दिल्ली पुलिस की इजाज़त के बग़ैर हुई हिंदू महापंचायत की आंखों देखी

- Author, अभिनव गोयल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
"एक बार भारत का प्रधानमंत्री मुसलमान बना तो अगले बीस सालों में तुम में से 50 परसेंट लोग अपना धर्म बदलेंगे. 40 परसेंट हिंदुओं का क़त्ल होगा. 10 परसेंट हिंदू अपनी बहन-बेटी मुसलमानों को देकर या तो रिफ़्यूजी कैंपों में रहेंगे या विदेशों में रहेंगे, ये हिंदुओं को भविष्य है. अगर इस भविष्य को बदलना चाहते हो तो मर्द बनो. मर्द कौन होता है जिसके हाथ में हथियार होता है."
महंत यति नरसिंहानंद अपने इस भाषण के साथ और हिंदू महापंचायत एक बार फिर चर्चा में हैं.
दिल्ली के बुराड़ी में रविवार को महंत यति नरसिंहानंद मंच से खुलेआम हिंदुओं को ज़्यादा बच्चे पैदा करने और हथियार उठाने की अपील कर रहे थे.
भड़काऊ भाषण दे रहे थे. वो भी तब, जब वहां बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस मौजूद थी और हिंदू महापंचायत के कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं मिली थी.

हिंदू महापंचायत में क्या हुआ
तीन अप्रैल को दिल्ली के बुराड़ी मैदान में एक बड़ा मंच सजा था. चारों तरफ भगवा ध्वज लगे हुए थे. पंडाल में कई राज्यों से अलग-अलग हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता पहुंचे थे.
कार्यकर्ताओं की संख्या क़रीब 500 थी. मंच पर हिंदू संगठनों के वो जाने-पहचाने चेहरे थे जो पिछले कुछ महीनों से सुर्ख़ियों में हैं. इनमें महंत यति नरसिंहानंद भी थे.
यति नरसिंहानंद वही हैं, जिन्हें जनवरी 2022 में मुसलमानों के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में हरिद्वार में गिरफ़्तार किया गया था.
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इनके साथ मंच पर हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी भैया उर्फ़ भूपेंद्र तोमर भी मौजूद थे. पिंकी भैया भी अगस्त 2021 में जंतर मंतर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ़्तार हो चुके हैं.
इसके अलावा सुदर्शन न्यूज़ चैनल के संपादक सुरेश चव्हाणके, सेव इंडिया फ़ाउंडेशन के संस्थापक प्रीत सिंह और दूसरे कई चेहरे मौजूद थे.
हिंदू महापंचायत का आयोजन सेव इंडिया फ़ाउंडेशन ने किया था. कार्यक्रम की शुरुआत सुबह दस बजे यज्ञ से हुई. यज्ञ में छोटे बच्चे भी शामिल थे.
पंडाल में जैसे-जैसे कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी, वैसे-वैसे नारेबाज़ी तेज़ होती गई.
इस बीच भारी पुलिस बल के साथ दिल्ली पुलिस के कई अधिकारी मौके पर पहुंच चुके थे, लेकिन पुलिस ने ना तो कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की और ना ही आयोजन से जुड़े किसी व्यक्ति को रोका.

हिंदू महापंचायत के मंच से भड़काऊ भाषण
हिंदू महापंचायत में जुटे नेता इस बात से बेफ़िक्र थे कि वहां मौके पर पुलिस मौजूद है, साथ ही कई मीडिया संस्थानों के पत्रकार भी हैं.
महापंचायत के मंच से नेताओं ने पांच मांगें उठाईं. मंच के पीछे लगे बड़े पोस्टर में ये पांच मांगें लिखी हुई थीं- जनसंख्या नियंत्रण, समान शिक्षा, मंदिर मुक्ति, घुसपैठ नियंत्रण और धर्मांतरण नियंत्रण.
हिंदू महापंचायत में जुटे लोग मंच से इन पांच मुद्दों के इर्द-गिर्द ही भाषण दे रहे थे, लेकिन उनके तेवर बहुत भड़काऊ थे और निशाने पर मुसलमान समुदाय था.
महंत यति नरसिंहानंद ने मंच से भाषण देना शुरू किया तो कुछ ही देर में वो मुस्लिम समुदाय के साथ हिंदुओं को भी ललकारने लगे. ज़िक्र 'द कश्मीर फ़ाइल्स' फ़िल्म का भी आया.
महंत यति नरसिंहानंद ने भाषण में कहा, "केवल बच्चे पैदा करो. अभी जाओ, जो बच्चे पैदा कर सकते हो, वो कर लो और अपने बच्चों को लड़ने लायक बनाओ. अगर तुम चाहते हो कि इस धरती पर हिंदू-मुसलमानों की लड़ाई ना हो तो इसका एक तरीका है 'कश्मीर फ़ाइल्स' देखनी होगी. जैसे कश्मीर के लोग अपनी ज़मीन-जायदाद और अपनी बेटियों को छोड़कर भागे, ऐसे ही तुम छोड़कर भाग जाओ और हिंद महासागर में डूब कर मर जाओ, केवल यही रास्ता है तुम्हारे पास."
महंत यति नरसिंहानंद ने अपने भाषण में अयोध्या की राम जन्मभूमि को लेकर मुस्लिम समुदाय पर सवाल उठाए.
उन्होंने दावा किया, "राम जन्मभूमि भी मांगने से हमें नहीं मिली है. वो हमें कोर्ट जाकर मिली है. उधर, एक-एक मुसलमान ने कसम खाई कि जिस दिन इस देश का निज़ाम हमारे हाथ में होगा, हम इस मंदिर को तोड़ेंगे और दोबारा से मस्जिद बनाएंगे."
महंत यति नरसिंहानंद यहीं नहीं रुके. उन्होंने हिंदुओं से हथियार उठाने की अपील की. "जितना प्यार पतिव्रता औरत अपने मंगलसूत्र से करती है, मर्द उतना ही प्यार अपने हथियारों से करते हैं."
हिंदू महापंचायत के मंच से दूसरे वक्ताओं का तेवर भी उग्र था. किसी ने लाल किले पर भगवा झंडा फहराने की बात कही तो किसी ने मुसलमानों का डर दिखाकर हिंदुओं से आबादी बढ़ाने की अपील की.

