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अमित शाह ने बताया गुजरात दंगों पर पीएम मोदी क्यों चुप रहे
केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी नेता अमित शाह ने एक ख़ास इंटरव्यू में साल 2002 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों पर विस्तार से अपनी बात रखी है जिसमें उन्होंने तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगाए गए आरोपों का भी जवाब दिया है.
अमित शाह का ये इंटरव्यू गुजरात दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फ़ैसले के एक दिन बाद प्रसारित हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गुजरात दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की विधवा ज़ाकिया जाफ़री की याचिका को ख़ारिज कर दिया था.
इस याचिका में 2002 के गुजरात दंगे के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 59 लोगों को एसआईटी से मिली क्लीन चिट को चुनौती दी गई थी.
समाचार एजेंसी एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश को दिए क़रीब 40 मिनट के इस इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट ने तब की गुजरात सरकार पर लगाए गए आरोपों को खारिज़ किया है. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से यह भी साफ़ होता है कि वे आरोप राजनीतिक मंशा से प्रेरित थे.'
अमित शाह ने कहा कि 19 साल के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जो जजमेंट दिया है उससे पीएम मोदी पर लगे सारे आरोपों को ख़ारिज कर दिया गया है. साथ ही इसे राजनीति से प्रेरित बताया गया. इस फ़ैसले से बीजेपी की सरकार पर लगा धब्बा भी हटा है.
अमित शाह ने कहा,"पीएम मोदी से भी पूछताछ हुई लेकिन कोई धरना प्रदर्शन नहीं हुआ. हमने न्याय प्रक्रिया का साथ दिया. मुझे भी गिरफ़्तार किया गया था लेकिन कोई धरना प्रदर्शन नहीं हुआ."
'दंगों में मोदी का हाथ' के आरोप पर क्या कहा
अमित शाह ने कहा कि आरोप था कि 'दंगों में मोदी का हाथ था.'
अमित शाह ने कहा कि दंगे हुए थे लेकिन आरोप लगा था कि उसमें मुख्यमंत्री मोदी और राज्य सरकार का हाथ था और अब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से सबकुछ साफ़ हो गया है.
उन्होंने कहा, "दंगे हुए थे, इससे कोई इनक़ार नहीं कर रहा है कि लेकिन आरोप लगा था कि दंगे राज्य सरकार ने करवाए. दंगे मोटिवेटेड थे. यहां तक की मुख्यमंत्री का हाथ होने की बात भी कह दी गई."
शाह ने कहा कि लेकिन आज कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि मुख्यमंत्री ने बार-बार शांति की अपील की. राज्य सरकार ने दंगा रोकने की भरसक कोशिश की.
उन्होंने कहा,"आरोप तो यह भी लगाया गया कि गुजरात दंगों में फ़ायरिंग में सिर्फ़ मुसलमान मारे गए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आज उसे भी नकार दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसा नहीं हुआ."
पीएम मोदी को 'दर्द झेलते देखा'
अमित शाह ने कहा कि 18-19 साल की लड़ाई और देश का इतना बड़ा नेता एक शब्द बोले बगैर, सभी दुखों को भगवान शंकर के विषपान की तरह गले में उतारकर, सहन करके लड़ता रहा और आज जब सत्य सोने की तरह चमकता हुआ बाहर आया है, तो आनंद ही होगा.
अमित शाह ने कहा, "मैंने पीएम मोदी को नज़दीक से इस दर्द को झेलते हुए देखा है क्योंकि न्यायिक प्रक्रिया चल रही थी तो सब कुछ सत्य होने के बावजूद भी हम कुछ नहीं बोलेंगे.. बहुत मज़बूत मन का आदमी ही ये स्टैंड ले सकता है."
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपों को ख़ारिज किया है और आरोप क्यों लगाए गए, इसके विषय में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है.
"एक प्रकार से ये आरोप राजनीति से प्रेरित थे, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने ये भी सिद्ध कर दिया है. भाजपा की विरोधी राजनीतिक पार्टियां, कुछ विचारधारा के लिए राजनीति में आये हुए पत्रकार और कुछ एनजीओ ने मिलकर इन आरोपों को इतना प्रचारित किया और इनका इकोसिस्टम इतना मज़बूत था कि धीरे धीरे झूठ को ही सब सच मानने लगे."
'मीडिया को लेकर कोई दख़ल नहीं'
अमित शाह ने आरोप लगाया कि बीजेपी के ख़िलाफ़ विरोधी पार्टियों, कुछ पत्रकारों और एनजीओ ने इस झूठ को इतना प्रचारित किया कि झूठ ही सच लगने लगा.
अमित शाह ने कहा कि 'हमारी सरकार का कभी भी मीडिया के काम में दख़ल नहीं रहा है, न उस वक्त किया था और न आज है. लेकिन उस वक्त जो इकोसिस्टम बना था, उसने झूठ के पुलिंदे को इतना बड़ा हौव्वा बनाकर खड़ा कर दिया कि सभी इसके प्रभाव में आ गए.'
