राजस्थान: आरक्षण की मांग को लेकर भरतपुर में नेशनल हाइवे जाम, इंटरनेट बंद

    • Author, मोहर सिंह मीणा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

राजस्थान में भरतपुर ज़िले की नदबई तहसील के आरोदा गांव के पास जयपुर-आगरा नेशनल हाइवे-21 पर 12 जून की शाम से आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी हज़ारों की संख्या में बैठे हुए हैं.

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सकारात्मक वार्ता नहीं होने पर राज्यभर में चक्का जाम की चेतावनी दी है.

मंगलवार को आरक्षण की मांग को लेकर जयपुर-आगरा नेशनल हाइवे जाम करने के मामले में नदबई तहसील के लखनपुर थाने में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है.

प्रदर्शनकारियों पर मामला दर्ज होने की पुष्टि नदबई डिप्टी एसपी नितिराज शेखावत ने की. हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि कितने लोगों पर मामला दर्ज हुआ है. स्थानीय मीडिया में आई जानकारी के मुताबिक क़रीब एक हज़ार लोगों पर मामला दर्ज किया गया है.

प्रशासन ने हाइवे के ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया है. सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं. साथ ही अफ़वाहों को रोकने के लिए क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं 12 जून की रात से ही बंद कर दी गई हैं.

क्या है मांग?

हज़ारों की संख्या में नेशनल हाइवे पर डटे सैनी, माली, कुशवाह, मौर्य समाज की मांग है कि उन्हें 12 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए.

समाज का दावा है कि राज्य में उनकी बारह प्रतिशत जनसंख्या है जिसके आधार पर उन्हें अलग से बारह प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए.

हालांकि, बिना जातिगत जनगणना के यह कहना मुश्किल है कि जातिवार जनसंख्या के आंकड़े क्या हैं. लेकिन, सैनी समाज बारह प्रतिशत जनसंख्या का दावा कर रहा है.

आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक मुरारी लाल सैनी ने बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत में बताया, "हमारी सिर्फ़ एक ही मांग है- 12 प्रतिशत आरक्षण. हम किसी जाति में से नहीं अलग से मांग रहे हैं."

सैनी ने कहा, "सरकार को मालूम करना चाहिए कि हमारे समाज के कितने लोग पुलिस में हैं, मास्टर हैं, इंजीनियर हैं, उद्योग धंधों में हैं और हमारे पास कितनी ज़मीनें हैं. सब मालूम करने के बाद जो बनता है वो दे दें."

वे बोले, "समाज के लोग आर्थिक रूप से बेहद पिछड़े हैं. हमारे समाज से सरकारी नौकरियों में न के बराबर लोग हैं. हम अपना हक मांग रहे हैं."

ओबीसी वर्ग में है सैनी समाज

बारह प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहा सैनी समाज फिलहाल ओबीसी वर्ग को मिलने वाले आरक्षण में शामिल है.

केंद्र में ओबीसी वर्ग को 27 फ़ीसदी और राज्य में 21 फ़ीसदी आरक्षण दिया जा रहा है. राज्य में ओबीसी वर्ग में क़रीब 92 जातियां शामिल हैं.

ओबीसी में शामिल सभी जातियों की जनसंख्या देखें तो राज्य का एक बड़ा तबका इस वर्ग में शामिल है.

देश के कई अन्य राज्यों से दबी आवाज़ में जनसंख्या के आधार पर आरक्षण की मांग उठाई जा रही है.

माना जा रहा है कि इस आवाज़ को तेज़ करने के लिए ही जातिगत जनगणना की मांग भी लगातार की जा रही है.

राज्य में आरक्षण की स्थिति

राजस्थान में फ़िलहाल 64 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है.

सर्वाधिक शामिल जातियों वाले ओबीसी वर्ग को 21 प्रतिशत आरक्षण राज्य में मिल रहा है. जबकि, केंद्र में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण है.

अनुसूचित जाति (एससी) के लिए राज्य में 16 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है. अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग को राज्य में 12 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है.

आर्थिक रूप से पिछड़ों (ईडब्ल्यूएस) को दस प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है.

