सीबीआई ने जिसे मृत घोषित किया उस ज़िंदा महिला की कहानी

बादामी देवी

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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, सिवान से बीबीसी हिंदी के लिए

बिहार के सिवान शहर की कसेरा टोली की गलियों में बर्तनों और सोने-चांदी की मंझोली दुकानों के बीच से एक पतली गली निकलती है. इस पतली गली के किनारे पर ही एक मकान है, जिसके बारे में लोग बताने से हिचकते हैं.

मकान का मुख्य दरवाज़ा पुराने ढंग का लकड़ी का भारी दरवाज़ा है. इस दरवाज़े के भीतर घुसते ही आपको हल्के हरे रंग से पुते हुए मोटे-मोटे गोलाकार खंभे मिलेंगे. पूरे मकान में इस उमस भरी गर्मी में हवा बमुश्किल घुस पाती है.

मकान के पहले तल्ले पर जाने के लिए पतली सीढ़ियों पर अंधेरा पसरा है. मोबाइल की रोशनी के सहारे इस अंधेरे को पार कर एक बहुत ही संकरा रास्ता है. जिससे गुज़रकर आप जिस कमरे में पहुंचते है वहां भी बल्ब इतनी कम रोशनी दे रहे कि कोई किसी का चेहरा साफ़- साफ़ नहीं दिख सकता.

लेकिन बहुत सामान्य से दिखने वाले घर में भी आप बिना किसी 'रेफरेंस' के नहीं जा सकते. जबकि दो कमरों के इस घर में सिर्फ़ एक बुजुर्ग औरत रहती है. ये बुजुर्ग औरत खुद को दिल का मरीज़ बताती है और दरवाज़ा, दीवार या फिर कोई ठोस चीज पकड़ कर ही चल पाती है.

कौन हैं बादामी देवी ?

ये बूढ़ी औरत बादामी देवी हैं. 84 साल की बादामी देवी आजकल ख़बरों में है. इसकी वजह है कि सीबीआई ने उन्हें सीबीआई कोर्ट में बीते 24 मई को मृत घोषित कर दिया था. जिसके बाद बादामी खुद सशरीर 3 जून को मुज़फ़्फ़रपुर सिविल कोर्ट पहुंचीं और जज के सामने पेश होकर कहा, "हुज़ूर मैं ज़िंदा हूं."

दरअसल, बादामी देवी बिहार के सिवान ज़िले के पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में गवाह हैं. सीबीआई की चार्ज़शीट कैलेन्डर में गवाह नंबर 35 के तौर पर दर्ज बादामी देवी के पति का नाम सत्यदेव प्रसाद है. कपड़े की दुकान चलाने वाले सत्यदेव प्रसाद की मौत 1998 में किडनी की बीमारी से हो गई थी. बादामी और सत्यदेव की अपनी कोई संतान नहीं थी.

बादामी देवी के नज़दीकी लोगों के मुताबिक, "उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी, लेकिन उन्होंने सपना देवी नाम की एक बच्ची को पाला-पोसा. बाद में जिसकी शादी पडरौना (कुशीनगर) के राजेश साहा से हुई. जिनकी एक बेटी आरती साहा ने सिवान में विजय गुप्ता (राजदेव रंजन हत्याकांड का एक आरोपी) से प्रेम विवाह किया. अभी बादामी देवी की यही नातिन (आरती साहा) उनकी देखभाल कर रही है."

लेकिन ये सवाल उठना लाजिमी है कि आख़िर बादामी जैसी बुजुर्ग महिला का राजदेव रंजन हत्याकांड से क्या संबंध है और क्यों वो इस मामले में गवाह हैं? इस सवाल का जवाब बादामी देवी के विवादित मकान में है.

बादामी देवी

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मकान का विवाद और राजदेव रंजन

तकरीबन 600 वर्ग गज में बने इस चार तल्ले के मकान का विवाद बादामी देवी और वीरेन्द्र पांडेय के बीच है. चूंकि ये ज़मीन बाज़ार में है और मकान कॉर्नर का है, इसलिए इस प्रॉपर्टी की अच्छी क़ीमत है. साल 1998 में वीरेन्द्र पांडेय इस मकान में किराएदार के तौर पर रहने आए थे.

