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यूपी: जूते पर 'ठाकुर' लिखा होने पर दुकानदार हिरासत में - प्रेस रिव्यू
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले में एक दुकानदार के ख़िलाफ़ 'ठाकुर' ब्रांड के जूते बेचने के आरोप में शिकायत दर्ज कर पुलिस ने हिरासत में लिया है. दुकानदार के ख़िलाफ़ शिकायत बजरंग दल के एक कार्यकर्ता ने की थी.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी ख़बर के मुताबिक़, मामला बुलंदशहर के गुलावठी का है. बजरंग दल के सदस्य विशाल चौहान ने एक दुकान पर जूते के सोल पर ठाकुर लिखा देखा तो दुकानदार के पास जाकर उसका विरोध किया और जातिगत भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया.
ख़बर मिलते ही बड़ी संख्या में लोग दुकान के बाहर जमा हो गए. हालांकि दुकान चला रहे मोहम्मद नासिर ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि 'ठाकुर' जूतों का एक ब्रांड है. विशाल चौहान ने इस बारे में पुलिस से शिकायत की.
पुलिस को दी गई शिकायत में उन्होंने दुकानदार और जूते बनाने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की.
इस घटना के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें दुकानदार और बजरंग दल कार्यकर्ताओं के बीच बहस हो रही है.
अख़बार के मुताबिक, सिकंदराबाद की सीओ नम्रता सिंह ने बताया कि दुकानदार नासिर और जूते बनाने वाली कंपनी के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की गई है. नासिर को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.
कोवैक्सीन का टीका लगाने से पहले लेनी होगी अनुमति: आईसीएमआर
भारत बायोटेक को मिली कोवैक्सीन की मंज़ूरी पर उठे सवालों के बीच आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा है कि इस वैक्सीन को क्लीनिकल ट्रायल मोड में इस्तेमाल की मंज़ूरी दी गई है.
इसका मतलब है कि वैक्सीन लगाने से पहले संबंधित व्यक्ति से उसी तरह लिखित अनुमति लेनी होगी जैसे क्लीनिकल ट्रायल के दौरान ली जाती है.
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति से दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं जिसमें टीके के संभावित ख़तरों का भी ज़िक्र होता है. अगर वैक्सीन से किसी तरह का नुक़सान होता है तो मुआवज़े का भी प्रावधान होता है.
डॉ. बलराम भार्गव ने मंगलवार को कहा कि भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मिली मंज़ूरी में क्लीनिकल ट्रायल के प्रावधानों को लागू किया गया है. इस वैक्सीन के ट्रायल के पहले चरण में 375 और दूसरे चरण में 380 लोगों पर परीक्षण हुए हैं. तीसरे चरण का ट्रायल जारी है.
दिल्ली में रहने वाले दूसरे राज्यों के लोगों को भी मिलेगी वैक्सीन
दिल्ली में रहने वाले उन लोगों को भी कोरोना वैक्सीन दी जाएगी जिनके पास निवास प्रमाण पत्र नहीं है. इसके लिए उन्हें एक आधिकारिक लेटर जारी किया जाएगा.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़, राजधानी दिल्ली और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में पहले चरण में वैक्सीन दी जाएगी.
दिल्ली राज्य कोविड टास्क फ़ोर्स की डॉ. सुनीला गर्ग के हवाले से अख़बार ने लिखा, ''टीकाकरण के लिए कोई भी वैध पहचान पत्र मान्य होगा जो संबंधित व्यक्ति मोबाइल नंबर से लिंक होगा. जो लोग दिल्ली में रहते हैं लेकिन यहां का स्थायी पता उनके पास नहीं है, उन्हें गैजेट ऑफ़िसर से एक फ़ोटो सर्टिफ़िकेट लेना होगा और उसे स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से विकसित को-विन ऐप में अपलोड करना होगा.''
दिल्ली में कोरोना वैक्सीन के अभियान की तैयारियां ज़ोरों पर हैं. राज्य में क़रीब 51 लाख लोगों को वैक्सीन देने की योजना है जिनमें स्वास्थ्यकर्मी, फ्रंटलाइन वर्कर और 50 साल से अधिक उम्र के वो लोग शामिल हैं जिनको ज़्यादा ख़तरा है.
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