दिल्ली का मुंडका अग्निकांड और लापता रजिस्टर में दर्ज वो 30 नाम

लापता लोगों के परिजन
    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

सोनी कुमारी, तानिया, नरेंद्र, मोहिनी, पूजा, भारती देवी, गीता देवी….

ऐसे 30 नाम हैं जो शुक्रवार शाम पांच बजे से लापता हैं. ये नाम दिल्ली के संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल के हेल्प डेस्क पर रखे एक रजिस्टर में दर्ज हैं. इन 30 नामों में 25 महिला हैं और पांच पुरुष.

ये सभी लापता लोग मुंडका की उसी बिल्डिंग में काम करते थे जहां शुक्रवार शाम करीब पांच बजे आग लगी. जिसमें अब तक 27 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है.

जिन लोगों की मौत हुई या जो घायल हुए उन्हें सबसे पहले संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल में ही लाया गया. यही वजह है कि परिवार वाले शुक्रवार रात से हॉस्पिटल में जमा हैं और अपनों की खोजबीन कर रहे हैं लेकिन कहीं कोई जानकारी नहीं मिल रही.

लापता रजिस्टर में नाम दर्ज करने के बाद एक लंबा इंतज़ार परिवार के हिस्से आया है.

हेल्प डेस्क से बाएं तरफ हॉस्पिटल का शवगृह है जिसमें 27 शव रखे हुए हैं. हॉस्पिटल में काम करने वाले स्टाफ़ का कहना है कि शव इतनी बुरी तरह जल चुके हैं कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल है.

क्या लापता रजिस्टर में दर्ज नाम वे ही हैं जो शव शवगृह में रखे हैं. इसके बारे में फ़िलहाल कोई भी बोलने के लिए तैयार नहीं है.

संजय गांधी अस्पताल

किसी का बेटा गुम है तो किसी की बेटी, कोई अपनी पत्नी की तलाश में भटक रहा है तो कोई अपनी मां की. परिवार वालों की उम्मीद बढ़ते समय के साथ धुंधली होती जा रही है कि उनके अपने अभी भी ज़िंदा हैं भी या नहीं.

हॉस्पिटल में एंबुलेंस आती है तो लोग उसके पीछे भागने लगते हैं कि कहीं उनका अपना उसमें ना हो लेकिन पुलिस किसी को भी शवगृह के पास जाने नहीं देती.

रातभर से रोते बिलखते परिवारों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. मीडिया के एक जैसे बार-बार पूछे जाने वाले सवालों से पीड़ित परिवार तंग आ चुके हैं. नाम, पता, काम बताते-बताते परिजनों के शब्द सूखने लगे हैं, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं है.

इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि राजधानी दिल्ली में इतना बड़ा हादसा आख़िर हुआ कैसे जिसमें 27 लोग मारे गए और कई घायल हो गए. क्या जब चार मंज़िला इमारत में आग लगी तो समय पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंच पायी थीं? कितनी देर में यहां राहत और बचाव का काम शुरू हो पाया था? आख़िर इन लोगों को क्यों नहीं बचाया जा सका. इसके लिए शुरू से पूरा घटनाक्रम समझना ज़रूरी है.

जिस इमारत में हादसा हुआ

हादसा इसी इमारत में हुआ
इमेज कैप्शन, हादसा इसी इमारत में हुआ

पश्चिमी दिल्ली के बाहरी इलाके मुंडका की चार मंज़िला इमारत दिखने में एक बड़ा कॉम्प्लेक्स लगती है. मुंडका स्टेशन से करीब दो सौ मीटर दूर ये इमारत दिल्ली रोहतक रोड पर स्थित है. ये दिल्ली का एक व्यस्त हाईवे है जिस पर आमतौर पर भारी ट्रैफिक रहता है.

तीन मंज़िला इमारत में सबसे नीचे बेसमेंट है. बेसमेंट के ऊपर ग्राउंड फ्लोर और उसके बाद एक के ऊपर एक, तीन फ्लोर.

ग्राउंड फ्लोर पर दफ्तर और दुकानें हैं. वहीं पहली और दूसरी मंज़िल पर सीसीटीवी बनाने वाली कंपनी थी और तीसरी मंज़िल पर वाटर प्यूरिफ़ायर की असेंबलिंग से जुड़ा काम होता था.

शुक्रवार को क्या हुआ

शुक्रवार का दिन भी आम दिनों की तरह की शुरू हुआ था. दोपहर तीन बजे तक इमारत में सब कुछ अच्छा चल रहा था.

कैमरा सर्विस इंजीनियर वीरेंद्र सिंह उस समय पहली मंजिल पर काम कर रहे थे. वीरेंद्र बताते हैं, "कल ऑफ़िस में करीब चार बजे से मीटिंग थी. सारे लोग मीटिंग में हिस्सा ले रहे थे जो दूसरी मंजिल पर चल रही थी. हम छह आदमी पहली मंजिल पर थे और मीटिंग में नहीं जा पाए. जब साढ़े चार बजे आग लगी तो दूसरी मंजिल के लोग बाहर नहीं निकल पाए."

