भारत के साथ ‘गुपचुप’ किए गए रक्षा समझौते पर श्रीलंका को देनी पड़ी सफ़ाई - प्रेस रिव्यू

श्रीलंका

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भारत के साथ दो रक्षा समझौतों को लेकर श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय को बयान जारी करना पड़ा है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' के मुताबिक़, दोनों देशों ने इन रक्षा समझौतों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की थी लेकिन अब श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय को इसको लेकर मीडिया में सफ़ाई जारी करनी पड़ी है.

रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बयान जारी किया जिसमें उसने बताया, "भारत सरकार के साथ हाल ही में जिस समुद्री सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं वो श्रीलंका की राष्ट्रीय सुरक्षा को न ही ख़तरे में डालता है और न ही उसे बाधा पहुंचाता है."

इसमें बताया गया है कि 'भारत सरकार से फ़्लोटिंग डॉक की सुविधा बिना किसी क़ीमत पर मिलेगी', साथ ही 'डोर्नियर टोही विमान भारत बिना किसी क़ीमत के श्रीलंका को मुहैया कराएगा.'

श्रीलंका रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल नलिन हेरात ने 'द हिंदू' से कहा है कि दोनों समझौते 16 मार्च को हुए थे जिसमें श्रीलंका रक्षा मंत्रालय के सचिव और कोलंबो में भारतीय उच्चायोग के अधिकारी मौजूद थे.

श्रीलंकाई विपक्षी पार्टियों का हंगामा

इस समझौते को लेकर जिस तरह की चुप्पी बनाई गई थी उसको लेकर श्रीलंका के विपक्षी नेताओं ने आपत्ति दर्ज की थी. उनका कहना था कि यह श्रीलंका की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए एक 'ख़तरा' है.

श्रीलंका सेना

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श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी एसजेबी के सांसद हेरिन फ़र्नांडो ने आरोप लगाया था कि श्रीलंका ने 'अपने हवाई क्षेत्र को बेच दिया है.'

फ़र्नांडो ने संसद को बताया था कि, "इन समझौतों को करने के बाद श्रीलंका क्षेत्रीय युद्ध में शामिल होने का ख़तरा मोल ले रहा है क्योंकि इसके कारण भारत को श्रीलंका जल और आसमान को नियंत्रित करने का अवसर मिल जाएगा जबकि चीन हंबनटोटा बंदरगाह को नियंत्रित कर रहा है."

वहीं एक दूसरे विपक्षी दल जेवीपी ने श्रीलंका की सरकार पर आरोप लगाया है कि 1 अरब डॉलर की मदद के बदले में भारत के साथ इन रक्षा समझौतों को किया गया है.

श्रीलंका की आर्थिक स्थिति लगातार ख़राब होने के बाद इस साल की शुरुआत से अब तक भारत ने उसकी 2.4 अरब डॉलर की मदद की है. जनवरी के बाद से भारत ने श्रीलंका के साथ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए हैं जिनमें त्रिंकोमाली ऑयल टैंक फ़ार्म्स और तीन अन्य मुख्य पावर प्रोजेक्ट शामिल हैं.

फ़्लोटिंग डॉक और डोर्नियर विमान को लेकर कई द्विपक्षीय बातचीत में दोनों देश इसकी चर्चा कर चुके थे.

रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, "भारत सरकार फ़्लोटिंग डॉक की सुविधा बिना किसी ख़र्चे के मुहैया कराएगी जिसके कारण 60 करोड़ श्रीलंकाई रुपये की बचत होगी, यह प्रस्ताव साल 2015 से पाइपलाइन में था."

वहीं डोर्नियर टोही विमान समुद्री निगरानी के लिए तैनात किया जाएगा जो कि खोजी और बचाव अभियान में जानकारियां मुहैया कराएगा.

आरबीआई

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रूस का केंद्रीय बैंक और RBI तय करेंगे व्यापारिक ढांचा

रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों के बाद रूस का केंद्रीय बैंक और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अधिकारी जल्द ही मुलाक़ात करने वाले हैं.

