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गुजरात दंगे: 'बेदाग़ नरेंद्र मोदी' बचेंगे ज़किया के 'सुप्रीम प्रहार' से?
- Author, टीम बीबीसी हिंदी
- पदनाम, नई दिल्ली
गुजरात दंगे के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा.
ये याचिका कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी ज़किया जाफ़री ने दायर की है.
बीते मंगलवार को जस्टिस ए. एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने जाफ़री की याचिका सुनवाई के लिए मंज़ूर की थी.
कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की क्लोज़र रिपोर्ट के अध्ययन की ज़रूरत है, इसलिए 19 नवंबर को वो याचिका पर विचार करेगा.
ज़किया जाफ़री ने एसआईटी के नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट दिए जाने के गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है.
'सबूतों के अभाव में मिली थी क्लीनचिट'
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 8 फ़रवरी 2012 को मामला बंद करने के लिए रिपोर्ट दाखिल की थी. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी समेत 59 लोगों को क्लीनचिट देते हुए कहा था कि उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने योग्य कोई साक्ष्य नहीं हैं.
इसके साथ ही निचली अदालत ने एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर इन आरोपियों को क्लीनचिट दे दी थी.
इसके ख़िलाफ़ ज़किया मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में गई थीं. वहां याचिका ख़ारिज होने के बाद ज़किया जाफ़री गुजरात हाईकोर्ट गईं.
अक्तूबर 2017 में ज़किया की याचिका हाईकोर्ट ने भी ख़ारिज कर दी.
जस्टिस सोनिया गोकानी ने दंगों में बड़ी साजिश के आरोपों को नकारते हुए कहा कि इसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर नहीं किया था.
जस्टिस सोनिया गोकानी ने कहा था, "संजीव भट्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही बड़ी साजिश पर चर्चा के बाद इसे ख़ारिज कर चुका है. मैं इस पर आगे नहीं जाना चाहती. बड़ी साजिश के आरोपों वाली याचिका ख़ारिज की जाती है."
2002 गुजरात दंगे
हाईकोर्ट ने दंगों की दोबारा जांच करने से इंकार और इसमें किसी बड़ी साजिश के आरोप को रद्द करते हुए ज़किया से कहा था कि वो चाहें तो सुप्रीम कोर्ट भी जा सकती हैं.
ज़किया सुप्रीम कोर्ट गईं और वहां उन्होंने याचिका दायर की.
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में ज़किया जाफ़री ने कहा कि गुजरात दंगों को आपराधिक साजिश मानते हुए 59 लोगों को फिर से अभियुक्त बनाकर नए सिरे से जांच के आदेश दिए जाएं.
2002 में गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 डिब्बे में लगी आग में कई कार सेवकों की मौत हुई थी.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आग लगाए गए डिब्बे में कुल 59 लोग मौजूद थे. इनेमें से ज़्यादातर वो लोग थे जो अयोध्या से लौट रहे थे.
मारे गए थे एक हज़ार से ज़्यादा लोग
इसके बाद गुजरात में अलग-अलग जगहों पर दंगे भड़क गए. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, इन दंगों में कुल 1044 लोग मारे गए, जिनमें 790 मुसलमान और 254 हिंदू थे.
गुजरात के दंगों के मामले में 450 से ज़्यादा लोगों को अदालतों ने दोषी ठहराया है.
इनमें से लगभग 350 हिंदू और 100 मुसलमान हैं. मुसलमानों में 31 को गोधरा कांड के लिए और बाक़ियों को उसके बाद भड़के दंगों के लिए दोषी पाया गया है.
गुजरात सरकार पर उचित कदम नहीं उठाने के आरोप
साबरमती एक्सप्रेस की आग में कारसेवकों की मौत के बाद पूरे गुजरात में जगह-जगह हिंदू और मुसलमानों के बीच हिंसक टकराव हुए थे.
दंगों की कई घटनाओं में से एक अहमदाबाद के गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी कांड था. 28 फ़रवरी 2002 को इस सोसाइटी को घेरकर बेकाबू भीड़ ने 69 लोगों की हत्या कर दी थी.
मृतकों में इसी सोसाइटी में रहने वाले कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री भी शामिल थे.
गुजरात सरकार दंगों को काबू करने में नाकाम रही थी. तीसरे दिन दंगों को काबू करने के लिए सेना उतारनी पड़ी थी.
नरेंद्र मोदी पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि उन्होंने दंगे रोकने के लिए ज़रूरी कदम नहीं उठाए.
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