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भारत में फैली हीट वेव का आप पर क्या असर होगा, गर्मी का मुक़ाबला कैसे करें
- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
क्या आपने मार्च-अप्रैल के महीने में धूप में न निकलने की हिदायतें पहले कभी सुनीं थीं?
क्या मार्च-अप्रैल के महीने में ही हवाओं में लू का अहसास हुआ था कभी?
क्या मार्च-अप्रैल के महीने में आपके धोए हुए कपड़े महज़ आधे-एक घंटे में सूख जाते थे?
क्या इससे पहले कभी मार्च-अप्रैल महीने में धूप में रखे आपके पौधे झुलसने लगे थे?
क्या इससे पहले मार्च महीने से ही ठंडे पानी, एसी की ठंडी हवा और आम-पने या नींबू-पानी की तलब के शिकार हुए थे आप? क्या पहले कभी मार्च-अप्रैल के महीनों के दौरान आपको हीटस्ट्रोक हुआ था? अगर इन सवालों के जवाब में आपकी ना है तो हैरान होने वाली कोई बात नहीं है.
ये आम बात थी भी नहीं. क्योंकि ख़ास बात ये है कि साल 1901 के बाद से अब तक के मार्च महीनों में 2022 वाला मार्च तीसरा सबसे गर्म था.
यानी भारत ने इस साल मार्च महीने से अब तक हीटवेव वाले पूरे 26 दिन देख लिए हैं.
और मौसम विभाग अगले पांच दिनों के लिए पूर्वी, मध्य और उत्तर भारत के क्षेत्रों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी कर चुका है.
वजह क्या है?
समय से पहले दस्तक दे चुकी भीषण गर्मी की प्रमुख वजह ये है कि इन दोनों महीनों में होने वाली थोड़ी-मोड़ी बारिश या बिजली गिरने और ओले गिरने के वाक़ये नदारद रहे हैं.
मतलब अगर इन महीनों में औसतन बारिश 30.4 mm होती रही थी तो इस साल ये महज़ 8.9 mm ही हुई है.
दूसरा, देश के पश्चिमी हिस्से से चलने वाले हवाएँ जब दक्षिणी और मध्य भारत की हवाओं से टकरातीं हैं तो मौसम ख़राब होता है यानी बारिश और तूफ़ान आते हैं. इस बार ये भी बहुत कम हुआ है.
आमतौर पर हीटवेव का दौर अप्रैल ख़त्म होने के साथ शुरू होकर मई के महीने में अपने शबाब पर होता है.
जबकि इस साल हीटवेव के पहला दौर 11 मार्च से ही देखने को मिला जो होली के त्योहार से भी पहले देखा गया.
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मार्च और अप्रैल में तेज़ गर्म हवाएं चलना असामान्य हैं और अगर कार्बन उत्सर्जन को वातावरण से घटाया नहीं गया तो जलवायु परिवर्तन के कारण ये हीटवेव मौसम चक्र का सामान्य हिस्सा बन सकती हैं.
इंपीरियल कॉलेज लंदन के ग्रैंथम इंस्टीट्यूट के मरियम ज़कारायह और फ़्रेडरिक ओटो के नए शोध के मुताबिक़ जलवायु परिवर्तन की वजह से हर चार साल में एक बार ऐसी भयंकर हीटवेव की उम्मीद की जा सकती है.
मरियम ज़कारायह ने एक बयान में कहा, "वैश्विक तापमान में होने वाले इज़ाफ़े में इंसानी गतिविधियों की भूमिका बढ़ने से पहले हम भारत में 50 वर्षों में कहीं एक बार ऐसी गर्मी महसूस करते थे, जैसे कि इस महीने के शुरू से पड़ रही है. लेकिन अब यह एक सामान्य सी बात हो गई है जो आगे भी होती रह सकती है."
हीट वेव का असर
भीषण गर्मी का पहला असर तो ये है कि देश भर में बिजली की खपत एकाएक और बहुत तेज़ी से बढ़ गई है.
अब क्योंकि भारत में ज़्यादातर बिजली थर्मल पॉवर प्लांट्स में बनती है तो ज़ाहिर है उनके लिए ईंधन के तौर पर कोयले की ज़रूरत पड़ती है.
