दिल्ली के मुंडका की वो इमारत, जहां लगी आग में कई ज़िंदगियाँ ख़ाक हो गईं

मुंडका आग
    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंडका से

पश्चिमी दिल्ली के बाहरी इलाक़े मुंडका की एक व्यवसायिक इमारत में आग लगने से अब तक कम से कम 27 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है. मारे गए लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका भी ज़ाहिर की गई है.

जिस इमारत में आग लगी वो दिखने में एक बड़ा कॉम्प्लेक्स लगती है. मुंडका मेट्रो स्टेशन से क़रीब दो सौ मीटर दूर ये इमारत दिल्ली-रोहतक रोड पर स्थित है. ये दिल्ली का एक व्यस्त हाइवे है जिस पर आमतौर पर भारी ट्रैफिक रहता है.

इस चार मंज़िला इमारत में बेसमेंट भी है. ग्राउंड फ्लोर पर दफ़्तर और दुकानें हैं. वहीं पहले से तीसरी मंज़िल पर सीसीटीवी बनाने वाली कंपनी का दफ़्तर है.

हादसे में मारे गए अधिकतर लोग इसी कंपनी के कर्मचारी हैं. बीबीसी की टीम ने इस इमारत का दौरा किया और यहां के हालात को समझने की कोशिश की.

ऊपर जाने का सिर्फ़ एक ही रास्ता

बिल्डिंग के एक तरफ़ दिल्ली-रोहतक हाइवे है और बगल में एक गली. ऊपर जाने के लिए गली से सीढ़ियां जाती हैं. यही ऊपर दफ़्तर तक जाने का एकमात्र रास्ता है.

आग बुझने और इमारत के ठंडा होने के बाद बीबीसी की टीम अग्निशमन दल के साथ इसी सीढ़ियों से इमारत में दाख़िल हुई है.

ये संकरी सीढ़ियां ऊपरी मंज़िलों तक जाती है. यहां एक छोटी लिफ्ट भी लगी है. ये सीढ़ियां क़रीब साढ़े तीन फुट चौड़ी होंगी.

मुंडका आग

इसके अलावा बिल्डिंग के ऊपरी हिस्सों में जाने का कोई और रास्ता नहीं है. कोई फ़ायर एक्ज़िट भी बिल्डिंग में नहीं है.

आग लगने के बाद ये इमारत पूरी तरह खाक हो चुकी है. अब बस कंक्रीट का ढांचा ही बचा है.

सीढ़ियों से ऊपर जाने पर एक बड़े से फ़ाटक (बड़ा गेटनुमा ढाचा) में छोटा दरवाज़ा है जो इन सीढ़ियों से गली की तरफ़ खुलता है. आग बुझाए जाने के बाद भी ये फाटक बंद था और इसका एक छोटा दरवाज़ा ही खुला था जिससे एक बार में एक ही व्यक्ति बाहर आ सकता है.

इमारत का फ़र्नीचर पूरी तरह जल चुका है. फॉल्स सीलिंग भी राख हो चुकी है. बस कंक्रीट का ढांचा बचा है जो अब खड़ा है.

सीढ़ियों में घुसते ही ग्राउंड फ्लोर में एक प्रकार का गोदाम है जो गत्तों से भरा है. ऊपर सीढ़ियां पहली मंज़िल में दफ्तर की तरफ़ खुलती हैं. यहां भी सबकुछ राख हो चुका है. बड़ी मात्रा में काग़ज़ और गत्ता यहां भी था जो अब भी सुलग रहा है.

जैसे-जैसे ऊपर बढ़ते हैं घुटन और शरीर को जला देने वाली तपन का अहसास होता है. इमारत की ऊपरी मंज़िलों में अभी भी धुआं भरा था इसलिए हम वहां नहीं पहुंच सके. चंद मिनट यहां बिताने के बाद हम वापस लौट आए.

मुंडका आग

आग से बचाव का कोई इंतज़ाम नहीं

इस इमारत में सीसीटीवी बनाने वाली कंपनी का दफ़्तर था. यहां सेल्स और कंपनी के प्रबंधन का काम होता था और बड़ी तादाद में कर्मचारी यहां काम करते थे.

इस इमारत को एक बड़े कारोबारी दफ़्तर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था. लेकिन आग लगने की स्थिति बचाव के लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं थी.