एलआईसी और पोस्ट ऑफ़िस स्कीम एजेंट वीरेन्द्र पांडेय इस मकान में ग्रांउड फ्लोर पर रहते हैं.

उन्होंने बताया, "मुझे बादामी देवी ने पावर ऑफ़ एटार्नी लिखकर दी थी. जिसके बाद मैंने साल 2010 में इस मकान की रजिस्ट्री बादामी देवी को आठ लाख रुपये चुकाकर अपनी पत्नी बेबी पांडेय के नाम करवा दी थी. हमारे और बादामी देवी के बीच आपसी समझ ये थी कि बादामी जी जब तक जीवित हैं तब तक उन्हें इस मकान में रहने का अधिकार होगा. उसके बाद इस मकान पर मेरा सर्वाधिकार होगा."

हालांकि बादामी देवी का कहना है, "मुझसे धोखे से मकान को लिखवा लिया गया है. और मुझे ये मकान वापस चाहिए. वीरेन्द्र पांडेय सीबीआई के साथ मिलकर मेरी हत्या करने की साजिश रच रहा है."

मकान के इस विवाद में अवर न्यायाधीश संतोष कुमार उपाध्याय ( सिवान) ने साल 2018 में वीरेन्द्र पांडेय के पक्ष में फ़ैसला दिया था जिसके बाद बादामी देवी की तरफ़ से अपील दायर की गई है. यानी ये मामला अभी न्यायालय के अधीन है.

लेकिन मकान के इस मामले का पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड से क्या संबंध है? राजदेव रंजन हत्याकांड में बचाव पक्ष के वकील शरद सिन्हा इसका जवाब देते हैं.

वो बताते हैं, "सीबीआई का पक्ष है कि इस मकान को वीरेन्द्र पांडेय के कब्ज़े से मुक्त कराने के एवज़ में अज़हरूद्दीन बेग उर्फ़ लड्डन मियां ने विजय कुमार गुप्ता सहित पांच लोगों से राजदेव रंजन की हत्या करवाई. इसलिए इस केस में बादामी देवी की गवाही अहम है."

अज़हरूद्दीन बेग उर्फ़ लड्डन मियां को दिवंगत राजद नेता शहाबुद्दीन का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था और विजय कुमार गुप्ता बादामी देवी की नातिन यानी आरती साहा के पति हैं. हालांकि क्या बादामी देवी और वीरेन्द्र पांडेय, दोनों ही राजदेव रंजन से परिचित थे, इस सवाल पर दोनों का जवाब, नहीं है.

इस केस के गवाह वीरेंद्र पांडेय और बादामी देवी की नातिन आरती साहा दोनों ने ही बीबीसी से कहा, "हमारे मकान के संबंध का राजदेव रंजन केस से क्या संबंध है, ये हमें समझ नहीं आता."

बादामी देवी

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राजदेव रंजन हत्याकांड

बिहार के सिवान ज़िले के पत्रकार राजदेव रंजन हिंदी दैनिक हिंदुस्तान से जुड़े हुए थे. क्राइम बीट की वो ख़बरें अक्सर लिखते थे. राजदेव रंजन की 13 मई 2016 की शाम को सिवान में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

इस मामले की पहली एफ़आईआर अज्ञात लोगों पर स्थानीय थाने में हुई जिसके बाद जांच के क्रम में सात आरोपियों को चार्ज़शीट किया गया जिसमें अज़हरूद्दीन बेग उर्फ़ लड्डन मियां, विजय कुमार गुप्ता, रोहित कुमार सोनी, राजेश कुमार, रिशु कुमार जायसवाल, सोनू कुमार गुप्ता सहित एक नाबालिग शामिल था. गौरतलब है कि विजय कुमार गुप्ता (सरिता साहा के पति) और सोनू कुमार गुप्ता ( सरिता साहा के देवर) का ही संबंध बादामी देवी से है.

