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लखनऊ: ज़ोमैटो डिलीवरी बॉय का आरोप, दलित होने के नाते खाना लेने से किया इनकार, एफ़आईआर दर्ज
- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ से
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ज़ोमैटो के एक डिलीवरी बॉय का आरोप है कि जब वो खाने की डिलीवरी करने लोकेशन पर पहुंचे तो उनकी जाति जानने पर ना सिर्फ़ व्यक्ति ने उनसे खाना लेने से इनकार कर दिया.
डिलीवरी करने वाले का आरोप है कि उन्हें न केवल गालियां दी गईं, बल्कि उनके मुंह पर तम्बाकू थूका गया और उनके साथ मारपीट भी की गई.
क्या कहती है एफ़आईआर?
यह घटना शनिवार 18 जून की है. इस मामले में दर्ज एफ़आईआर के मुताबिक़ विनीत कुमार रावत लखनऊ के आशियाना इलाक़े में ज़ोमैटो डिलीवरी बॉय का काम करते हैं.
शनिवार शाम को वो एक ऑर्डर की डिलीवरी देने के लिए आशियाना के सेक्टर एच में रहने वाले अजय सिंह के यहां गए थे.
विनीत का कहना है कि जब वो आर्डर देने के लिए अजय सिंह के दरवाज़े पर पहुंचे तो घंटी बजाने के बाद एक व्यक्ति बाहर आए और उनका नाम पूछा. विनीत ने अपना पूरा नाम विनीत कुमार रावत बताया.
विनीत के अनुसार नाम बताने के बाद उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा, "अबे सा...... पासी, दलितों के हाथ का छुआ हुआ सामान लेंगे. मैंने कहा सर आपको आर्डर लेना है तो ले लीजिये, वरना कैंसिल कर दीजिये, तो उस व्यक्ति ने मेरे मुंह पर तम्बाकू थूक दिया. मैंने कहा सर यह क्या कर रहे हैं? तो मुझे गंदी गंदी गालियां देने लगे. और मना करने पर अंदर से 10 से 12 अज्ञात लोग और खाने का ऑर्डर देने वाले अजय सिंह ने मुझे लाठी-डंडे से मारा."
विनीत कुमार रावत का कहना है कि वो किसी तरह से जान बचाकर वहां से निकले और इस घटना की जानकारी उन्होंने पुलिस को दी. पुलिस ने ही उन्हें उनकी गाड़ी वापस दिलवाई.
इस मामले में दर्ज एफ़आईआर में दो नामज़द और 12 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ शिकायत लिखी गई है.
'मुझ पर थूका, सिर पर डंडा मारा'
बीबीसी से बातचीत के दौरान घटना के बारे में विनीत कहते हैं, "मेरे पास एक कस्टमर का ऑर्डर था जिसका नाम अजय सिंह था. ऑर्डर डिलीवर करने पहुंचा और मैं एड्रेस कंफ़र्म करने के लिए बात ही कर रहा था तो उन्होंने कहा कि मैं नौकर को भेजता हूं."
"नौकर के आने से पहले ही उनका कोई भाई मेरे पास आया था, जिसका नाम अभय सिंह था. उन्होंने नशे की हालत में मुझ पर थूक दिया. हमने इसका विरोध किया कि आपने मेरे मुंह पर क्यों थूक दिया? इतने में उनके नौकर-चाकर डंडे लेकर आ गए."
जाति के बारे में सवाल किए जाने के बारे में विनीत कुमार कहते हैं, "उन्होंने मेरा नाम पूछा और मैंने अपना नाम विनीत कुमार रावत बताया. पूछा कहां रहता है, तो मैंने कहा पासी किला. कहने लगे मैं दलित का छुआ हुआ खाना खाऊंगा क्या? फिर मेरे सर पर डंडा मार दिया, मैंने हेलमेट पहन रखा था."
विनीत कुमार का कहना है कि यह सब उन्होंने अपने वकील को बताया जिसके बाद उन्होंने इसकी एफ़आईआर दर्ज करवाई है. उनका कहना है कि उन्हें काफ़ी चोट भी लगी है और उनका मेडिकल चेकअप भी हुआ है.
विनीत कुमार कहते हैं, "मैं अपनी जान बचा कर भागा, वरना वो लोग तो मुझे मार दिए होते."
फ़िलहाल पुलिस ने पूरे मामले में पांच धाराओं के तहत शिकायत दर्ज की है. दो नामज़द अभियुक्तों पर धारा 3(2)(V) एससी/एसटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज की गई है.