'द इकोनॉमिक टाइम्स' अख़बार के मुताबिक़, दोनों केंद्रीय बैंकों के अधिकारियों की मुलाक़ात द्विपक्षीय व्यापार और बैंकों के कामकाज का एक नियामक ढांचा तय करने को लेकर होने वाली है.

ग़ौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद उस पर कई वैश्विक प्रतिबंध लगा दिए गए हैं जिसके कारण उसकी बैंकिंग सेवा पर बड़ा असर पड़ा है.

रूस से भारत अपनी जिन ऊर्जा ज़रूरतों की पूर्ति करता है उसका भुगतान किस तरह से आगे होगा उस पर भी चर्चा होनी है.

रुपये और रूबल में ख़रीदारी करने के मुद्दे पर भी इस बैठक में अहम फ़ैसला हो सकता है. मॉस्को से भारत आ रही टीम में रूस के वित्तीय सेक्टर के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.

रिज़र्व बैंक और रूसी अधिकारियों के बीच यह बैठक इस सप्ताह हो सकती है.

कोरोना टेस्टिंग

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केंद्र सरकार ने कहा भारत में कोरोना से सबसे कम मौतें

भारत सरकार ने बताया है कि कोरोना महामारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा दुनिया में तुलनात्मक रूप से सबसे कम रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के हवाले से केंद्र सरकार ने यह जानकारी दी है.

'अमर उजाला' अख़बार के मुताबिक़, केंद्र सरकार ने बताया है कि देश में कोरोना से प्रति 10 लाख लोगों पर सिर्फ 374 जानें गईं, जो तमाम सुविधा संपन्न अमेरिका से करीब आठ गुना कम हैं.

वहीं ब्राज़ील, रूस और मेक्सिको जैसे समान रूप से प्रभावित मुल्कों की तुलना में भारत के हालात काफ़ी बेहतर रहे हैं.

मंगलवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने बताया कि कुछ रिपोर्टों में भारत में कोरोना से हुई मौतों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया जो आधिकारिक आंकड़े से बहुत ज़्यादा है.

उन्होंने बताया कि ऐसी रिपोर्ट अमान्य तरीकों पर आधारित हैं या फिर उन्होंने जो डाटा इस्तेमाल किया उसका स्रोत विश्वसनीय नहीं है.

सोनिया गांधी

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कांग्रेस नहीं चुन पाई अब तक विधायक दल का नेता

कांग्रेस ने अब तक उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं किया है.

'हिंदुस्तान' अख़बार के मुताबिक़, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए करीब तीन सप्ताह बीत चुके हैं और इन सभी राज्यों में जीत दर्ज करने वाली पार्टियों ने अपनी सरकार का गठन कर लिया है.

उत्तर प्रदेश और मणिपुर में कांग्रेस को विधायक दल का नेता चुनने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उत्तर प्रदेश में पार्टी के सिर्फ दो विधायक हैं.

वहीं मणिपुर में पार्टी सिर्फ पांच सीट हासिल कर पाई है लेकिन गोवा, उत्तराखंड और पंजाब में उसे विधायक दल का नेता चुनना है.

उत्तराखंड में निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गणेश गौदियाल और वरिष्ठ नेता हरीश रावत चुनाव हार चुके हैं. ऐसे में प्रीतम सिंह एक बार फिर विधायक दल का नेता बनने के लिए भागदौड़ कर रहे हैं. हालांकि, पार्टी नेता उन्हें भी हार के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं, क्योंकि चुनाव से कुछ महीने पहले तक वह प्रदेश अध्यक्ष थे.

पंजाब में भी पार्टी के सामने ऐसी ही दिक्कत है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी दोनों सीट से चुनाव हार गए हैं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि किसी युवा नेता को विधायक दल का नेता चुना जा सकता है. नए प्रदेश अध्यक्ष की भी नियुक्ति होनी है.

गोवा में भी पार्टी ने अभी तक नव-निर्वाचित विधायकों की बैठक नहीं बुलाई है.

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