रोप-वे हादसे में कैसे एयरलिफ़्ट करके बचाए गए लोग, तस्वीरें

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झारखंड के देवघर ज़िले में त्रिकुट पहाड़ पर हुए रोपवे हादसे के बाद फँसे पर्यटकों को 46 घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद सुरक्षित निकाल लिया गया है.

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बचाव अभियान के दौरान दो लोगों की मृत्यु हो गई. दुर्घटना के दिन भी टक्कर में एक महिला की मौत हुई थी.

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त्रिकुट पहाड़ देवघर का एक आकर्षक पर्यटक और तीर्थस्थल है. वहाँ रोपवे से लोग एक ऊँची पहाड़ी पर जाते हैं. गत रविवार को रामनवमी के दिन शाम लगभग साढ़े चार बजे वहाँ हादसा हो गया.

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त्रिकुट पर्वत रोपवे की तार हुक से उतर गई, जिससे रोपवे की ट्रॉलियां नीचे की ओर झुक गई. इनमें से नीचे की दो ट्रॉलियां पत्थर से टकरा गईं, और एक महिला की मौत हो गई.

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इसके बाद स्थानीय प्रशासन, आईटीबीपी और भारतीय वायु सेना की मदद से बचाव अभियान शुरू हुआ जो कि मंगलवार दोपहर समाप्त हुआ.

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फंसे तीर्थयात्रियों को निकालने के लिए एयरलिफ़्ट का तरीक़ा अपनाया गया. वायुसेना ने कहा है कि यह बहुत चुनौतीपूर्ण अभियान था और सेना ने 10 केबल कार से 35 यात्रियों को बेहत कठिन परिस्थितियों में निकाला.

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इस अभियान में एमआई 17 वी5 और चीता हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया. गरूड़ कमांडर भी शामिल थे.

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स्थानीय पत्रकार कमल किशोर बताते हैं कि 2009 में उद्घाटन के दिन ही रोपवे की ट्रॉली चार घंटे तक हवा में अटक गई थी. उस समय श्रावणी मेला चल रहा था. करीब 80 पर्यटक इसमें फंस गए थे.
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