गुर्जर आरक्षण आंदोलन के बाद गुर्जरों समेत पांच जातियों के लिए अलग से बनाई मोस्ट बैकवर्ड क्लास (एमबीसी) को पांच फ़ीसदी आरक्षण दिया जा रहा है.

जवाब नहीं मिला तो किया हाइवे जाम

आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक मुरारी लाल सैनी ने बताया है, "हमने आरक्षण की मांग को लेकर 18 नवंबर 2021 को मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया था. हमने दो बार सीएम को ज्ञापन दिया."

"राज्य के सभी 33 कलेक्टर को सीएम के नाम ज्ञापन दिया था. लेकिन, इतना समय बीत जाने के बाद भी हमारी मांग पर सुनवाई नहीं हुई."

उन्होंने कहा, "जब सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया तब हम लोगों को हाइवे जाम करना पड़ा है. अब यह पड़ाव तभी उठेगा जब सरकार हमारी मांग मानेगी."

सैनी ने आगे बताया, "हमने नुक्कड़ सभाएं की. हर ज़िले में ज्ञापन दिए गए. हमने बड़ी महासभाएं भी की लेकिन फिर भी सरकार ने हमारी मांग नहीं सुनी और कोई बात नहीं की."

वार्ता के प्रयास जारी

हाइवे जाम कर बैठे हज़ारों की संख्या में इन लोगों का स्पष्ट कहना है कि सरकार का प्रतिनिधि आ कर बात करेगा और सरकार मांग मानेगी तब ही हाइवे से हटेंगे.

आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक मुरारी लाल सैनी ने कहा, "हमने वार्ता के लिए प्रशासन को अपने 31 प्रतिनिधियों के नाम की सूची सौंपी है, उन्होंने नाम काट कर 10 नाम कर दिए हैं. लेकिन, अभी कोई बातचीत नहीं हुई है."

भरतपुर के ज़िला कलेक्टर आलोक रंजन ने बीबीसी से कहा, "बातचीत के लिए एक समूह होना चाहिए. इन्हें नाम तय करने में डेढ़ दिन लग गया. 31 नाम में से सहमति से उन्होंने दस लोगों के नाम फ़ाइनल कर मुझे रात ही दिए गए हैं."

कलेक्टर रंजन ने कहा, "मंगलवार को बैठक के लिए दस लोग आने थे, मंत्री (कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह) को इन्फॉर्म कर दिया. लेकिन, पदाधिकारी नहीं आए. दस नामों में संयोजक मुरारी लाल सैनी भी हैं, लेकिन वह नहीं आए."

उन्होंने कहा, "सरकार की तरफ़ से संभागीय आयुक्त, आईजी बात कर रहे हैं. मैं ख़ुद तीन बार मौक़े पर गया हूं बात की है. हम लगातार वार्ता के प्रयास कर रहे हैं."

हाइवे पर शांतिपूर्ण बैठे हैं

क़रीब चार से पांच हज़ार की संख्या में हाइवे पर बैठे समाज के लोगों में महिलाएं, बुज़ुर्ग और युवा शामिल हैं.

अधिकतर लोग पास के अन्य ज़िलों से वहां पहुंचे हैं.

भरतपुर पुलिस अधीक्षक (एसपी) श्याम सिंह ने फ़ोन पर बताया है, "वहां लोग शांति से बैठे हुए हैं. किसी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है. हमने पर्याप्त संख्या में पुलिस बल भी तैनात किए हैं."

एसपी ने कहा, "हाइवे पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है. हाइवे जाम करने के बाद ही डायर्जन से ट्रैफिक सुचारू रूप से चल रहा है."

कलेक्टर आलोक रंजन ने कहा है, "अफ़वाहों को रोकने के लिए हमने इंटरनेट बंदी को बढ़ा दिया है. मौक़े पर ये लोग शांतिपूर्ण बैठे हुए हैं. किसी तरह की कोई हिंसा नहीं हुई है."

दो दिन से हाइवे जाम कर प्रदर्शनकारी शांति से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन, अब उनके सब्र का बांध टूटता नज़र आ रहा है.

समिति के संयोजक मुरारी लाल सैनी ने कहा है, "यदि सरकार से वार्ता नहीं होती है तो यहीं से पूरे राज्य में चक्काजाम करने का एलान कर दिया जाएगा."

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