17 मई 2016 को बिहार सरकार ने इस हत्याकांड की जांच की सिफ़ारिश सीबीआई से की जिसने 15 सितंबर 2016 को मामला दर्ज किया.

सीबीआई ने इस मामले में अगस्त 2018 में आरोप पत्र दाख़िल किया. इस हत्याकांड में सबसे पहले एक नाबालिग को चार्ज़शीट किया गया जिसके बाद एक सप्लीमेंट्री चार्ज़शीट हुई जिसमें शहाबुद्दीन का भी नाम शामिल किया गया.

सीबीआई का पक्ष था कि राजदेव रंजन लगातार मोहम्मद शहाबुद्दीन के ख़िलाफ़ ख़बरें लिखते थे और 'सिवान जेल से जारी हिटलिस्ट पर हत्याएं' शीर्षक से लिखी ख़बर के कारण उनकी हत्या हुई. इस मामले में 98 गवाहों की गवाही होनी है और कुल 158 डाक्यूमेंट हैं. इसके अलावा ज़रूरत पड़ने पर किसी अन्य व्यक्ति को भी गवाही के लिए बुलाया जा सकता है. 98 गवाहों में से अब तक महज़ 28 की ही गवाही हो पाई है.

बादामी देवी

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बादामी देवी यानी मुर्दा गवाह

बादामी देवी और सकलदेव सिंह नाम के एक दूसरे गवाह को इस मामले में गवाही देने के लिए सीबीआई ने न्यायालय में बीती दो मई को याचिका दी थी. जिसके बाद कोर्ट ने सीबीआई को दस्ती (हैंड टू हैंड) सम्मन दिया, लेकिन सीबीआई ने मुज़फ्फ़रपुर की ए डी जे -1 सह विशेष एम पी -एम एल कोर्ट में बीती 24 मई को विशेष न्यायाधीश पुनीत कुमार गर्ग के सामने बादामी देवी का 'डेथ वैरिफ़िकेशन रिपोर्ट' पेश कर दिया.

अखबार में छपी इस खबर को जब बादामी देवी की नातिन आरती साहा ने देखा तो उन्होंने इस मामले की अगली सुनवाई यानी 3 जून को बादामी देवी को सशरीर पेश कर दिया. बादामी देवी ने कोर्ट को पेश किए हलफ़नामे में लिखा, "सीबीआई के पदाधिकारी ने मुझसे कोई संपर्क नहीं किया है और मुझे मृत घोषित कर दिया है. ये साजिश है."

कोर्ट ने सीबीआई को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 20 जून को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब देने को कहा है. कोर्ट के इस नोटिस के बाद 4 जून को सीबीआई के अधिकारी बादामी देवी के कसेरा टोली स्थित घर गए जहां बादामी देवी और आस पास के मोहल्ले वालों से पूछताछ की.

स्थानीय मीडिया से सीबीआई अधिकारियों ने सिर्फ़ इतना कहा, "जांच चल रही है और जिसको मृत घोषित किया था, उनसे बात हो गई है."

बादामी देवी

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बचाव पक्ष के वकील शरद सिन्हा कहते हैं, "ये देश की प्रीमियर एजेंसी की लापरवाही की हद है. सीबीआई का ठीक यही रवैया मुज़फ्फ़रपुर के नवरुणा केस में भी देखने को मिलता है."

साल 2016 में हुए राजदेव रंजन हत्याकांड को छह साल बीत चुके है. इस हत्याकांड के एक आरोपी यानी मोहम्मद शहाबुद्दीन की मौत कोविड से हो चुकी है जबकि बाक़ी सभी आरोपी जेल में है.

राजदेव रंजन की पत्नी आशा रंजन कहती हैं, "अब तक 30 गवाही भी नहीं हो पाई है. इस हिसाब से तो मेरी मौत के बाद भी गवाही चलती रहेगी. न्याय में समय का महत्व है. अगर इंसाफ़ देर से मिले तो उसका महत्व घट जाता है. अगर सीबीआई गंभीर होती तो इतनी बड़ी चूक नहीं होती कि ज़िंदा बादामी को मृत घोषित कर दें."

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