अमित शाह ने कहा, "पीएम मोदी से भी पूछताछ हुई थी लेकिन तब किसी ने धरना-प्रदर्शन नहीं किया था. मेरी भी गिरफ़्तारी हुई थी लेकिन कोई भी धरना-प्रदर्शन नहीं हुआ."
"जिन लोगों ने मोदी पर आरोप लगाए थे अगर उनकी अंतरात्मा है तो उन्हें मोदी जी और बीजेपी नेता से माफी मांगनी चाहिए."
गुजरात दंगे के दौरान देरी से कदम उठाने के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि जहां तक गुजरात सरकार का सवाल है हमने कोई लेट-लतीफी नहीं की थी, जिस दिन गुजरात बंद का एलान हुआ था उसी दिन हमने सेना को बुला लिया था.
उन्होंने कहा, "गुजरात सरकार ने एक दिन की भी देरी नहीं की थी और कोर्ट ने भी इसका प्रोत्साहन किया है."
अमित शाह ने आगे कहा, "लेकिन दिल्ली में सेना का मुख्यालय है, जब इतने सारे सिख भाइयों को मार दिया गया, 3 दिन तक कुछ नहीं हुआ. कितनी SIT बनी? हमारी सरकार आने के बाद SIT बनी. ये लोग हम पर आरोप लगा रहे हैं?"
'मोदी को किया गया टारगेट'
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का हवाला देते हुए अमित शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि जकिया जाफरी किसी और के निर्देश पर काम करती थीं.
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, "एनजीओ ने कई पीड़ितों के हलफनामे पर हस्ताक्षर किए और उन्हें पता भी नहीं है. सब जानते हैं कि तीस्ता सीतलवाड़ की एनजीओ ये सब कर रही थी और उस समय की आई यूपीए की सरकार ने एनजीओ की बहुत मदद की."
अमित शाह ने आगे कहा, "जिस तरह से 60 लोगों को ज़िंदा जला दिया गया था, उसका समाज में आक्रोश था.और जब तक दंगे नहीं हुए तब तक इस घटना का का किसी ने ज़िक्र भी नहीं किया. पार्लियामेंट चल रही थी फिर भी किसी ने उसकी निंदा तक नहीं की."
अमित शाह ने कहा कि यह सबकुछ मोदी को टारगेट करने के लिए, उनकी छवि को ख़राब करने के लिए यह सब किया गया था.
अमित शाह ने कहा कि दंगों का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "गुजरात में जब भी इंवेस्टमेंट समिट होता था, गुजरात दंगों पर रिपोर्ट आ जाती थी. मोदी जब भी विदेश जाते थे उन्हें अपमानित करने के लिए वहां के अख़बारों मे आर्टिकल आते थे."
'इस वजह से हुए थे दंगे'
अमित शाह ने कहा गुजरात दंगों के लिए गोधरा कांड को ज़िम्मेदार बताया.
उन्होंने कहा, "दंगे होने का मुख्य कारण गोधरा की ट्रेन को जला देना था. इसके कारण दंगे हुए और आगे जो दंगे हुए वो राजनीति से प्रेरित होकर हुए थे."
अमित शाह ने कहा, "कोर्ट ने अपने फैसले में कहा भी है कि ट्रेन में आग लगने के बाद की घटनाएं पूर्व नियोजित नहीं बल्कि स्वप्रेरित थी और तहलका के स्टिंग ऑपरेशन को भी खारिज कर दिया क्योंकि इसके आगे-पीछे का जब फुटेज आया तब पता चला कि ये स्टिंग राजनीतिक उद्देश्य से किया गया था."
शुक्रवार को आया था सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की विधवा ज़किया जाफ़री की याचिका को शुक्रवार को ख़ारिज कर दिया है.
इस याचिका में 2002 के गुजरात दंगे के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 59 लोगों को एसआईटी से मिली क्लीन चिट को चुनौती दी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फ़ैसला सुनाया है.
गुजरात दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जाँच दल (एसआईटी) ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी थी.
ज़ाकिया जाफ़री ने सुप्रीम कोर्ट में बीते साल नौ दिसंबर 2021 को याचिका दाख़िल की थी.
'सबूतों के अभाव में मिली थी क्लीन चिट'
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 8 फ़रवरी 2012 को मामला बंद करने के लिए अदालत में रिपोर्ट दाखिल की थी. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी समेत 59 लोगों को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने योग्य कोई साक्ष्य नहीं हैं.
इसके बाद निचली अदालत ने एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर क्लीन चिट दे दी थी.
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा, "हम मजिस्ट्रेट के उस फ़ैसले को सही ठहरा रहे हैं जिसमें एसआईटी की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया था. इस अपील में कोई मैरिट नहीं है और हम इसे ख़ारिज करते हैं."
सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद इस मामले पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि मोदी के ख़िलाफ़ फर्जी अभियान चलाया गया था, उन पर जान-बूझकर ग़लत आरोप लगाए गए थे.
उन्होंने कहा गुजरात दंगों में जो हुआ उसे राजनीतिक चश्मे से देखा गया. उन्होंने कहा, "ज़ाकिया जाफ़री को वामपंथी पार्टियों और कांग्रेस का समर्थन मिला था."
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