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'रामपुर: बादल को तो बचा लिया पर सुमित को बचाते डूब गया फुरक़ान'
- Author, शहबाज़ अनवर
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश के रामपुर में कोसी नदी में नहाते समय दो युवाओं को डूबता देख एक अनजान किशोर फुरक़ान ने नदी में छलांग लगा दी.
बादल नाम के एक किशोर को तो फुरक़ान ने नदी से बाहर निकाल लिया, लेकिन बाद में उसके साथी सुमित को बचाने के लिए जब फिर नदी में कूदा तो वह भी बाहर नहीं निकल सका और दोनों डूब गए.
शुक्रवार शाम करीब साढ़े पांच बजे सुमित और फुरक़ान के शवों को कोसी नदी से बाहर निकाला गया. बादल को एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, हालांकि वह अब ख़तरे से बाहर है.
टांडा थाना इंचार्ज अजयपाल सिंह ने बीबीसी से मामले की पुष्टि करते हुए कहा, "रामपुर के टांडा, दढ़ियाल क्षेत्र के गांव पर्वतपुर निवासी लगभग 13 वर्षीय सुमित पुत्र संजीव अपने गांव के ही दोस्त बादल (14 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय रामचंद्र के साथ कोसी नदी में नहाने गए थे, उस समय दिन के क़रीब ढाई बज रहे थे. यह नदी अकबराबाद के निकट नया गांव के सामने से बह रही है. पानी में दोनों दोस्त नहाने उतरे, लेकिन अचानक गहराई अधिक होने के कारण वे डूबने लगे".
थाना इंचार्ज आगे कहते हैं, "पूछताछ में पता चला कि किशोरों को डूबता देख वहां पास ही खेत पर मौजूद फुरक़ान उन्हें बचाने के लिए नदी में कूद गया. बादल को तो फुरक़ान ने बाहर निकाल लिया, लेकिन जब वह दोबारा सुमित को बचाने नदी में उतरा तो वह भी उसके साथ नदी में डूब गया. शाम साढ़े पांच बजे के लगभग दोनों मृतकों के शवों को नदी से निकाला गया. घर वाले बिना पोस्टमार्टम कराए शवों को अपने साथ ले गए."
पर्वतपुर गांव के प्रधान महेश पाल सैनी ने बीबीसी से कहा, "ये काफी दर्दनाक हादसा था, इसमें दो बच्चों की मौत हुई है. मरने वालों में एक हमारे गांव में चौहान परिवार से सुमित है जबकि दूसरा किशोर अकबराबाद के रहने वाले छोटे का भांजा फुरक़ान है."
उन्होंने यह भी कहा, "हां, सुमित और बादल को बचाने के प्रयास में ही फुरक़ान की डूबने से मौत हुई है, हालांकि बादल को घटना में बचा लिया गया है."
मृतक सुमित के रिश्ते के दादा राम अवतार घटना का ज़िक्र करते हुए कहते हैं, "देखिए सुमित की जान बचाने के लिए फुरक़ान ने अपनी जान न्योछावर कर दी, इससे बड़ी बात कोई नहीं हो सकती है. सुमित अपने घर का इकलौता बेटा था और गांव के ही एक स्कूल में कक्षा आठ का छात्र था. अब घर में उसकी एक छोटी बहन ही बची है."
उधर, नदी में डूबने से बचाए गए बादल को क्षेत्र के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बीबीसी ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई. ग्रामीणों के मुताबिक़ बादल के पिता का स्वर्गवास हो चुका है. घर में दो भाई और माँ ही हैं.
"कहां से लाएं अपने जिगर के टुकड़े को"
मृतक फुरक़ान घटना वाले दिन अपने मामा छोटे के यहां अकबराबाद आए हुए थे. वैसे, उनका गाँव गांगन नंगली यहां से लगभग 10 किलोमीटर दूर था.
फुरक़ान के परिजनों से जब इस बारे में पूछा गया तो उनके बड़े भाई गुलफाम ने रूंधे गले से कहा, "हमें अकबराबाद से रिश्तेदार की कॉल आई थी, उन्होंने बताया कि फुरक़ान की डूबने से मौत हो गई है. हम जब वहां पहुंचे तो लोग इस बारे में ज़िक्र कर रहे थे कि फुरक़ान ने किस तरह अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए सुमित को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन इस चक्कर में उसकी भी डूबने से मौत हो गई.अपने जिगर के टुकड़े को कहां से लाएं."
फुरक़ान घर में सबसे छोटे भाई थे जो दिल्ली में फोटो आदि बनाने का काम करते थे. पिता अफसर अली किसान हैं और बड़े भाई राजमिस्त्री हैं.
फुरकान का एहसान मान रहे हैं मृतक सुमित के पिता
इस घटना में सुमित और फुरक़ान दोनों की ही मौत हो चुकी है, लेकिन सुमित के पिता संजीव कुमार के दिल में फुरक़ान के प्रति सम्मान का भाव नज़र आता है.
वह कहते हैं, "देखिए मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं है. फुरक़ान की भी मौत हो चुकी है, लेकिन उसने जिस तरह सुमित को बचाने की कोशिश में अपनी भी जान गंवा दी, तो इतना कौन करता है. फुरक़ान ने हमारे बेटे के लिए इतना किया तो सांत्वना देने उसके घर भी जाएंगे."
संजीव कुमार मज़दूरी करते हैं और अपने बेटे को याद कर बार-बार रो पड़ते हैं.
इंसानियत का रिश्ता सबसे बड़ा
क्षेत्र में इन किशोरों की मौत के बाद जहां लोगों में शोक है, वहीं फुरक़ान की हिम्मत को लेकर भी चर्चाएँ हो रही हैं.
इस बारे में मृतक सुमित के रिश्तेदार राम अवतार कहते हैं, "फुरक़ान ने एक बहुत बड़ी इंसानियत दिखाई है. इंसानियत का रिश्ता ही सबसे बड़ा होता है."
कोसी नदी में जहां ये हादसा हुआ, वो दोनों गांवों अकबराबाद और पर्वतपुर से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी है.
नदी के तटीय इलाक़ों में तेज़ बहाव होता है.ग्रामीण शिव कुमार के मुताबिक़ नदी में अधिक पानी तो नहीं है, लेकिन जिस स्थान पर हादसा हुआ है, वहां गहराई थी और पानी था.
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