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होली का जश्न मनाते दलितों पर हमला, एक दलित की हत्या
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से बीबीसी हिन्दी के लिए
राजस्थान में अलवर ज़िले के भिवाड़ी में होली पर दलित बस्ती में डीजे पर निकली संगीत की स्वर लहरी एक दलित परिवार के लिए शोक गीत बन गई.
भिवाड़ी के बाबूलाल जाटव का आरोप है कि दबंगों ने उनके किशोर बेटे नीरज जाटव की पीट-पीटकर जान ले ली. पुलिस ने इस घटना में पांच लोगों को हिरासत में लिया है. घटना से नाराज़ दलित समाज के लोगों ने रास्ता रोका और विरोध प्रदर्शन किया.
होली त्योहार पर अपना बेटा खो चुके बाबूलाल जाटव ने बीबीसी से कहा, "वो मेरा सबसे लाडला था. अभी उसने सोलह वसंत ही देखे थे. मैं ड्राइवर हूं लेकिन जैसे-तैसे उसे पढ़ा रहा था, मेरा तो सब कुछ लुट गया."
यह कहते हुए बाबूलाल जाटव की रुलाई फूट गई. वह कहते हैं सिर्फ़ दलित होकर जोशो-खरोश से होली मनाना उन लोगों को बर्दाश्त नहीं हुआ. पीड़ित परिवार का कहना है उन्हें दबंगों ने जातिसूचक गालियां दी.
भिवाड़ी के थानाधिकारी विक्रांत शर्मा ने बताया कि डीजे को लेकर विवाद होने की बात सामने आई है और जिन पांच लोगों को प्राथमिकी में नामज़द किया गया है, उन्हें हिरासत में ले लिया गया है.
पुलिस के अनुसार पकड़े गए लोगों से पूछताछ की जा रही है. थानाधिकारी शर्मा कहते हैं, "घटना में शामिल लोगों के विरुद्ध क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी. यह घटना शुक्रवार दोपहर की है."
भिवाड़ी में मोहर सिंह फ़ासल ख़ुद दलित बिरादरी से हैं. वह कहते हैं, "दलित नौजवान डीजे के साथ होली मना रहे थे. यह दबंगों को नागवार लगा और फिर हमला कर दिया गया."
उसी क्षेत्र के अनिल जाटव कहते हैं, "हम लोगों ने ख़ुद का पैसा एकत्रित कर डीजे का इंतज़ाम किया था. दबंगों को यह ठीक नहीं लगा कि छोटी जाति के लोग कैसे शान से त्योहार की ख़ुशी मना रहे हैं. नीरज जाटव मेरा दोस्त था. इस घटना ने मुझे हिलाकर रख दिया."
दलित अधिकार संगठन के सतीश कुमार कहते हैं, "यह घटना बताती है कि दलितों को त्योहार मनाने की भी आज़ादी नहीं है. आप देखें दलित कैसे हर त्योहार बहुत मनोयोग से मनाता है पर अब उस पर भी आपत्ति होने लगी है."
श्री कुमार कहते हैं कि, "दलित अत्याचारों पर बनी उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक हुए मुद्दत हुई. हम यह मामला मानवाधिकार आयोग और हाईकोर्ट के सामने उठा चुके हैं पर कुछ नहीं हुआ."
बहुजन समाज पार्टी के अलवर क्षेत्र प्रभारी अशोक वर्मा कहते हैं, "दलित अत्याचारों पर प्रमुख पार्टियां चुप्पी साध लेती हैं. दलित संगठनों ने परिवार को पर्याप्त आर्थिक मदद और परिवार के किसी सदस्य को नौकरी देने की मांग की है."
भिवाड़ी उभरता हुआ औद्योगिक क्षेत्र है. वहां शनिवार को दलित संगठनों ने घटना के विरोध में प्रदर्शन किया और शव लेने से इनकार कर दिया. बाद में प्रशासन से बातचीत के बाद नीरज जाटव का दाह संस्कार कर दिया गया.
होली पर जगह-जगह फाग के गीत गूंजते हैं मगर भिवाड़ी की यह दलित बस्ती ग़म में डूबी हुई है.
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