लाउडस्पीकर विवाद में अब बाल ठाकरे की एंट्री, राज ठाकरे ने शेयर किया वीडियो

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अपने राजनीतिक करियर को नया जीवन देने के लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे अपने चाचा और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की तरह आक्रामक हिंदुत्व का सहारा लेते रहे हैं.
पिछले कुछ समय से वो लगातार लाउडस्पीकर को मुद्दा बना रहे हैं. वे महाराष्ट्र की सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने को लेकर जोर शोर से भाषण दे रहे हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं.
इसके लिए उन्होंने 3 मई यानी ईद के दिन की डेडलाइन भी रखी थी और अपने समर्थकों से कहा था कि इसके बाद से वो अज़ान के वक्त लाउडस्पीकर से हनुमान चालीसा का पाठ करें.
लाउडस्पीकर से अज़ान के मुद्दे को अब उन्होंने शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे से जोड़ दिया है. बुधवार को उन्होंने ट्विटर पर बाला साहब ठाकरे का एक पुराना वीडियो पोस्ट किया है. इसमें बाल ठाकरे भी लाउडस्पीकर से होने वाली नमाज़ का विरोध कर रहे हैं.
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वीडियो में बाल ठाकरे कह रहे हैं, ''जिस दिन इस महाराष्ट्र में हमारी सरकार आएगी. उस दिन सड़क पर होने वाली नमाज़ को बंद किए बिना हम खामोश नहीं बैठेंगे, क्योंकि धर्म ऐसा होना चाहिए जो राष्ट्र के विकास के आड़े नहीं आना चाहिए. उससे लोगों को तकलीफ न हो. हमारे हिंदू धर्म में अगर कहीं ऐसी तकलीफ किसी को हो रही होगी तो हमें आकर बताएं. मैं उसका बंदोबस्त करूंगा, लेकिन यह लाउडस्पीकर मस्जिद से नीचे ज़रूर आएंगे''
राज ठाकरे के इस वीडियो को ट्विटर से पोस्ट करने के बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने इस पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, ''बाला साहब का वीडियो ट्वीट करके वो क्या दिखाना चाहते हैं. उन्हें बाला साहब ठाकरे के बारे में क्या पता है. वो लोग बाला साहब ठाकरे को जीते जी छोड़कर हमें क्या हिंदुत्व सिखाएंगे?'
ऐसा ही कुछ बयान राज ठाकरे ने गुड़ी पड़वा के दिन एक रैली को संबोधित करते हुए दिया था. उन्होंने कहा था, "मैं धार्मिक रूप से कट्टर नहीं हूं लेकिन मुझे अपने धर्म पर गर्व है. जब धर्म बना होगा तब क्या लाउडस्पीकर्स थे? क्या आपने ऐसे लाउडस्पीकर्स दूसरे देशों में देखा है?"

बुधवार को राज ठाकरे ने एक बार फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एलान किया कि जब तक मस्जिदों के ऊपर लाउडस्पीकर बंद नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा.
राज ठाकरे ने कहा, "मैं अज़ान के ख़िलाफ़ नहीं हूं लेकिन वो घर में या मस्जिद के अंदर पढ़ी जाए. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के मुताबिक़ लाउडस्पीकर की आवाज़ 45 से 55 डेसिबल तक होनी चाहिए. ये आवाज़ घर में चलने वाले ग्राइंडर मिक्सर जितनी होती है. अगर इससे आगे जाएंगे तो कार्रवाई होगी.''
''हम महाराष्ट्र में शांति चाहते हैं. मस्जिद ही नहीं अगर मंदिरों के ऊपर भी अवैध लाउडस्पीकर हैं तो आप उसे भी निकालो. अगर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना हो रही है तो आगे क्या होगा ये भी मुझे देखना है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सरकार मानेगी ही नहीं तो आदेश का क्या फ़ायदा.''
वहीं दूसरी तरफ शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है, ''महाराष्ट्र में शांति है, महाराष्ट्र में कोई भी गैरक़ानूनी लाउडस्पीकर नहीं चल रहा है. आप माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. पूरे देश में लाउडस्पीकर का क़ानून बना है, उसका महाराष्ट्र में पालन हो रहा है.''

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महाराष्ट्र में भारी सुरक्षा बल तैनात
राज ठाकरे की चेतावनी के बाद मुंबई में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किया गया है. पुलिस का कहना है कि अभी तक कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई है. किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए कुछ जगहों पर नाकाबंदी की गई है और गाड़ियों की जांच की जा रही है.
राज ठाकरे का कहना है, ''हमारे कार्यकर्ताओं को पकड़ा जा रहा है. लेकिन, मैं पूछता हूं कि आज सुबह अज़ान करने वाली 135 मस्जिदों के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई की गई?''
वहीं, औरंगाबाद पुलिस ने दो दिन पहले भड़काऊ भाषण देने के आरोप में राज ठाकरे के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है. उन्हें इस संबंध में नोटिस भी जारी किया गया है.
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असहज शिवसेना
महाराष्ट्र की राजनीति में राज ठाकरे की बढ़ती सक्रियता को शिवसेना के लिए असहज स्थिति बताया जा रहा है. एक वक्त था जब शिवसेना मराठी अस्मिता के साथ आक्रामक हिंदुत्व की राजनीति करती थी. लेकिन अब उसके तेवर बदल गए हैं.
इसकी वजह है महाराष्ट्र में शिवसेना का कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर सरकार चलाना. उद्धव ठाकरे इस गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री हैं.
राज ठाकरे किसी तरह अपनी पार्टी को प्रासंगिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें यह मौका दिख रहा है. शिवसेना के गठबंधन सरकार में शामिल होने से खाली हुई जगह को वो भरना चाहते हैं.

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राज ठाकरे का राजनीतिक भविष्य
महाराष्ट्र की बदलती राजनीति के साथ राज ठाकरे ने भी अपनी रणनीति को बदला है.
राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को बने 16 साल हो गए हैं. उन्हें अभी तक राज्य की सरकार में हिस्सेदारी नहीं मिली है. जब मनसे का गठन हुआ था तब महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार थी.
उसके बाद 2014 में बीजेपी सत्ता में आ गई और शिवसेना के साथ मिलकर सरकार चलाई. उस समय भी मनसे को कहीं कोई हिस्सेदारी नहीं मिली.
राज ठाकरे का प्रभाव क्षेत्र मुंबई से बाहर नहीं है. उनकी ज्यादातर पकड़ मुंबई और नासिक में है. साल 2009 में राज ठाकरे की पार्टी मनसे के 13 विधायक जीते थे. इसके बाद 2014 और 2019 में उनका सिर्फ एक विधायक ही विधानसभा तक पहुंच सका.
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