सीढ़ियों पर या इमारत में कहीं और फ़ायर फ़ाइटिंग सिस्टम हमें नज़र नहीं आया. ना ही यहां अग्निशमन उपकरणों जैसे- फ़ायर एस्टेंगुईशर की मौजूदगी का कोई निशान दिखाई नहीं दिया. स्प्रिंकलर और हाइड्रेंट सिस्टम भी यहां मौजूद नहीं था.

यहां आग बुझाने में जुटे रहे अग्निशमन दल के कर्मचारियों के मुताबिक़, इमारत के ऊपरी हिस्से तक सीढ़ियों के रास्ते पहुंच पाना आसान नहीं था. संकरी सीढ़ियों ने मुश्किल हालात को और मुश्किल कर दिया था

इस इमारत के सामने से हाई वोल्टेज तारें भी गुज़र रही हैं. जिनकी वजह से भी बचाव और राहत कार्य में दिक्कत आई होगी.

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गोदाम की तरह भी हो रहा था इस्तेमाल

इमारत के कई हिस्सों का इस्तेमाल गोदाम की तरह भी हो रहा था. यहां सीसीटीवी बनाने से जुड़े सामान के अलावा भारी मात्रा में गत्ता और काग़ज़ भी मौजूद था.

मलबा देखकर ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यहां पैकिंग का काम भी हो रहा होगा.

इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर हमें इसी तरह का सामान भरा हुआ भी नज़र आया.

स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत में सीसीटीवी कंपनी के अलावा और कंपनियों के दफ्तर भी हो सकते हैं.

बिल्डिंग के पास नहीं थी फ़ायर एनओसी

आउटर डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी समीर शर्मा के मुताबिक इस इमारत के पास अग्निशमन विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं था.

नियमों के तहत किसी भी व्यवसायिक इमारत के लिए अग्निशमन विभाग से एनओसी हासिल करना अनिवार्य होता है. इसके अलावा इस तरह की इमारतों का नियमित अंतराल पर निरीक्षण भी होता है.

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पुलिस के मुताबिक इमारत के मालिक की पहचान मनीष लकड़ा के रूप में हुई है जो अभी फरार हैं.

दिल्ली पुलिस मनीष की गिरफ्तारी की कोशिशें कर रही है. हालांकि पुलिस ने यहां चल रही कंपनी के संचालकों को गिरफ़्तार कर लिया है.

समीर शर्मा के मुताबिक इस हादसे में 27 लोग मारे गए हैं और 12 से अधिक लोग घायल हुए हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है.

आग लगने की वजह

आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन ये माना जा रहा है कि इसकी वजह शॉर्ट सर्किट हो सकती है.

चश्मदीदों के मुताबिक आग पहली मंज़िल पर लगी थी और शुरुआत में आग बहुत तेज़ नहीं थी और सिर्फ़ धुआं उठ रहा था

चश्मदीद ये दावा भी करते हैं कि अग्निशमन दल को घटनास्थल तक पहुंचने में घंटे भर का समय लग गया था.

अधिकतर कर्मचारी इमारत की पहली और दूसरी मंज़िल पर फंसे थे. जीने में धुआं भर जाने के कारण कर्मचारी सीढ़ियों के रास्ते नीचे नहीं आ पा रहे थे.

स्थानीय लोगों ने एक क्रेन की मदद से फंसे हुए लोगों को निकालने की कोशिश की. सीढ़ियों के सहारे भी लोगों को नीचे उतारा गया.

मुंडका आग

मौके पर मौजूद रहे एक चश्मदीद विजय बताते हैं कि संसाधनों की कमी की वजह से समय रहते लोगों को निकाला नहीं जा सका. आग में फंसे कई लोग ऊपर से ही नीचे भी कूद गए, जिससे भी लोगों की जान गई.

इमारत में ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग तेज़ी से फैलती चली गई. यही वजह रही कि आग बुझाने में छह घंटे से अधिक का समय लगा.

आग लगने की इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी इमारत में बिना अग्निशमन विभाग की एनओसी के दफ्तर कैसे चल रहे थे.

घटना का पूरा सच जांच के बाद ही सामने आएगा. लेकिन अभी यहां लापरवाहियां स्पष्ट नज़र आ रही हैं. ये लापरवाहियां बिल्डिंग मालिक ने भी की हैं और प्रशासन ने भी और कंपनियों ने भी जिनके दफ़्तर यहां थे.

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