भीमा कोरेगांव मामला: क्या पुलिस ने ही अभियुक्तों के सिस्टम को हैक कर उनमें सबूत प्लांट किए?

- Author, मेधावी अरोड़ा
- पदनाम, बीबीसी डिसइन्फार्मेशन युनिट
एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिक्योरिटी फ़र्म सेंटिनेलवन ने अपनी जांच में यह दावा किया है कि भीमा कोरेगांव के अभियुक्तों के सिस्टम हैक करके उनमें कथित तौर पर सबूत प्लांट किये गए थे.
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पुणे पुलिस ने कथित तौर पर साल 2018 के भीमा कोरेगांव मामले के अभियुक्तों के सिस्टम हैक करने में शामिल थी.
अमेरिका की साइबर सिक्योरिटी फ़र्म सेंटिनेलवन ने अपनी पड़ताल में पाया है कि पुणे पुलिस ने कथित तौर पर कार्यकर्ता रोना विल्सन और वरवर राव के सिस्टम (कंप्यूटर) हैक किये और उसमें सबूत प्लांट किये. जिसके आधार पर इन कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी हुई.

वायर्ड मैग़ज़ीन ने बीते गुरुवार को यह रिपोर्ट प्रकाशित की है.
पिछले साल फ़ोरेंसिक विश्लेषकों ने दावा किया था कि हैकर्स ने कम से कम दो अभियुक्तों के अकाउंट्स से छेड़छाड़ की और उनके कंप्यूटर में सबूत प्लांट किये.
लेकिन इस बार यह नया आरोप एक क़दम आगे बढ़कर है. इस बार हैकर्स और पुणे पुलिस के बीच लिंक का दावा किया जा रहा है.
क्या हैं नए आरोप
एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पुणे पुलिस कथित रूप से साल 2018 के भीमा कोरेगांव केस के अभियुक्तों को निशाना बनाने वाले हैकिंग कैंपेन में शामिल थी.
वायर्ड पत्रिका ने गुरुवार को बताया कि सेंटिनेलवन नाम की अमेरिका की साबर सुरक्षा फ़र्म ने अपनी पड़ताल में पाया है कि पुणे ने इस मामले के अभियुक्तों रोना विल्सन और वरवर राव के कंप्यूटरों को हैक किया और ख़ुद सबूत प्लांट किये. जिसके आधार पर उनकी गिरफ़्तारियां हुईं.

पिछले साल, फ़ोरेंसिक डिपार्टमेंट के विश्लेषकों ने दावा किया था कि अभियुक्तों के कंप्यूटर से छेड़छाड़ हुई थी.
नए आरोप इस मामले में पुणे पुलिस को हैकर्स के साथ मिला हुआ बताया गया है.
अप्रैल 2018 में, एक्टिविस्ट रोना विल्सन के ईमेल पर एक फ़िशिंग ईमेल आया था. साइबर सिक्योरिटी फ़र्म ने पाया है कि इससे उनके सिस्टम को हैक किया गया.
ये फ़िशिंग ईमेल लक्ष्य टार्गेट यानी रोना विल्सन की पर्सनल डिटेल्स की जानकारी पाने की कोशिश थी. जैसे यूज़र का नाम, पासवर्ड, ईमेल अड्रेस और बैंक अकाउंट की डिटेल्स.
वायर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इस अकाउंट में एक रिकवरी मेल और एक फ़ोन नंबर जोड़ा गया था, जिसमें भीमा कोरेगांव मामले की जांच में शामिल पुणे पुलिस के एक अधिकारी का पूरा नाम था. इसके बाद रोना विल्सन के अकाउंट का इस्तेमाल इस मामले के अन्य अभियुक्तों को फिशिंग मेल भेजने के लिए किया गया था. इस मामले में विल्सन और राव के अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के एकेडमिक हेनी बाबू को भी निशाने पर लिया गया.
इसके बाद, यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोरंटो के एक सिक्योरिटी रिसर्चर जॉन स्कॉट-रेल्टन ने रिकवर हुए फ़ोन नंबर से जुड़े वॉट्सऐप डिस्प्ले की पड़ताल की. यह एक पुलिस अधिकारी की सेल्फ़ी थी. वायर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक़, यह वही पुलिस अधिकारी था जिसकी तस्वीर वरवर राव की गिरफ़्तारी के दौरान भी सामने आई थी.
बीबीसी स्वतंत्र रूप से साइबर सुरक्षा फ़र्म और वायर्ड पत्रिका के लगाए आरोपों की पुष्टि नहीं करता है.
इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आई है?
देश के कई राजनीतिक दलों ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. तृणमूल कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया और कांग्रेस जैसे दलों ने इन नए आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
साकेत गोखले, तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता हैं. उन्होंने ट्वीट किया है कि यह रिपोर्ट वाकई चौंकाने वाली है. उन्होंने महाराष्ट्र के गृहमंत्री दिलीप वाल्से पाटिल से एक विशेष जांच की मांग की है.
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इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की वकील और कार्यकर्ता कविता कृष्णन और प्रशांत भूषण ने भी अपनी टिप्पणी की है. उन्होंने एक चिट्ठी लिखा है, जिसमें पूछा है, "बावजूद इसके वे लोग पिछले चार साल से जेल में हैं. न्याय कहां है?"
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बीबीसी की टीम ने पुणे पुलिस का पक्ष जानने के लिए उन्हें मेल किया है और फ़ोन भी करने की कोशिश की लेकिन ख़बर लिखे जाने तक पुलिस का पक्ष नहीं मिल सका है.

क्या है भीमा कोरेगांव मामला
साल 2018 में, भीमा कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ में हिंसा भड़क उठी थी.
भीमा-कोरेगांव वो जगह है जहाँ एक जनवरी 1818 को मराठा और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था. इस युद्ध में महार समुदाय ने पेशवाओं के खिलाफ अंग्रेज़ों की ओर से लड़ाई लड़ी थी. अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी ने महार रेज़िमेंट की बदौलत ही पेशवा की सेना को हराया था.
साल 2018 में भड़की हिंसा में एक शख़्स की मौत हो गई थी और उसके बाद यह हिंसा महाराष्ट्र और देश के दूसरे हिस्सों में फैल गई.
16 लोग, जिसमें वकील, एकेडेमिक्स और एक्टिविस्ट भी शामिल थे, उन्हें बाद में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया गया. इन लोगों पर चरमपंथ और माओवादी विद्रोहियों के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया गया.
इनमें से एक फ़ादर स्टैन स्वामी का जुलाई 20121 में निधन हो गया. 84 साल के स्टैन स्वामी भीमा कोरेगाँव मामले में न्यायिक हिरासत में थे. उन पर हिंसा भड़काने का मामला चल रहा था.


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