बिहार के मधेपुरा में महिला को बेरहमी से पीटने का मामला, दो की गिरफ़्तारी

बिहार, मधेपुरा

इमेज स्रोत, Aashish Kumar

    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए

बिहार के मधेपुरा ज़िले का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक महिला सिर पर पल्लू रख कर खड़ी हैं और उनके आस-पास खड़े पुरुष स्थानीय भाषा में गुस्से में बोल रहे हैं.

वीडियो में एक आदमी बांस की छड़ी को हल्की आग में तपाता भी दिख रहा है. इतने में गुस्साए लोग महिला को उस छड़ी से बेरहमी से पीटना शुरू कर देते हैं और महिला की साड़ी खोल देते हैं.

सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने अब तक इस मामले में दो लोगों की गिरफ़्तारी की है.

पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया जाएगा.

मधेपुरा के पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बीबीसी को बताया, "इस मामले में शंकर दास के साथ साथ एक और अभियुक्त की गिरफ़्तारी हो गई है. मामले मे सात लोगो के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया गया है. ये घटना 20 मार्च को ही घटी लेकिन पुलिस के संज्ञान मे ये मामला 23 मार्च को आया जब ये महिला सादर अस्पताल इलाज करने गईं. पूरे मामले मे एक जाति पंचायत बैठी जिसने इस महिला पर आरोप लगाते हुए पूरी घटना को अंजाम दिया."

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क्या है पूरा मामला?

ये घटना 19 और 20 मार्च की है. मधेपुरा शहर से महज कुछ किलोमीटर दूर तुलसीबाड़ी गांव में ये घटना घटी. इस गांव में तांती समुदाय के 15 से 20 घर के टोले (कुछ घरों की एक छोटी सी रिहाइश) में ये घटना घटी.

वीडियो में दिख रही पीड़ित महिला अल्पना कुमारी (बदला हुआ नाम) ने बीबीसी को बताया, "19 तारीख की रात को मेरे पेट में दर्द उठा तो मैं शौच के लिए मकई के खेत की तरफ़ गई. वहां शंकर दास, पिंटू दास, प्रदीप दास और अभय दास ने मिलकर मुझे पकड़ लिया और मेरे साथ सामूहिक दुष्कर्म करने की कोशिश की. जब मैं चिल्लाने लगी तो मेरे ससुर आ गए जिसके बाद इन लोगों ने किसी को नहीं बताने की धमकी देकर छोड़ दिया."

वो आगे बताती हैं, "सुबह आठ से नौ के बीच ये चारों लोग मुझे फिर खींच लाए और मेरे ससुर को बांध दिया. इन लोगों ने इसके बाद गर्म बांस की लकड़ी से मुझे बेरहमी से मार पीटा, साड़ी खींच ली और लगभग दस हजार के जेवर छीन लिए. बाद में बुचाय दास के घर के सामने मेरे साथ रवेन्द्र तांती, मनोज दास और चंदन दास ने मेरे साथ गंदी हरकतें की."

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जिन लोगों ने मारा, वहीं अस्पताल ले गए

चार लड़की और एक लड़के की मां अल्पना कुमारी के पति अविनाश कुमार (बदला हुआ नाम) पंजाब की गोविन्दगढ़ मंडी में मजदूरी करते है. अल्पना गांव में अपने सास ससुर के साथ रहती है. अविनाश पंजाब में रोजाना महज 300 रुपये कमाते हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "मुझे मेरी 14 साल की बेटी का फोन आया कि पापा-मम्मी को बहुत मारा है और दादा-दादी के साथ भी मारपीट कर रहे हैं. जिसके बाद मैंने गाड़ी पकड़ी और 22 मार्च की रात को 11 बजे सहरसा पहुंचा फिर मधेपुरा आया. जिन लोगों ने इसके साथ गलत हरकत की वो इसे अस्पताल ले कर इलाज कराने ले गए और घर वापस ले आए. लेकिन ये ठीक नहीं हुई. घर पहुंचने के बाद 23 मार्च को प्राइवेट डॉक्टर के पास ले गया जिसके बाद उसी दिन सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. उसी दिन थाने में शिकायत भी की."

अल्पना का इलाज फिलहाल सदर अस्पताल मधेपुरा में चल रहा है. पति अविनाश बताते हैं कि उनके सिर में दर्द रहता है और पूरे शरीर पर पिटाई के जख्म साफ देखे जा सकते हैं. मधेपुरा के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक संतोष कुमार ने बीबीसी को बताया, "महिला की हालत अभी स्थिर है. उनका सिटी स्कैन मेडिकल कॉलेज में कराया गया है."

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पति और गांव वाले क्या कहते हैं

इस पूरी घटना को लेकिन ज़मीनी स्तर पर अलग-अलग बातें की जा रही हैं.

गांव के ही 22 साल के ग्रामीण चिकित्सक निकेश कुमार ने बीबीसी से कहा, "महिला के ससुर ने ही पंचायत में कहा था कि उसके साथ जो चाहे वो सुलूक करें. बाकी जो कुछ हुआ, सही तो नहीं हुआ. महिला का साड़ी खोल दी, सारी इज़्ज़त खत्म हो गईं."

इस घटना को कवर करने गए स्थानीय पत्रकार तुरबसु बताते है, "19 तारीख को मकई के खेत में घटी घटना के बाद रात में एक बार तांती जाति की पंचायत एक बार फिर बैठी. जिसमें पीड़िता के ससुर ने इस बात पर सहमति दे दी कि उनकी बहू यानी पीड़िता के ख़िलाफ़ पंचायत कोई भी कदम उठा सकता है. सुबह हुई तो इन लोगों ने पीड़िता महिला को बेरहमी से पीटा. लेकिन मामला जब सुर्खियों में आया तो इन लोगों ने नई बात कही कि इलाके में ये महिला चोरी करवा रही थी और मुखबिरी कर रही थी."

वहीं, पीड़िता के पति अविनाश ने बीबीसी को बताया, "ये लोग पहले भी इसको गलत कहते रहते थे और परिवार को तंग करते रहते थे. मेरे पापा को भी एक बार इन्ही लोगों में से एक शंकर दास ने पहले भी बहुत पीटा था. हम सब लोग गरीब आदमी है किसी के पास पैसा नहीं है. लेकिन फिर भी ये लोग दबंगई करते है. बाकी मुझे ज्यादा मालूम नहीं है क्योंकि मैं जब से आया हूं तब से तो पत्नी के इलाज में भी लगा हूं."

मामले में फरार सभी अभियुक्तों में से एक शकंर दास की मां और प्रदीप दास की पत्नी इस पूरी घटना को गलत नहीं मानती. वो कहती है, "अगर उस औरत को समझाया नहीं जाता तो हमारे घरों की बहू-बेटियां भी इसी तरह बिगड़ जाती."

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