दौरान कई जगहों पर नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की मांग को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन भी हुए. रांची में पुलिस की फायरिंग में कुछ मौते भी हुईं.
पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में नूपुर शर्मा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई. उन्हें समन देकर पेशी के लिए बुलाया भी गया था लेकिन नूपुर शर्मा ने इसके लिए और समय मांगा.
अब नूपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफ़आईआर को दिल्ली शिफ़्ट करने की अर्जी दायर की थी.
नूपुर शर्मा के बयान के पक्ष में सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने को लेकर राजस्थान के उदयपुर में मंगलवार को दो लोगों ने एक दर्जी कन्हैया लाल की गला रेतकर हत्या कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने टिप्पणी में इसी मामले का जिक्र किया है.
दोनों अभियुक्तों ने वीडियो बनाकर हत्या की ज़िम्मेदारी भी ली है. उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है और एनआईए इस घटना के चरमपंथी गुटों से संबंधों को लेकर जांच कर रही है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)