पत्रकार भी निशाना बने
हिंदू महापंचायत के दौरान कई कार्यकर्ताओं ने पत्रकारों के ख़िलाफ़ भी नारेबाज़ी शुरू कर दी. कार्यकर्ता पत्रकारों को वामपंथी और मुस्लिम बता रहे थे. बात यहीं नहीं थमी.
कार्यक्रम के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कुछ पत्रकारों के साथ हाथापाई भी शुरू कर दी. मामला बिगड़ता देख दिल्ली पुलिस कुछ पत्रकारों को ज़बर्दस्ती अपनी गाड़ी में बिठाकर थाने ले गई.
बाद में डीसीपी नॉर्थ वेस्ट उषा रंगनानी ने ट्वीट कर सफ़ाई दी कि पुलिस सुरक्षा के मद्देनज़र पत्रकारों को अपने साथ ले गई थी. किसी पत्रकार को गिरफ़्तार नहीं किया गया है.

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अनुमति के बगैर आयोजन क्यों?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक़, दिल्ली के बुराड़ी मैदान में हिंदू महापंचायत को कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं मिली थी.
हिंदू महापंचायत के आयोजक प्रीत सिंह ने बीबीसी से कहा, "हमने पुलिस में डीसीपी को आवेदन दिया, डीडीए के पांच अधिकारियों को दिया, सबको सूचना देकर यहां आए. उन्होंने हमें एनओसी भी नहीं दी. उनको कोई ऑब्जेक्शन भी नहीं है. उन्हें हमारे यहां पर कार्यक्रम करने से कोई परेशानी नहीं है. दिल्ली पुलिस ने तीन दिन पहले हमें लेटर भेजा कि हम सुरक्षा नहीं दे पाएंगे."
हिंदू महापंचायत में जिस समय मंच से भड़काऊ भाषण दिए जा रहे थे उस समय दिल्ली पुलिस के कई अधिकारी वहीं मौजूद थे.
सवाल ये था कि जब कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं मिली तो फिर कार्यक्रम को रोका क्यों नहीं गया.
ये सवाल बीबीसी ने मौके पर मौजूद मुखर्जी नगर थानाध्यक्ष से पूछा तो उन्होंने बात करने से मना कर दिया. पुलिस के उच्च अधिकारी भी बात करने से बचते नजर आए.
हिंदू महापंचायत के क़रीब 24 घंटे बाद दिल्ली पुलिस ने बिना अनुमति के आयोजन करने, भड़काऊ भाषण देने और पत्रकारों के साथ हाथापाई के मामले में अलग-अलग एफ़आईआर दर्ज की है.

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पहले भी हो चुके हैं विवाद
हिंदू महापंचायत में अलग-अलग राज्यों के हिंदू संगठन हिस्सा लेते हैं. दिल्ली के बुराड़ी मैदान में महापंचायत का आयोजन सेव इंडिया फ़ाउंडेशन नाम की संस्था ने किया था.
सेव इंडिया के कर्ताधर्ता प्रीत सिंह हैं. इससे पहले प्रीत सिंह आठ अगस्त 2021 को जंतर-मंतर पर हिंदू महापंचायत आयोजित कर चुके हैं.
उस कार्यक्रम के दौरान मुसलमान विरोधी नारेबाज़ी हुई थी जिसमें प्रीत सिंह और पिंकी भैया को दिल्ली पुलिस ने गिरफ़्तार किया था.
जंतर-मंतर पर कार्यक्रम के बाद दिसंबर महीने में हरिद्वार में धर्म संसद का आयोजन हुआ था जिसे लेकर भी ख़ूब विवाद हुआ था.
इस धर्म संसद में धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने, मुस्लिम प्रधानमंत्री न बनने देने, मुस्लिम आबादी न बढ़ने देने समेत धर्म की रक्षा के नाम पर विवादित भाषण देते हुए साधु-संत दिखाई दिए थे.
इसमें पुलिस ने महंत यति नरसिंहानंद को हेट स्पीच को लेकर गिरफ़्तार किया था.
वहीं, छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित हुई धर्म संसद में महात्मा गांधी के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक बयान दिया गया था. इस मामले में कालीचरण महाराज को जेल जाना पड़ा था.
तमाम विवादों के बीच हिंदू महापंचायत के आयोजक और उससे जुड़े संगठनों का कहना है कि भविष्य में वे इस तरह के कार्यक्रम जारी रखेंगे.
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