वीरेंद्र बताते हैं कि उन्होंने पहली मंजिल से कूदकर अपनी जान बचाई. "जहां सीढ़ियां हैं वहां से आग शुरू हुई. पहली मंजिल पर लगे शीशे को तोड़कर हम लोग बाहर आए. मैं आधे घंटे तक अंदर फंसा रहा. मुझे कई जगह चोट लगी है."

वीरेंद्र
इमेज कैप्शन, कैमरा सर्विस इंजीनियर वीरेंद्र सिंह

संजय गांधी हॉस्पिटल में पीड़ित परिवारों का भी यही कहना था कि इमारत में आग साढ़े चार बजे के करीब लगी. इसके तुरंत बाद लोगों ने फायर डिपार्टमेंट को सूचित किया.

स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब एक घंटे की देरी से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंची. जब तक फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आईं उस समय तक ज़्यादातर अंदर फंसे लोगों ने दम तोड़ दिया था.

आग लगने और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंचने के बीच करीब एक घंटे का फ़ासला था. इस बीच खुद स्थानीय लोगों ने आग से झुलसती इमारत से लोगों को जीवित बाहर निकालने का काम किया.

हालांकि दिल्ली फायर सर्विस का कहना है कि उन्हें आग लगने की सूचना देरी से मिली. दिल्ली फायर सर्विस के डायरेक्टर अतुल गर्ग ने बीबीसी से बातचीत में बताया, " शाम 4 बजकर 50 मिनट पर हमें कॉल मिली थी और हमारी गाड़ी करीब 5 बजकर 8 मिनट पर पहुंच गई थी. आग पहले लग गई थी लेकिन स्थानीय लोगों ने देर से हमें कॉल किया. स्थानीय लोग पहले खुद ही आग बुझाते रहे और लोगों को निकालते रहे."

वीडियो कैप्शन, मुंडका अग्निकांडः अपनी बेटी को तलाशती मां का दर्द

अतुल गर्ग का कहना है कि पांच अलग-अलग स्टेशनों से शुरू में कुल आठ फायर ब्रिगेड की गाड़ियां निकाली गई थी ताकि आग को जल्द से जल्द बुझाया जा सके. वो बताते हैं, "पीरागढ़ी से आगे गाड़ी मूव ही नहीं हो रही थी. जब आग लगी तो उन लोगों ने कुछ काम किया जिसकी वजह से वहां लोग जमा हो गए और बिल्डिंग के आगे ट्रैफिक धीमा हो गया जिसका असर इस रोड की पूरी ट्रैफ़िक पर पड़ा और गाड़ियों के वहां पहुंचने में देरी हुई. हमारी गाड़ियों को वहां पहुंचने में करीब बीस मिनट का समय लगा है."

जिस इमारत में आग लगी मधु लाखड़ा का घर उसके पीछे है. हादसे के वक्त मधु लाखड़ा वहीं पर मौजूद थीं.

लापता डेस्क

मधु लाखड़ा बताती हैं, ''चार मंज़िला इमारत से उतरने का एक ही छोटा सा रास्ता है वो भी इमारत के साथ लगती गली में है. पांच बजे शाम को क्रेन आई. क्रेन की मदद से स्थानीय लोगों ने फंसे लोगों को इमारत से बाहर निकाला. कुछ लोगों ने रस्सियां डालीं, कुछ ने सीढ़ियां लगाईं, जैसे-तैसे करके लोगों को बचाया गया. करीब 60-70 लोगों को इसी तरह निकाला गया."

जिन लोगों को निकाला गया उनमें एक रेणु भी थीं. जो तीन सालों से कैमरा बनाने का काम कर रही थीं. रेणु की बेटी वंशिका ने बताया, "चार बजे के करीब मीटिंग चल रही थी. जब आग लगी तो उन्होंने फोन कर बताया कि आग लग गई है. बहुत मुश्किल से हमने उनको बचाया. तब से वो ठीक से बात भी नहीं कर पा रही हैं."

मुंडका में जिस इमारत में आग लगी उसके सामने चाय की दुकान चलाने वाले दिनेश शाह बताते हैं, "करीब साढ़े पांच बजे फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आनी शुरू हुईं. लोग कुर्सी, टेबल से पहली, दूसरी मंजिल पर शीशे तोड़ने की कोशिश कर रहे थे."

देर रात तक फायर ब्रिगेड का गाड़ियों ने इमारत में लगी आग को बुझाने का काम किया. एनडीआरएफ की करीब चालीस लोगों की टीम ने भी उनका साथ दिया.

घायलों और मृत लोगों को मंगोलपुरी के संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल ले जाया गया. रातभर से वो परिवार हॉस्पिटल में जमा हैं जिनके अपने इस इमारत में काम करते थे.

शनिवार दोपहर तक एनडीआरएफ की टीमें इमारत में सर्च ऑपरेशन का काम करती रहीं. इमारत के आसपास दिल्ली पुलिस, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल की तैनाती है. प्रशासन से जुड़े तमाम आला अधिकारी इमारत का मुआयना करने आ रहे हैं और ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आग कैसे लगी.

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