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मध्य प्रदेश: आदिवासी लड़की के साथ छेड़खानी का वायरल वीडियो, क्या है पूरा मामला
- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी के लिए
मध्य प्रदेश के अलीराजपुर का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक आदिवासी लड़की के साथ वहां पर मौजूद युवक छेड़खानी कर रहे हैं. इस वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने अब तक तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.
अलीराजपुर के पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने बीबीसी को बताया, "वीडियो परसों (शुक्रवार) का है. इस मामले में किसी ने भी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है. पुलिस ने वीडियो के आधार पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज़ किया है."
उन्होंने आगे बताया कि इस मामले में जिन तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है उनसे पूछताछ की जा रही है.
प्रदेश का अलीराजपुर ज़िला आदिवासी बहुल है. ज़िले के वालपुर गांव में 11 मार्च को भगोरिया मेला का आयोजन किया गया था.
वीडियो में देखा जा सकता है कि एक लड़की मेले में खड़ी एक गाड़ी के पीछे छिपने की कोशिश कर रही है, इसी बीच वहां से गुज़र रही लड़कों की एक टोली में शामिल एक युवक उसके साथ बदतमीज़ी करता है. यह भी देखा जा सकता है कि उसी टोली में शामिल दूसरा लड़का भी उस लड़की को खींचने लगता है और वो उसे लेकर चले जाते हैं.
भगोरिया मेला
कांग्रेस के नेता केके मिश्रा ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया है और वो सरकार को इस वीडियो के ज़रिये निशाने पर ले रहे हैं.
उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रदेश में इस तरह बेटी बचाओ अभियान चल रहा है.
भगोरिया मेला हर साल इस इलाक़े में होली से एक हफ़्ते पहले आयोजित किया जाता है. यह एक तरह का हाट होता है जिसमें आप आदिवासी संस्कृति और उनके जीवन को क़रीब से देख सकते हैं. इसमें आदिवासी युवक और युवतियों को उनके परिधानों में सजे हुए देखा जा सकता है.
इसमें सामान की ख़रीदारी के साथ ही आदिवासी संगीत और नृत्य भी देखा जा सकता है. यह हर रोज़ अलग अलग इलाक़ों में लगते है और नौजवान बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं.
यह भी माना जाता है कि इसी मेले में आदिवासी अपनी ज़रूरत का सामान ख़रीदते और बेचते हैं. लेकिन कुछ का यह भी मानना है कि पिछले कुछ सालों में इस मेले में आधुनिकता का रंग भी देखा जा सकता है जिसकी वजह से यह वैसा नहीं रह गया है जैसा यह पहले हुआ करता था.
वहीं पुलिस ने इस बात से इनकार किया है कि लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया है. उनका कहना है कि इस वक़्त जो गिरफ़्तारियां की गई है उनसे उनके साथ शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी इकठ्ठा की जा रही है.
नेशनल क्राइम रिकोर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट में एमपी
वैसे देखा जाए तो बाल अपराध और आदिवासियों के साथ होने वाले अत्याचार में प्रदेश का स्थान नंबर एक पर है. वहीं महिला अत्याचारों में प्रदेश 5वें नंबर पर आता है.
नेशनल क्राइम रिकोर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक़, प्रदेश में अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत 2,401 केस दर्ज किये गये थे. प्रदेश तीन साल से देश में नंबर एक पर मौजूद है.
इससे पहले के साल के मुक़ाबले यह 20 प्रतिशत ज़्यादा रहा है. साल 2020 में दुष्कर्म के 2,339 केस दर्ज किए गए. इसके मुताबिक़ हर रोज़ 6 महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहा है.
सामाजिक कार्यकर्ता और वकील सिद्धार्थ गुप्ता आरोप लगाते हैं कि प्रदेश में पुलिस की जो स्थिति है उसमें हम देख रहे हैं कि लोगों को भरोसा नहीं है कि पुलिस कुछ करेंगी इसलिए लोग मामले भी दर्ज कराने नहीं जाते हैं.
वहीं कई ऐसे मामले हैं जब लोग मामले दर्ज करा देते हैं तो पुलिस उन्हें सुरक्षा उपलब्ध करा पाती है और उनकी हत्या हो जाती है.
सिद्धार्थ गुप्ता कहते हैं, "इसी वजह से अपराध होने के बाद भी लोग आगे नहीं आते हैं और अपराधियों के हौसला और बढ़ता है."
गुप्ता कहते हैं कि प्रदेश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब पुलिस के पास अपराध दर्ज कराने गये हैं तो मामला दर्ज नहीं किया गया है लेकिन जैसे उस घटना से संबंधित कोई वीडियो वायरल होता है तो पुलिस कारवाई करने लगती है.
एक अन्य सामाजिक कार्यकर्ता विजया पाठक मानती है कि प्रदेश में महिलाओं के प्रति हिंसा लगातार बढ़ रही है.
उन्होंने कहा, "यह ज़रूरी है कि सरकार जो कहती है, वो करे. सरकार महिलाओं और लड़कियों के लिये बड़े बड़े नारे लगाती है लेकिन अपराध के मामले देखेंगे तो उसमें कहीं कमी नहीं नज़र आती है."
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