इस प्रकरण की जांच के बारे में लखनऊ के डीसीपी ईस्ट अमित कुमार आनंद कहते हैं, "जांच चल रही है. जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी. तहरीर के मुताबिक़ मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है. दूसरी पार्टी का कहना है कि लड़ाई-झगड़ा तो हुआ था. शिकायतकर्ता ने बताया कि वो अनुसूचित जाति के हैं और उसी हिसाब से जांच की जाएगी. जिन पर आरोप लगा है, उनका दावा है कि उनके घर में भी एससी बिरादरी की एक महिला भी काम करती हैं."
आरोपों के बारे में अजय सिंह का क्या कहना है?
विनीत कुमार रावत के आरोपों पर अजय सिंह कहते हैं, "हमारा पूरा नाम है अजय सिंह गंगवार और मैं ओबीसी हूं."
जातिसूचक टिपण्णी के आरोप के बारे में उन्होंने कहा, "मेरे घर में एक महिला काम करती हैं. वो मेरे बच्चों की देखरेख करती है, उन्हें खाना खिलाती है खाना बनाती हैं. वो भी रावत हैं और इसी जाति की हैं. तो हम पर जो आरोप लगाया गया कि हम जाति को लेकर बात करते हैं वो निराधार है."
"हम लोग पढ़े-लिखे समाज के लोग हैं. स्विगी या ज़ोमैटो से कौन जाति पूछ कर डिलीवरी लेता है? यह तो डिलीवर कर रहे थे, लेकिन क्या हमको पता है कि जहां से खाना आ रहा है वहां खाना कौन पका रहा है? आप मेरा पिछले ढाई साल का ज़ोमैटो और स्विगी का रिकॉर्ड देख लीजिये, उसमें कितने लोग डिलीवर करने आये होंगे, क्या कोई भी कंप्लेंट हमारे ख़िलाफ़ कभी हुई है?"
अपने पक्ष में वो अपने यहां काम करने वाली उन महिला की एक वीडियो बाइट भी दिखाते हैं जिसमें वो कह रहीं हैं कि उन्हें काम करने के दौरान कभी भी कोई जातिसूचक शब्द सुनने को नहीं मिला है.
झगड़ा किस चीज़ को लेकर हुआ, इस पर अजय सिंह का कहना है, "झगड़ा हुआ है, मारपीट नहीं हुई है. वो इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया और कॉलर की पकड़म-पकड़ाई हुई. उन्होंने हमको धक्का दिया तो हमने भी उनको धक्का दिया, और वो लकड़ी के ढेर में जाकर गिरे. दोबारा फिर उलझने आये तो फिर वही हुआ."
"उसके बाद सीधे पुलिस नहीं आई है. पहले 112 नंबर आई है, अगर हमने कुछ किया किया होता तो हमें वो थाने ले गयी होती ना? हमको क्यों छोड़ दिया? राहगीरों को उसने हमारे लोग बता दिया, जबकि मेरा एक छोटा परिवार है. हम घर में सिर्फ़ चार लोग रहते हैं."
विनीत कुमार रावत पर थूकने के बारे में सवाल करने के आरोप के बारे में अजय सिंह कहते हैं, "हमने आर्डर किया था और मैं ख़ुद मौक़े पर डिलीवरी लेने के लिए भी नहीं था. मेरा छोटा भाई पोर्च के अंदर गाड़ी खड़ी करने जा रहा था और उसके मुंह में मसाला भरा हुआ था. उसने मसाला थूकने के लिए कुल्ला किया तो उसका एक आधा छींट इनकी गाड़ी पर गिर गया. तो इन्होंने कहा कि - अंधे हो क्या, तुमको दिखाई नहीं देता है."
"इनका आरोप है कि मुंह पर थूका लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि क्या अगर कुल्ला करके कोई किसी के मुंह पर थूकेगा तो क्या शर्ट पर दाग़ नहीं आएंगे? जब इन्होंने 112 नंबर के सामने आरोप लगाया तब यह वही शर्ट पहने हुए थे. तो मैंने 112 से यही कहा कि यह मेरे भाई पर इनके मुंह पर थूकने का आरोप लगा रहे हैं, तो इनकी शर्ट पर एक दाग़ दिखा दीजिये. वो दाग़ नहीं दिखा पाए. उसके बाद 112 वापस चली गई."
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