एकाएक बढ़ी हुई डिमांड से कोयले की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है और कमी के चलते दिल्ली सरकार तक ने इस बात की घोषणा कर दी है कि आगे आने वाले दिनों में नॉन-स्टॉप बिजली की सप्लाई बाधित हो सकती है.
चिंता की बात ये भी है कि अगर ऐसा होता है तो उससे मेट्रो या अस्पतालों जैसी अहम सेवाओं पर भी असर पड़ेगा.
हीटवेव और बिजली सप्लाई में बाधा
एनटीपीसी के पूर्व महाप्रबंधक बीएस मुखिया के मुताबिक़, "जब भी गर्मी बढ़ेगी कोयले की सप्लाई पर असर पड़ेगा क्योंकि पॉवर प्लांट्स अपनी पूरी क्षमता पर बिजली उत्पादन कर रहे होंगे. लेकिन बिजली की खपत की रफ़्तार जिस दर से प्रतिदिन बढ़ती है, स्वाभाविक सी बात है उतनी रफ़्तार से बिजली का उत्पादन नहीं बढ़ पाता और डिमांड-सप्लाई में गैप बढ़ता जाता है."
लंबी अवधि तक चलने वाली हीटवेव और बिजली सप्लाई में बाधा का एक और बड़ा असर होता है औद्योगिक उत्पादन पर और ख़राब होती फ़सल पर.
मौजूदा हीटवेव से पनपते बिजली के संकट पर एक तरफ़ जहां केंद्र सरकार और राज्य सरकारों में आरोप-प्रत्यारोप जारी है.
इस बात को समझने की ज़रूरत है कि भारत में कोयले के बड़े भंडार होने के बावजूद देश कोयले का बड़ा हिस्सा आयात करता है. इसकी क़ीमतें भी बढ़ीं हैं और खपत की डिमांड भी.
ज़ाहिर है अगले कई हफ़्ते भारत के कई हिस्सों में मौसम के लिहाज से एक बड़ी चुनौती साबित हो सकते है.
गुजरात आपदा प्रबंधन संस्थान के सहायक प्रोफेसर और कार्यक्रम प्रबंधक अभियंत तिवारी के मुताबिक़, "हीट एक्शन प्लान में हमें पब्लिक कूलिंग एरिया, बिजली की कम कटौती, पीने के साफ पानी तक पहुंच और मजदूरों के काम के घंटों में बदलाव को सुनिश्चित करना होगा. खासकर समाज के निचले हिस्से के कमजोर लोगों के लिए भीषण गर्मी में हमें ये कदम उठाने होंगे."
गर्मी का मुक़ाबला कैसे करें
तापमान काबू में रखें: ज़्यादातर लोग इस बात से वाकिफ हैं. फिर भी ध्यान रखना जरूरी है कि अगर जिस्म 40 डिग्री सेंटीग्रेट का तापमान झेलता है तो हीट स्ट्रोक का शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता की ज़रूरत होती है. ऐसा नहीं होने पर बेहोशी और अंगों को नुक़सान हो सकता है. कुछ मामलों में मौत भी हो सकती है. अगर पसीना निकलना बंद हो जाए या फिर सांस लेने में दिक्कत हो तो ये भी ख़तरे के लक्षण हैं.
खाने पीने का ख़्याल: पानी पीते रहिए ताकि शरीर में पानी की कमी न हो. ऐसा खाना खाएं जिसमें पानी की मात्रा अधिक हो और आसानी से पच सके.
धूप में निकलने से बचें: आप घर के अंदर जितना रह सकते हैं, उतना अच्छा होगा. दिन के समय संभव हो तो बाहर न निकलें. एक्सरसाइज़ करते समय भी सावधान रहें.
कपड़े: बाहर निकले तो खुद को ढककर रखें लेकिन ध्यान रखें कि आप सूती या लिनेन का कपड़ा इस्तेमाल कर रहे हों. सिर पर टोपी या हैट लगाना बेहतर होगा.
खुद को कैसे ठंडा रखें: एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों के इस्तेमाल के अलावा फेस स्प्रे का इस्तेमाल और ठंडे पानी से नहाना भी कारगर हो सकता है. कमरे को ठंडा रखने के लिए पर्दा लगाकर रखें.
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